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क्या बोर्ड परीक्षा की उलझन कर रही है बच्चों को परेशान और डिप्रेस ?

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Swati Bundela
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जैसा कि हम सब समझते और जानते हैं बोर्ड़ परीक्षा का महत्व जो कि काफी ज़रूरी है हर एक बच्चे की शिक्षा के सफर के लिए लेकिन क्या वो बच्चे के जीवन से भी जयदा ज़रूरी है ? क्या गवर्नमेंट को इस मुद्दे पे थोड़ी ज़्यादा गोर नहीं करनी चाहिए ? आज देश का हर 10 वी और 12 वी का बच्चा जिस दौर से गुज़र रहा है वो खुद ही जानता है। इसलिए आज हम आपको बताएंगे कैसे बोर्ड परीक्षा की उलझन कर रही है बच्चों को परेशान और डिप्रेस -

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1. मानसिक तनाव से परेशान



10 वी और 12 वी कक्षा में हर एक बच्चा मानसिक तनाव से गुज़रता है क्योंकि बोर्ड्स का नाम सुनते ही आप बड़े उत्साह से उसके रिजल्ट के बारे में जानना और पूछना पसंद करते हैं और हर बच्चा भी इन कक्षाओं में ख़ास ध्यान लगाकर पड़ता है। एक समय के बाद परीक्षा और रिजल्ट भी आ जाता है लेकिन इस कोरोना काल में ऐसा कब से हो ही नहीं पा रहा है और बच्चो की टेंशन बड़ती ही जा रही है।
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2. होगी भी एग्जाम या नहीं ? बच्चों को नहीं मिल रही क्लैरिटी



हर
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बच्चा पहले एक दम ज़ोश में पड़ रहा था क्योंकि सोशल मीडिया पे कोई अफवाह नहीं थी और कोरोना भी जैसे चला ही गया था। लेकिन अब दिन रात सोशल मीडिया पे अफवाह और देशों में बढ़ते कोरोना के केसेस बच्चों को काफी विचलित और राह से भटका रहा है। कुछ बच्चे पूरी तरह से अफवाहों पे विश्वाश कर चुके हैं लेकिन काफी बच्चों को ये कन्फ्यूजन परेशान कर रही है कि आखिर होगे भी एग्जाम या नहीं और अगर हाँ तो आखिर कैसे और कब हम 10 वी और 12 वी कक्षा के आगे बड़ पाएंगे।

3. क्या देश की तरह हमारी एग्जाम का रुकना ज़रुरी नहीं ?



जैसे कि पिछले 1 डेड साल से हर ज़रुरी से ज़रुरी काम को टाला जा रहा है या सीधा कैंसिल कर दिया जाता है वैसे ही बोर्ड्स क्यों नहीं ? क्या 10 वी और 12 वी के बच्चे बच्चे नहीं हैं ? क्या ये कोई सुपर पावर्स के साथ पैदा हुए थे या इनकी जाने प्यारी नहीं किसी को ऐसे ही हर सवाल का जबाब ढूंढ रहा है हर एक 10 वी और 12 वी का बच्चा आखिर कब तक चलेगा कोरोना का खोफ सिर्फ इनके लिए ही है और प्रीकॉशन्स दुनिया के लिए हैं।
पेरेंटिंग
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