पीरियड्स के दिनों होने वाली ब्लीडिंग हर महिला के लिए, एक बहुत आम बात है। मगर पीरियड्स में हमेशा अगर हेवी ब्लीडिंग हो, तो थोड़ा रुक कर सोचने की जरूरत है। जब पहली बार एक किशोरी को पीरियड्स आते है, तो वो भी हेवी होते है। मगर इसमे चिंता की बात नहीं रहती। पहली बार के पीरियड्स, सभी में हेवी होते है। और ये बेहद सामान्य है। इस स्तिथि में, चिंता की जरूरत तब पड़ती है जब हमेशा-ही पीरियड्स में हेवी ब्लीडिंग होती रहे। यदि आपके पीरियड्स हमेशा हेवी होते है, तो आपको जरूर खुद पर ध्यान देना चाहिए और किसी gynaecologist के संपर्क में आकर, उनके साथ अपनी परेशानी साझा करनी चाहिए। जानिए पीरियड्स के दौरान हेवी ब्लीडिंग क्यों होती है और कैसे उसे हम रोक सकते हैं.

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कौन-सी बीमारियों हो सकती है कारण ?

  • आयरन की कमी

शरीर में आयरन की कमी, एक मुख्य कारण होता है पीरियड्स में हेवी ब्लीडिंग का। आयरन की लंबे वक्त तक शरीर में कमी से एनीमिया तक हो जाता है।

  • ट्यूमर

गर्भाशय (uterus) में ट्यूमर का होना, हेवी ब्लीडिंग का कारण हो सकता है।

  • ल्यूपस

शरीर में ल्यूपस के होने से जलन व सूजन की शिकायत रहती है। यह हॉर्मोन्स में बदलाव की वजह से होती है और हेवी ब्लीडिंग के लिए भी ज़िम्मेदार मानी जाती है।

  • सर्वाइकल पॉलिप

सर्वाइकल पॉलिप के कारण पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं। और ज़्यादा ब्लीडिंग होने लगती है। इनकी वजह से सर्विक्स (cervix) और गर्भाशय (uterus) में मौजूद ब्लड वैसल्स (blood vessels) के काम में रुकावट पैदा हो जाती है।

  • डिप्रेशन

बेहद तनाव होने के कारण भी पीरियड्स में हेवी ब्लीडिंग होती है।

हेवी ब्लीडिंग से बचाव के तरीके

  • खाने में आयरन-युक्त चीज़े खाएँ। और हो सके तो खाना लोहे के बर्तनों में बनाएँ।
  • खट्टे फल और सब्जियां खाएँ। इनमे विटामिन-सी होता है, और यह विटामिन शरीर में आयरन को सोखने में मदद करता है।
  • पानी खूब पीयें।
  • पौष्टिक भोजन लें। तैलीय व डिब्बा-बंद चीजों से परहेज करें।
  • तनाव से दूर रहें। जिस काम को करने से खुशी मिलती हो, वो काम करें।

इन घरेलू बचाव के तरीकों को अपनाते हुए, अपनी डॉक्टर से जरूर संपर्क करें।

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