कंसीव करने के बाद नौ महीने की प्रेगनेंसी को हेल्‍दी बनाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं होता है। प्रेगनेंट होने के बाद दिमाग में बस यही आता है कि अब मुझे क्‍या खाना चाहिए, कैसे एक्‍सरसाइज करनी चाहिए और किन बातों का ध्‍यान रखना चाहिए। अगर आप पहली बार मां बन रही हैं ,तो आपके लिए यह जानना और भी ज्‍यादा जरूरी हो जाता है कि हेल्‍दी प्रेगनेंसी रूटीन के लिए आपको किन बातों का ध्‍यान रखना चाहिए।

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जानिए हेल्दी प्रेगनेंसी रूटीन में अपनाई जानें वाली 6 बातें (healthy pregnancy routine)

1.बैलेंस्ड डाइट

प्रेगनेंसी के दौरान ही नहीं बल्कि कंसीव करने से पहले और डिलीवरी के बाद भी महिलाओं को अपनी डायट का ध्‍यान रखना होता है। प्रेगनेंसी में पौष्टिक आहार लेने से शिशु के मस्तिष्‍क का सही विकास होने में मदद मिलती है और जन्‍म के समय शिशु का वजन भी ठीक रहता है। संतुलित आहार से शिशु में जन्‍म विकार,प्रेगनेंसी में एनीमिया, मॉर्निंग सिकनेस आदि से भी बचाव होता है। जंकफूड खाने से बचें। हेल्‍दी प्रेगनेंसी रूटीन

2.उबले हुए अंडे

प्रेगनेंसी के नौ महीनों में शरीर शिशु के पोषण और विकास के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहा होता है। इस समय में शरीर को पर्याप्‍त मात्रा में प्रोटीन की जरूरत होती है जिसे अंडे से पूरा किया जा सकता है। इससे मां और बच्‍चे दोनों की प्रोटीन की आवश्‍यकता को पूरा किया जा सकता है।


3.कैसी एक्‍सरसाइज करें

स्‍वस्‍थ और फिट रहने के लिए एक्‍सरसाइज से बेहतर और कोई तरीका नहीं है। प्रेगनेंसी में बढ़ने वाले वजन को भी एक्‍सरसाइज से कंट्रोल किया जा सकता है। नियमित व्‍यायाम से मां और शिशु दोनों स्‍वस्‍थ और सुरक्षित रहते हैं | हेल्‍दी प्रेगनेंसी रूटीन

4.अच्‍छी आदतें अपनाएं

स्‍वस्‍थ जीवनशैली का सीधा प्रभाव बच्‍चे की सेहत पर पड़ेगा।प्रेग्नेंट महिला को तंबाकू, सिगरेट और शराब का सेवन नहीं करना चाहिए। प्रेगनेंसी में शराब पीने से मां की रक्‍त वाहिकाओं से एल्‍कोहल शिशु की रक्‍त वाहिकाओं में पहुंच सकता है जिससे फीटल एल्‍कोहल सिंड्रोम हो सकता है।
ऐसा प्रेगनेंसी के नौ महीनों में लगातार शराब पीने से होता है। सिगरेट शिशु तक पहुंचने वाले ऑक्‍सीजन और रक्‍त प्रवाह को प्रभावित कर सकती है। इसलिए बेहतर होगा कि आप गर्भावस्‍था के दौरान इन सब चीजों से दूर रहें।

5.स्‍ट्रेस हेल्‍दी प्रेगनेंसी रूटीन

हेल्थ का सबसे बड़ा दुश्मन है स्‍ट्रेस। स्‍ट्रेस का असर प्रेग्नेंट महिला और उसके बच्‍चे दोनों पर पड़ता है। मानसिक और शारीरिक तनाव से दूर रह कर प्रेगनेंसी और डिलीवरी के दौरान कई कॉम्प्लीकेशन्स से बचा जा सकता है।स्‍ट्रेस के कारण कंसीव करने में भी दिक्‍कत आ सकती है और यहां तक कि प्रीमैच्‍योर लेबर भी हो सकता है। यही वजह है कि प्रेगनेंट महिलाओं को खुश रहने की सलाह दी जाती है। हेल्‍दी प्रेगनेंसी रूटीन

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