मां- बाप बनना कितनी जिम्मेदारी का काम है, यह बात सिर्फ पेरेंट्स ही समझ सकते हैं। अपने बच्चे को अच्छी परवरिश देना, उन्हें भविष्य में सफल जिंदगी के लिए तैयार करना और अच्छे संस्कार देना, ये सारी जिम्मेदारियां मां- बाप, दोनों के कंधों पर होती हैं। उन्हें अपनी जिंदगी के साथ- साथ अपने बच्चों को भी जीना सिखाना होता है। लेकिन क्या हो जब ये ज़िम्मेदारियां किसी एक के कंधे पर आ जाएं? आज के मॉडर्न ज़माने में आपको कई सिंगल पेरेंट्स मिल जाएंगे लेकिन यह वर्ड जितना कूल लगता है, उससे कहीं ज्यादा मुश्किल इसके साथ जुड़ी ज़िम्मेदारियां हैं। जब ये सिंगल पेरेंट सिर्फ एक मां हो तो उसे कई बातों को ध्यान में रखने की जरूरत होती है | सिंगल मदर पेरेंटिंग टिप्स

एक समय था कि परिवारों में कुछ दर्जन लोग हुआ करते थे। लेकिन आज विश्व के कई हिस्सों में दो लोगों का साथ रहना भी मुश्किल हो रहा है। ऐसे में अगर एक अकेली माँ को बच्चे की परवरिश करनी पड़े तो उसे क्या करना चाहिए? इस आर्टिकल में हम सिंगल मॉम्स के लिए पेरेंटिंग टिप्स बता रहे हैं।

सिंगल मदर पेरेंटिंग टिप्स –

बच्चे को पूरा वक्त दें

सिंगल मदर एक बात को अपने दिमाग में रट लें कि चाहे कुछ भी हो जाए, आपका ऑफिस में दिन अच्छा न गुज़रा हो या फिर आपको तमाम काम याद आ गए हों, पूरे दिन में थोड़ा समय ऐसा निकालें जो आपका और आपके बच्चे का हो, इस समय में कोई तीसरा नहीं आना चाहिए। इससे आपके और बच्चे के बीच की बॉन्डिंग बेहतर होती जाएगी।

बच्चे के माता- पिता, दोनों बनें

बच्चे को माता- पिता, दोनों का प्यार चाहिए होता है लेकिन सिंगल मदर होने के चलते आपको ही अपने बच्चे का पिता और मां, दोनों बनना है। यह आपको तब समझ आएगा, जब आप दूसरों के बच्चों को देखेंगे कि उनकी परवरिश कैसी हो रही है। बच्चे को पापा की कमी खलने लगे, उससे पहले ही सतर्क हो जाएं।

न कहना सीखें

सिंगल मदर के साथ सबसे बड़ी दिक्कत यही होती है कि वे अपने बच्चे को किसी भी काम के लिए न नहीं कह पातीं। इसका साइड इफेक्ट यह होता है कि आपका बच्चा जिद करने लगेगा और आपको न चाहते हुए भी उसकी जिद पूरी करनी पड़ेगी।

बच्चे के लिए हर वक्त मौजूद रहें

आप ऑफिस में हों या जरूरी काम में बिज़ी हों, बच्चा जब भी आपको मदद के लिए बुलाए, उस वक्त आप उसके पास मौजूद रहें। इससे फायदा यह होगा कि आप दोनों के बीच का प्यार और भी गहरा होता जाएगा।

गुस्से पर कंट्रोल

गुस्सा सबको आता है लेकिन समझदार वही है, जो उसे काम बिगड़ने से पहले शांत कर ले। अपने बच्चे पर दूसरों का गुस्सा कभी न निकालें और अगर बच्चे पर ही गुस्सा है तो उससे बात करें, न कि उसे डांटें या फटकारें।

इमोशनल कनेक्ट बनाए रखें

बच्चे की मां और पिता, दोनों आप हैं। इसलिए अपने बच्चे से वह इमोशनल कनेक्ट खोने न दें, बल्कि उनके दिल को समझें और उन्हें अपने दिल का हाल बताएं।

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