जब शाहरुख़ खान से पूंछा गया कि वो अपने घर में जेंडर में बराबरी कैसे बनाकर रखते हैं ? कैसे वो सुनिश्चित करते हैं कि लड़के लड़की में समानता हो ? शाहरुख़ खान का मन्ना है कि जिस तरह लडकियां हमेशा घर में भी मर्यादा में रहती हैं उसी तरह लड़कों भी रहना चाहिए। घर में लड़कों को कभी बिना शर्ट के और कपड़ों के अपनी माँ और बहन के सामने नहीं घूमना चाहिए। इनकी इस बात ने हर जगह हैडलाइन बनादी। शाहरुख़ खान ने बेटे

शाहरुख़ खान का क्या मन्ना है ?

बटियों और बेटों को बराबरी पर लाना वास्तव में इतना आसान नहीं है, कुछ परिवार इसे अपनाते हैं और कुछ नहीं । ऐसा करने के लिए खेल के नियम बल्कि सीधे हैं, वास्तव में वह सब कुछ जो एक बेटे के लिए हाँ किया जा रहा है बेटी को भी करना चाहिए और वह सब कुछ जो एक बेटी को मना है, एक बेटे को भी करना चाहिए।

जब बच्चों को एक जैसा पालने की बात की जाते हैं तब अच्छे से अच्छे परिवार पीछे रह जाते हैं। हमारे देश में घरों में हमेशा से लड़के और लड़कियों के लिए अलग तरीके से रूल्स बनते आए हैं। जिस में लड़कियों को हमेशा मर्यादा के नाम पर दबाया गया है और लड़को को गलत होकर भी बढ़ाया गया है।

अगर आपको अपनी माँ और बहन को बिना कपड़ों के देख कर अजीब लगता है तो फिर आप उनके सामने भी बिना शर्ट के ना घूमें। ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहिए जो एक लड़की नहीं कर सकती है – शाहरुख़ खान

बराबरी के लिए ज़रूरी नहीं है कि बड़े बड़े मील के पत्थर तोड़ने पड़ें। ये लड़कों का घर में बिना शर्ट के घूमने से भी शुरू किया जा सकता है। शाहरुख़ खान का मन्ना है कि जिस तरह लडकियां हमेशा घर में भी मर्यादा में रहती हैं उसी तरह लड़कों भी रहना चाहिए।

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