जब से 18 साल से ऊपर के लोगों को कोरोना वैक्सीन मिलनी शुरू हुई है लोगों में ये जिज्ञासा बढ़ गयी है की 18 वर्ष से कम उम्र के लोगों को वैक्सीन कब मिलेगी। 1 जनवरी से आरम्भ हुए इस वैक्सीन अभियान में अलग अलग उम्र के लोगों को सरकार ने अलग अलग चरणों में वैक्सीन लेने की इज़्ज़ज़त दी है। लेकिन अभी तक 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए वैक्सीन मुहैय्या नहीं हुई है।

बच्चों में क्यों ज़रूरी है वैक्सीनेशन ?

वैसे तो अभी तक विश्व भर में बच्चों में कोरोना के कम मामले ही सामने आएं हैं। इसका श्रेय बच्चों की स्ट्रांग इम्युनिटी सिस्टम को दिया जा सकता है। पर बच्चों में हार्ड इम्युनिटी विकसित करने के लिए उन्हें वैक्सीन लगवाना बहुत ज़रूरी है। जब उनमें वैक्सीन लग जाएगी तो उन्हें वापस स्कूल भेजने में उनके माता-पिता को भी ज़्यादा दिक्कत नहीं होगी।

कोरोना की सेकंड वेव

जिस तरह भारत में कोरोना की दूसरी वेव काफी गंभीर स्तिथि में है, ये बहुत ज़रूरी है की बच्चों को वैक्सीनेशन जल्दी मिले ताकि कोरोना का संक्रमण ज़्यादा से ज़्यादा न फ़ैल सके। बच्चों में इसके लक्षण जल्दी दिखतें नहीं है इसलिए उनके लिए खतरा ज़्यादा बढ़ जाता है।भारत में मल्टीसिस्टेम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम इन चिल्ड्रन के कम से कम 2000 केस दर्ज हुए हैं जिसका मुख्या कारण कोविड बताया जा रहा है। इसलिए जल्द से जल्द बच्चों में वैक्सीन लगना अनिवार्य है।

कहाँ हो रहे है ट्रायल ?

अमेरिका में मॉडेर्ना वैक्सीन की ट्रायल बच्चों पर शुरू हुई है। इस ट्रायल का नाम किडकोव रखा गया है। इसके अलावा पीफ़ाइज़र ने भी अपने वैक्सीन को ले कर बच्चों में स्टडी करना आरम्भ कर दिया है। वहीँ जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी ने भी ट्रायल की घोषणा की है। भारत में सीरम इंस्टिट्यूट साल के अंत तक बच्चों के लिए वैक्सीन लेन की तैयारी में है। वहीँ भारत बायोटेक ने भी ट्रायल शुरू कर दिया है।

कब तक होगी वैक्सीन उपलब्ध

विशेषज्ञों ने बच्चों में इम्युनिटी बढ़ने के लिए वैक्सीन को ज़रूरी माना है। इस वक़्त ये कहा जा सकता है कि अगर सभी कंपनी समय पे ट्रायल ख़त्म कर पायी तो विश्व भर में सितम्बर-अक्टूबर तक बच्चों के लिए वैक्सीन उपलब्ध हो सकती है।

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