पीरियड्स को मासिक धर्म, माहवारी, मेंस्ट्रुएशन आदि भी कहते हैं। भारत एक उन्नत एवं प्रगतिशील देश है परंतु अभी भी लोगों के मन में पीरियड्स को लेकर सोशल स्टिग्मा, प्रेजुडिसेज और अंधविश्वास है। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह लोगों के बीच पीरियड्स को लेकर शिक्षा और जागरूकता का अभाव। इसलिए यह ज़रूरी है कि बच्चों को स्कूल में ही पीरियड एजुकेशन संबंधी जानकारी विस्तार से दी जाए ताकि वे अपने परिवारजन और अन्य लोगों को भी इसके बारे में बता सकें।

निम्न कारणों से स्कूल में पीरियड एजुकेशन ज़रूरी

1) विद्यालयों की संख्या

हमारे देश भारत में कई छोटी – छोटी स्कूलें हैं जो राज्य या केंद्र द्वारा चलाई जाती हैं। इन स्कूलों में करोड़ों बच्चे पढ़ते हैं। इसमें से तकरीबन 71% लड़कियां ऐसी हैं जिन्हें पीरियड्स के बारे में पता ही नहीं होता जब तक की वे उसे खुद एक्सपीरियंस नहीं कर लेती। ऐसे में उनका पीरियड्स के बारे में जानना आवश्यक है क्योंकि ये उनके जीवन का अभिन्न अंग है।

2) विषय पर बात करने में शर्म

इतने इंपोर्टेंट विषय पर बात करने में शर्म या ऑकवर्डनेस का होना एक दुःख देने वाली बात है। अगर हम स्कूल में ही पीरियड एजुकेशन संबंधी बात करें तो इसे कम किया जा सकता है। बच्चे इस विषय को अच्छे से समझ पाएंगे और वो इस बारे में एक – दूसरे से खुल कर बात कर पाएंगे। फिर उन्हें अनकंफर्टेबल महसूस नहीं होगा।

3) मेंस्ट्रुअल हाइजीन 

बहुत सी लड़कियां अंडर प्रिविलेज्ड होती हैं और पीरियड एजुकेशन को लेकर अनअवेयर भी होती हैं। इससे पीरियड उनकी लाइफ में एक बड़ी चुनौती या रुकावट बन सकता है क्योंकि उन्हें ये पता ही नहीं है कि पैड्स केसे इस्तेमाल करते हैं या उसे कितने समय पर बदल लेना चाहिए या पैड्स को डिस्पोज ऑफ़ कैसे करते हैं या बेसिक मेंस्ट्रुअल हाइजीन क्या होता है आदि। इन सब की जानकारी नहीं होने से उन्हें कई हेल्थ रिस्क्स जो हाइजीन संबंधी होते हैं, हो सकते हैं।

4) प्यूबर्टी से पहले जानना ज़रूरी

इंडिया में हर 5 में से 1 लड़की स्कूल जाना छोड़ देती है जब वह पहली बार पीरियड्स में होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उसे पता ही नहीं है कि उसके साथ क्या हो रहा है। हमें ज्यादा से ज्यादा लड़कों और लड़कियों को पीरियड्स के बारे में जानकारी देनी होगी जब वें प्यूबर्टी के स्टेज पर पहुंचे। इससे लड़कियों के लिए स्कूल में एक सुरक्षित एनवायरनमेंट बनेगा और साथ ही हम एक ऐसी पीढ़ी का निर्माण करेंगे जो पीरियड्स को ताकत समझते हों नाकी शर्म।

5) टीचर्स को इस विषय में शिक्षा

हम अक्सर देखते हैं कि स्कूल में टीचर्स ही पीरियड्स के बारे में बात करने से शरमाते हैं। यहां तक की बायोलॉजी के टीचर्स व महिला अध्यापिकाएं भी इस विषय में पूरी जानकारी नहीं देते। ऐसे में यह ज़रूरी है कि हम टीचर्स को भी पीरियड एजुकेशन दें। उन्हें यह भी सिखाएं की कैसे बच्चों को बिना शर्म के आसानी से पीरियड्स के बारे में बताएं।

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