जैसे बच्चों को हिस्ट्री पढ़ाना जरूरी है, सोलर सिस्टम के बारे में बताना जरूरी है ठीक वैसे-ही बच्चों को सेक्स के बारे में पढ़ाना और बताना भी जरूरी है। ज्यादातर स्कूलों में बच्चों को सेक्स एजुकेशन (sex education) से दूर रखा जाता है, और ना ही माँ-बाप बच्चों को इन सब चीजों के बारे में बताना चाहते, जो बेहद गलत है। बच्चों को हर विषय की तरह ही सेक्स के बारे में भी बताया जाना चाहिए, क्योंकि यह बेहद जरूरी है। क्यों जरूरी है, यह तो आप इस आर्टिकल को पूरा पढ़कर जान ही जाएंगे।

  • सेक्स एजुकेशन से बच्चों को अगर ऐसे-ही दूर रखा जाएगा तो बच्चे सेक्स से जुड़ी हर जानकारी के लिए , इंटरनेट के भरोसे हो जाएंगे और अपने हिसाब से सेक्स को समझने की कोशिश करेंगे। अब इंटरनेट से जानकारी लेने से गलत यह होगा कि बच्चा ‘सेक्स’ क्या होता है, यह तो समझ जाएगा लेकिन ‘कंसेंट’ क्या होता है, यह नहीं समझ पाएगा। और बिना ‘कंसेंट’ को समझे, ‘सेक्स’ को समझना, निराधार है और साथ ही, गलत है।
  • सेक्स एजुकेशन से अगर दूरी बनाई जाएगी, तो हर कोई इसके बारे में बात करने से बचना चाहेगा और शरमाएगा। और जब कभी बाद में किसी व्यक्ति को ‘सेक्स’ में किसी परेशानी का सामना करना पड़ा, तो वह व्यक्ति डॉक्टर तक से अपनी परेशानियाँ छुपाएगा और खुद ही घुट-घुटकर जूझता रहेगा।
  • सेक्स एजुकेशन मिलने से हमें अपने शरीर, सेक्शुअल पॉइंट्स (sexual points) , सेक्स के दौरान पसंद-नापसंद , इन सभी चीजों के बारे में पता चलता है। लेकिन अगर हम इन सभी चीजों से दूर रहेंगे तो हम अपना सेक्शुअल प्लेजर (sexual pleasure) कैसे तलाश पाएंगे ?
  • सेक्स एजुकेशन की कमी से हम अपने शरीर को कम समझ पाएंगे और साथ ही अपने पार्टनर के शरीर और फैंटसीज़ (fantasies) को भी नहीं समझ पाएंगे। और ऐसा होने से सेक्स की प्रोसेस दर्दनाक और स्ट्रेसफुल (stressful) हो जाती है।

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