NEET Aspirant Committed Suicide: NEET की परीक्षा में फेल होने के डर से तमिलनाडु में छात्रा ने की आत्महत्या

NEET Aspirant Committed Suicide: NEET की परीक्षा में फेल होने के डर से तमिलनाडु में छात्रा ने की आत्महत्या NEET Aspirant Committed Suicide: NEET की परीक्षा में फेल होने के डर से तमिलनाडु में छात्रा ने की आत्महत्या

SheThePeople Team

14 Sep 2021


तमिलनाडु में नीट की परीक्षा में फेल होने के डर से आत्महत्या करने का और एक नया मामला सामने आया। यह घटना उसी दिन हुई जिस दिन नीट एग्जाम को तमिलनाडु में बंद करने का निर्णय लिया जाने वाला था। जब परीक्षार्थी को लगा कि वह मेडिकल के एंट्रेंस एग्जाम में अच्छे नंबर नहीं ला पाएगी और वह फेल हो जाएगी, इस डर से उसने आत्महत्या कर ली। 

परीक्षार्थी ने फांसी लगाकर की आत्महत्या (NEET Aspirant Committed Suicide)

तमिलनाडु मे और एक दिल दहलाने वाली घटना सामने आई। जब परीक्षार्थी को लगा कि वह मेडिकल के एंट्रेंस एग्जाम में अच्छे नंबर नहीं ला पाएगी और वह फेल हो जाएगी, इस डर से उसने आत्महत्या कर ली। तमिलनाडु में NEET की परीक्षा को लेकर बहुत चर्चा शुरू है। इस परीक्षा के विरोध में कई राजनीतिक पार्टियां बिल पास करने के लिए तैयार थी।

परीक्षार्थी का नाम कनिमोझी था। कनिमोझी ने रविवार को नीट की परीक्षा दी थी लेकिन उसे डर था कि वह परीक्षा में फेल हो जाएगी। इसी चिंता में होने के कारण वह उदास थी और ऐसे ही हालत में वह रात को अपने कमरे में चली गई। जब उसके घर वालों ने देखा कि वो सुबह कमरे से बाहर नहीं आई तो वह कमरे में गए। कमरे में जाते ही उन्होंने कनिमोझी को फांसी पर लटका हुआ देखा।

कनिमोझी के परिवार के हिसाब से वह एक बहुत होनहार छात्रा थी और वह हमेशा अपने पढ़ाई में रहती थी। लेकिन वह इस बार NEET की परीक्षा को लेकर बहुत चिंतित थी। इसी वजह से कनिमोझी को डिप्रेशन महसूस हुआ और उसने आत्महत्या की।

सोमवार को पारित हुआ विधेयक

सोमवार को तमिलनाडु के विधानसभा में राष्ट्रीय-प्रवेश-पात्रता परीक्षा (NEET) को खत्म करने के लिए और सामाजिक न्याय निश्चित करने के लिए 12वीं के अंकों के आधार पर मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए विधायक अपनाया है। इस उद्देश्य के लिए 2017 में विधेयक पारित किया गया था जब शासन में एआईएडीएमके की सरकार थी। लेकिन इस विधायक विधेयक को राष्ट्रपति की सहमति नहीं मिली थी।

जब इस बार मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने यह विधेयक पेश किया तो कांग्रेस और उसके अलावा विपक्षी एआईएडीएमके और पीएमके के साथ बाकी दल भी इस विधेयक के समर्थन में थे। इस विधेयक को सब का समर्थन होने की वजह से यह विधेयक पारित हुआ।


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