सुनेत्रा चौधरी करेंटली हिंदुस्तान टाइम्स की एंकर और जर्नलिस्ट हैं। उन्होंने अपना करियर द इंडियन एक्सप्रेस के साथ शुरू किया था। फिर उन्होंने कई सालों तक एनडीटीवी के साथ काम भी किया।आभा सिंह जी एक फॉर्मर सिविल सर्वेंट रह चुकी हैं। वे अभी बॉम्बे हाईकोर्ट में बतौर एक लॉयर हैं। उन्होंने विमेंस राइट्स, जेंडर इक्वालिटी और जस्टिस जैसे फील्ड्स में अपना योगदान दिया है।सुनेत्रा चौधरी – आभा सिंह

शीदपीपल के साथ एक एक्सक्लूसिव बातचीत के दौरान आभा सिंह जी और सुनेत्रा चौधरी ने ये बातें कहीं

प्रश्न 1) आभा जी आपको डेली लाइफ में किस तरह के केसेज हैंडल करने पड़ते है और उनके पीछे के कारण?

आभा सिंह जी बताती हैं कि उन्हें अधिकतर डाइवोर्स और सेपरेशन के केसेज हैंडल करने पड़ते हैं। उनके पीछे का सबसे बड़ा कारण है मेट्रिमोनियल एड्स जोकि न्यूजपेपर या सोशल मीडिया पर देखने को मिलते हैं। सभी को एक टॉल, सुंदर, पतली लड़की चहिए। वे कहती हैं कि सब ब्यूटी के पीछे ही क्यूं भागते हैं? एक लड़की कई मायनों में सुंदर हो सकती है। इस आइडिया ऑफ़ ब्यूटी और सोशल प्रेशर के कारण कई शादियां टूट गई हैं और लड़कियां डिप्रेशन में जा रही हैं। 

आभा जी का मानना है कि एक इनिशिएटिव की शुरूआत होनी चाहिए जिसमें लड़कियों को ये बताया जाए कि वे अपने आप में यूनिक, ब्यूटीफुल हैं। उन्हें सोसाइटी या पैट्रिआर्की के कन्वेंशनल ब्यूटी स्टैंडर्ड्स फॉलो करने की कोई ज़रूरत नहीं है। 

वूमेन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट मिनिस्ट्री और साथ ही साथ सरकार को भी इस पर सख्त कानून बनाने की आवश्यकता है। ऐसी एड्स देने वाली मैट्रिमोनियल साइट्स पर भी रेगुलरली चेक रखना चाहिए।सुनेत्रा चौधरी – आभा सिंह

प्रश्न 2) सुनेत्रा आपको एक जर्नलिस्ट बनने में फैमिली और आउटसाइड दोनों से किस तरह के स्टीरियोटाइप्स का सामना करना पड़ा था?सुनेत्रा चौधरी – आभा सिंह

सुनेत्रा चौधरी कहती हैं कि उन्हें एक टिपिकल एंकर कैसे दिखने चाहिए उसका सामना करना पड़ा था। उन्हें कहा जाता था कि तुम्हारे बाल मैसी हैं, बाकी जर्नलिस्ट्स की तरह स्ट्रेट नहीं हैं। उन्हें कई बार डार्क स्कीन होने की वजह से भी कुछ सुनना पड़ता था। वे कहती हैं कि अब वे जब अपनी खुद की स्किन में कंफर्टेबल हैं तो उन्हें दूसरे क्या कहते हैं उससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता।

प्रश्न 3) सुनेत्रा आपने कैसे सोसाइटी के फेयर स्किन के नोशन से अपनी लाइफ में डील करी?

वे बताती हैं कि उनका निकनेम पिंकी रखा गया था बचपन में क्योंकि वे उनके परिवार के अन्य सदस्यों से थोड़ी फेयर स्किन थी। वे कहती हैं कि उनके फादर फेयर स्कीन के थे और उनकी मां के स्कीन का कलर थोड़ा डार्क था और सुनेत्रा का कलर समवॉट इन बिटवीन। तो उनके फैमिली मेंबर्स ने उनका नाम पिंकी इसलिए रखा क्योंकि कहीं ना कहीं वे एक गोरे बच्चे का जन्म चाहते थे। उन्हें कई बार बच्चे स्कूल में काली या ऐसा ही कुछ भी बुलाया करते थे पर सुनेत्रा को इन बातों से कभी ज्यादा फ़र्क नहीं पड़ा।

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