मीटू (MeToo) यानी ‘मैं भी’। भारत में 2018 से पहले अधिकतर लोगों को पता भी नहीं था कि MeToo movement क्या है। यह शब्द सुर्खियों में तब आया जब यौन उत्पीड़न की शिकार हुईं ढेर सारी भारतीय महिलाएं सोशल मीडिया पर हैशटैग #MeToo के ज़रिये अपनी कहानियां बयां कर रही हैं। आइये जानते है आखिर यह #MeToo है क्या?

#MeToo movement क्या है ?

मीटू मूवमेंट महिलाओं के साथ हो रहे शोषण ,यौन हिंसा और बलात्कार के खिलाफ चलाया गया एक आंदोलन है। इसमें महिलाएं #MeToo हैशटैग इस्तेमाल कर के अपनी बात बताती हैं। वह आपने साथ हुए यौन हिंसा के बारे में खुलकर बोलती है और बताती है कि कब किस इंसान ने उसके साथ ऐसा किया। #MeToo मूवमेंट के ज़रिये महिलाएं ताज़ा मामलों से लेकर दशकों पुराने मामलों पर खुल के बोलती हैं।

मीटू मूवमेंट की शुरूआत कैसे हुई ?

असल में #MeToo आंदोलन की शुरुआत तो 2006 में हुई थी, लेकिन यह लाइमलाइट में अक्टूबर 2017 में आया। इस मूवमेंट की शुरुवात अमेरिकी सिविल राइट्स एक्टिविस्ट तराना बर्क ने की थी। उन्होंने इस शब्द का इस्तेमाल रंगभेद की शिकार महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न की कहानी बयां करते हुए किया था। तराना बर्क खुद सेक्शुअल असॉल्ट सर्वाइवर हैं।

16 अक्टूबर 2017 को अमेरिकी एक्ट्रेस एलिसा मिलानो ने हुई यौन उत्पीड़न को बताते हुए एक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने #MeToo शब्द का इस्तेमाल किया। एलिसा के इस ट्वीट का असर बहुत बड़े पैमाने पर देखने को मिला और कुछ ही घंटो में #MeToo के साथ दो लाख से ज़्यादा ट्वीट किए गए और 17 अक्टूबर तक 5 लाख से ज़्यादा ट्वीट हो चुके थे।

हज़ारों लड़कियों ने इस हैशटैग का इस्तेमाल कर के अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न की कहानियां बताईं, जिनमें ग्वेनेथ पाल्ट्रो, ऐश्ली जूड, जेनिफर लॉरेंस और उमा थर्मन जैसी बड़ी एक्ट्रेस भी शामिल हैं।

भारत में इस मूवमेंट की सही मायनों में शुरुआत 25 सितंबर 2018 को हुई, जब बॉलीवुड एक्ट्रेस तनुश्री दत्ता ने एक्टर नाना पाटेकर के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। उसके बाद कई बड़ी हस्तियों ने आगे आकर #MeToo शब्द के ज़रिये अपनी कहानी बताई।

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