Importance Of Bhai Dooj: दिवाली में भाई दूज का क्या महत्व है?

Importance Of Bhai Dooj: दिवाली में भाई दूज का क्या महत्व है? Importance Of Bhai Dooj: दिवाली में भाई दूज का क्या महत्व है?

SheThePeople Team

30 Oct 2021


Importance Of Bhai Dooj: यह पर्व दीपावली के सप्ताह में मनाया जाता है। यह दिवाली का अंतिम त्योहार है और दिवाली के दो दिन के बाद मनाया जाता है। भाई दूज भाई और बहन के बीच संबंध और प्यार दिखाता है। लेकिन आप कभी सोचते हैं, कि भाई दूज क्यों मनाया जाता है। इस आर्टिकल में हम आपको भाई दूज मनाने की वजह बताएंगे।

Importance Of Bhai Dooj: भाईदूज का महत्व

भाई-बहन के जीवन में भाईदूज का दिन विशेष महत्व रखता है। यह शुभ अवसर दो विपरीत लिंग भाई बहनों के बीच मजबूत संबंध मनाता है। एक महत्वपूर्ण अवसर में अद्भुत त्योहार है, कि भाई बहन के बीच प्यार को दिखाता हैं। इस दिन भाई अपनी बहन के घर (यदि उसकी शादी हो गई है) जाता है। बहन भाई की आरती करती है, और  भाई के माथे पर तिलक लगाती है‍। इसके साथ ही आरती की थाली में नारियल का गोला और कुछ मिठाई भी चढ़ाई जाती है। इसके बदले में भाई अपना प्यार दिखाता है और उसे गिफ्ट देता है। इस दिन बहन भी अपने भाई के लिए खाना बनाती है और अपने भाई को कई मिठाइयां खिलाती है।


भाईदूज का अर्थ


भाईदूज दो शब्दों से बना भाई + दूज, जहां भाई का मतलब भाई और दूज का अर्थ है नए चंद्रमा के बाद दूसरे दिन जो इसके उत्सव का दिन है। भाई दूज के पर्व का अर्थ इससे जुड़ा होता है।


भाईदूज क्यों मनाया जाता है?



  • भगवान यमराज पुराण- एक दिन भगवान यम (मृत्यु के देवता) अपनी बहन यामी के घर आते हैं। वह आरती के साथ उनका स्वागत करती हैं और यमराज के माथे पर तिलक लगाती हैं। यामी ने यमराज को कुछ मिठाइयां पेश किया। इसके बदले में यम भी एक उपहार देता है और उसके प्रति अपने प्रेम और स्नेह का दिखाता है। अपनी बहन के प्रेम से खुश होकर, यमराज ने घोषणा की कि जो भी भाई इस दिन अपनी बहन से आरती, तिलक और मिठाई प्राप्त करेगा, उसे मृत्यु से कभी डर नहीं लगेगा।

  • भगवान कृष्ण पुराण- इस दिन भगवान कृष्णा ने राक्षस नरकासुर को मारने के बाद अपनी बहन सुभद्रा से मिलने गए थे। उन की बहन उन्हें फूलों और मिठाइयों के साथ स्वागत करती है । सुभद्रा ने अपने भाई कृष्णा के माथे पर तिलक भी लगाया। यही कारण है कि भाई दूज के पर्व का जन्म हुआ।


एक्स्ट्रा फैक्ट्स



  • नए चंद्रमा के बाद दूसरे दिन "दूज" के रूप में जाना जाता है।

  • कर्तिका पूर्णिमा को रासा-पूर्णिमा कहा जाता है क्योंकि रासा तब शुरू होता है जब सूर्य Equinox Point में प्रवेश करता है। ऐतिहासिक रूप से इस बिंदु को कृतिका के नाम से भी जाना जाता था।





अनुशंसित लेख