लडकियां जैसे ही अपनी पढाई पूरी करती हैं या 20 की उम्र से ऊपर होती है रिश्तेदार उनके जीवन में नाक घुसाना शुरू कर देते हैं। इन रिश्तेदारों को अचानक से हमारी इतनी चिंता होने लग जाती है। अंटियाँ, पडोसी और रिश्तेदार बस एक ही सवाल पूछते रहते हैं शादी कब कर रही हो ? इनका सारा ध्यान हमें यही समझाने में लग जाता है कि घर बसाओ और किचन सम्हालो। इन रिश्तेदारों की सबसे बड़ी दिक्कत ये है की पूरी लाइफ तो ये हमें नज़र नहीं आएंगे और जैसे ही 20 पार करो तो बस फिर सर पर चढ़जाएंगे।

ये वही रिश्तेदार हैं जो हमें पेपर देने जाने से पहले बेस्ट ऑफ़ लक नहीं बोलते पर रिजल्ट आने पर सबसे पहले नंबर पूंछते हैं।

उसके बाद हमारे ही मम्मी – पापा के कान भरते हैं और दूसरों से हमारी तुलना करते हैं। ये रिश्तेदार हमसे कभी नहीं पूछते की तुम कैसे हो ? क्या तुम खुश हो ? करियर में क्या करना है ? या फिर जब भी आप इन रिश्तेदारों से कोई मदद मांगेंगे तो ये लाइन में सबसे पीछे मिलेंगे और शादी की बात आते ही सबसे आगे आजाएंगे। ये वही रिश्तेदार हैं जो हमें खुश और सुखी नहीं देख सकते और बार बार लड़ाइयां और कलेश करवाने आते हैं।

प्रिय रिश्तेदार मेरी शादी आपकी ज़िम्मेदारी नहीं है।

आपकी ज़िम्मेदारी थी मेरे मुश्किल वक़्त में हिम्मत बढ़ाने की, सही रास्ता दिखाने की और सही सलाह देने की। मुझे इन रिश्तेदारों से कोई घृणा नहीं है पर जब ये बुरे वक़्त में हमें कभी शकल नहीं दिखते हैं फिर ये अच्छे वक़्त में क्यों सबसे पहले आ जाते हैं। इसलिए इन रिश्तेदारों को अपने काम से काम रखना चाहिए और दूसरों की लाइफ में नाक नहीं घुसाना चाहिए। हमारे मम्मी – पापा है हमारे लिए अच्छा बुरा सोचने के लिए हमरी चिंता करने के लिए हमरी शादी करवाने के लिए। आप बस आईयेगा और खाना खाकर जाइएगा।

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