ओव्यूलेशन के समय के बीच में और पीरियड्स शुरू होने से कुछ दिन पहले, महिलाएं शारीरिक और भावनात्मक बदलावों से गुजरती हैं, जिन्हें प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम या PMS कहा जाता है। पीरियड्स शुरू होने के बाद ये लक्षण दूर हो जाते हैं।

कुछ महिलाओं को PMS के किसी भी लक्षण या केवल बहुत हल्के लक्षण ही महसूस होते हैं, दूसरों के लिए, लक्षण इतने गंभीर हो सकते हैं कि यह रोजमर्रा के कार्यों को करना भी मुश्किल बना देता है। गंभीर PMS के लक्षण ‘प्रीमेंस्ट्रुअल डिस्फोरिक डिसऑर्डर’ का संकेत हो सकते हैं। PMS तब चला जाता है जब आपके पीरियड्स बंद हो जाते हैं, जैसे कि मेनोपॉज के बाद।

PMS के सामान्य लक्षण क्या हैं?

इमोशनल सिम्पटम्स में जलन, चिंता, एकाग्रता भंग होना, disrupted स्लीपिंग पैटर्न या क्राइंग स्पेल्स शामिल हैं। जबकि शारीरिक लक्षण मुख्य रूप से सूजन, वजन बढ़ना, थकान के साथ-साथ भूख ज्यादा लगना और सिरदर्द में तब्दील हो जाते हैं। सबसे आम PMS लक्षणों में से एक टेंडर ब्रेस्ट्स है।

PMS का पता कैसे लगाया जा सकता है?

PMS का पता लगाने के लिए, एक गाइनेकोलॉजिस्ट को लक्षणों के एक पैटर्न की जांच करनी चाहिए, जो पीरियड्स से पहले 5 दिनों में होते हैं। ऐसा कम से कम 3 लगातार पीरियड साइकिल के लिए करना है और जो पीरियड्स शुरू होने के 4 दिनों के भीतर समाप्त होता है।

PMS का इलाज क्या है? प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम PMS

यदि लक्षण माइल्ड से मॉडरेट हैं, तो उन्हें जीवनशैली या आहार में बदलाव से राहत मिल सकती है। यदि लक्षण आपके जीवन में दखलअंदाजी करना शुरू कर दें, तो आपको मेडिकल ट्रीटमेंट की आवश्यकता हो सकती है।

एक्सरसाइज / व्यायाम

• नियमित एरोबिक व्यायाम लक्षणों को कम करने और थकान को दूर करने में मदद करता है।

• अपनी हार्ट रेट और फेफड़ों के कार्य को बढ़ाने के लिए आपको नियमित रूप से वॉकिंग, दौड़, साइकिल चलाना और तैरने का अभ्यास करना चाहिए।

• आपको केवल तब ही व्यायाम नहीं करना है जब आपको लक्षण दिखाई दें बल्कि नियमित रूप से व्यायाम करने की सलाह दी जाती है।

• सप्ताह में 5-6 दिन कम से कम 30 मिनट व्यायाम करने का लक्ष्य रखें। रिलैक्सेशन, थेरेपीज, योग, मेडिटेशन, मैसेज थेरेपी, सभी इसमें सहायक हैं।

• इतना ही नहीं, बल्कि आपको अपनी स्लीप साइकिल और अपने आहार पर भी खास ध्यान देना होगा तभी इन सिम्पटम्स को कम किया जा सकता है।

डाइट / आहार

• कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट से भरपूर आहार लें क्योंकि यह मूड के लक्षणों और भोजन की लालसा (फूड क्रेविंग्स) को कम करने में मदद करता है।

• साबुत अनाज से बने खाद्य पदार्थों में कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट पाए जाते हैं, जैसे कि पूरी-गेहूं की रोटी, पास्ता, और अनाज।

• दूसरे उदाहरण जौ ( barley), ब्राउन राइस, बीन्स और दाल हैं। साथ ही कैल्शियम से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे दही और हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें।

• फैट, नमक और चीनी का सेवन कम करें और कैफीन और शराब से भी बचें।

• इसके अलावा, तीन बार भोजन के बजाय एक दिन में छह बार थोड़ा-थोड़ा टुकड़ों में भोजन खाएं या अपने तीन बार वाले भोजन में थोड़ा कम खाएं और इसके साथ तीन हल्के नाश्ते जोड़ें।

** Disclaimer – यह सार्वजनिक रूप से एकत्रित की हुई जानकारी है। यदि आपको किसी विशिष्ट सलाह की आवश्यकता है, तो कृपया डॉक्टर से परामर्श करें।

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