अपने बच्चों के चिड़चिड़ेपन की वजह कहीं आप खुद तो नहीं? जानिए पेरेंटिंग एक्सपर्ट की राय

Published by
Apurva Dubey

Parents-child Relationship: बात-बात पर अगर आपका बच्चा चिढ़ जाता है या हमेशा गुस्सा करता रहता है तो ये एक गंभीर समस्या हो सकती है। कई बार पेरेंट्स अपने बच्चे के बेहेवियर में हुए अजीब बदलाव को नज़र-अंदाज़ कर देते हैं लेकिन ऐसा करना बच्चों के मेन्टल हेल्थ के लिए बिलकुल भी अच्छा नहीं। क्या आपने बच्चा हमेशा जिद करता है? क्या आपका बच्चा हमेशा आपसे कटा-कटा और दूर रहता है? इन सभी सवालों का जवाब ढूंढने के लिए कई एक्सपर्ट्स ने अपनी राय बताई है, जिससे पेरेंट्स अपने बच्चों की साइकोलॉजी को समझ सकें और उनमें कुछ सुधार ला सकें।

Parents-child Relationship: कहीं आप अपने बच्चे ने चिड़चिड़ेपन के ज़िम्मेदार तो नहीं?

कोरोना काल में कई पैरेंट्स बच्चों के बाहर खेलने या जाने को लेकर हमेशा चिंता में रहे हैं। पर बच्चों के ऊपर लगातार हो रही पाबंदियों से आखिर वो भी घर में रहकर चिड़चिड़े या जिद्दी होने लग जाते हैं। जानकारों का मानना है कि पैरेंट्स का बात-बात में बच्चों को न कहना भी उनके जिद्दी बनने का कारण हो सकता है।

कई बार बच्चे अपने पेरेंट्स की जबरदस्ती की डांट-फटकार से भी गुस्सैल और चिड़चिड़े हो जाते हैं। हर बात में बच्चों को मना कर देना और हमेशा उनको अपने हिसाब से काम करवाना उन्हें कहीं न कहीं गुमसुम और चुप बना देता है।

कई रिपोर्ट्स में सामने आया है कि वो पेरेंट्स जो हमेशा अपने बच्चों को न कहते हैं और नकारात्मक वर्ड का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं, उनके बच्चे ज्यादा जिद्दी और गुस्से वाले हो जाते हैं। अगर आपका बच्चा टीनएजर है तो इस बात का खास ख्याल रखें। टीनएज में बच्चों में बेहवियरल चेंजेस आते हैं, अगर इस तरह कि नाजुक उम्र में माँ-बाप की ज्यादा सख्ती बच्चों को पेरेंट्स के खिलाफ कर सकती है।

Parents-child Relationship: क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

फेमस पेरेंटिंग एक्सपर्ट डॉ. गीतांजली शर्मा बताती हैं कि पैरेंट्स को बच्चों के सामने ‘न’ शब्द का इस्तेमाल कम से कम करना चाहिए। हर बात में मना करना और बच्चों के सामने नकारात्मक बातें करने से चाइल्ड साइकोलॉजी पर बुरा असर पड़ता है। कई बात इन सूरतों में बच्चे अपनी ही पेरेंट्स को अपना दुश्मन समझ बैठते हैं।

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि बच्चों को न कहने से बच्चों पर बुरा असर होता है लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि पेरेंट्स अपने बच्चों की हर बात को मानें। बल्कि अपनी बात को बच्चों को समझने के लिए अलग तरीके अपनाए जा सकते हैं। जैसे अगर आपका बच्चा पढ़ाई छोड़कर खेलने जा रहा हो तो उसे रोक कर मना न करें, बल्कि बच्चे को बोले की पहले वो पढ़ाई पूरी करे और फिर खेलने जाये।

इसके अलावा पैरेंट्स को आपस में संयम बना कर रखना चाहिए, क्योंकि घर के माहौल का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर होता है। इसीलिए घर में माता-पिता के बीच भी बहसबाजी जैसी चीजें नहीं होनी चाहिए।

 

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