हमारे भारत के संविधान में और भारतीय दंड संहिता (IPC ) में महिलाओं को काफ़ी हक़ दिए गए हैं। पर कई महिलाओं को इन कानूनों के बारे में जानकारी नहीं होती है और इसलिए महिलाओं को कई तरह की प्रतारणा और क्रूरता से गुज़रना पड़ता है। अगर महिलाएँ अपने कानूनी हक़ जान लें तो वे अपने आप को किसी भी प्रकार की क्रूरता से बचा सकती हैं।

आभा सिंह – प्रसिद्द डाइवोर्स वकील ने शी द पीपल टीवी को एक इंटरव्यू में बताये 4 क़ानून जिसके बारे में महिलाओं को जानकारी होना चाइये –

4 कानूनी धाराएँ शादी शुदा महिलाओं के लिए –

1 ) 498 -A IPC – शादी के बाद महिलाओं के कानूनी हक़

पति या पति के किसी भी रिश्तेदार द्वारा मानसिक या शारीरिक क्रूरता करने पर पत्नी FIR कर सकती है। इस धारा के अंतर्गत पति को 3 साल तक की सजा हो सकती है और बेल भी नहीं होती।

2 ) 354 – IPC –

अगर किसी महिला के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की जाती है तो यह भी दण्डनीये अपराध है। छेड़छाड़ के लिए फिजिकली छूना ज़रूरी नहीं है अगर कोई आपको गन्दा कमेंट पास करे तो भी आप थाने में कंप्लेंट लिखवा सकती हैं।

3 ) 354 -D IPC –

अगर कोई आपको आपकी इच्छा के बिना फॉलो करता है या किसी भी तरह से कांटेक्ट करने की कोशिश करता है तोह आप इसकी रिपोर्ट करवा सकती हैं इस धारा के अंदर।
आपके पास जीरो FIR का भी हक़ है इसका मतलब की घटना कहीं भी हुई हो आप किसी भी जगह या शहर में FIR लिखा सकती हैं जहाँ आपको ठीक लगता है।

4 ) 166 – A IPC –

अगर पुलिस आपकी FIR नहीं लिखती है तोह आप के पास यह हक़ है की आप पुलिस के ऊपर काउंटर FIR कर सकती हैं। इस धारा का आज तक किसी भी महिला ने उपयोग नहीं किया है।

“महिलाओं को अपने हक़ पता होने चाहिए और समय आने पर इनका उपयोग भी करना चाहिए” – आभा सिंह 

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