"मैं एक मज़दूर पिता, सपने में भी नहीं सोचा था मेरी बेटी विदेश जाएगी" आदिवासी छात्रों को मिली झारखंड स्कॉलरशिप

"मैं एक मज़दूर पिता, सपने में भी नहीं सोचा था मेरी बेटी विदेश जाएगी" आदिवासी छात्रों को मिली झारखंड स्कॉलरशिप "मैं एक मज़दूर पिता, सपने में भी नहीं सोचा था मेरी बेटी विदेश जाएगी" आदिवासी छात्रों को मिली झारखंड स्कॉलरशिप

SheThePeople Team

24 Sep 2021


आदिवासी छात्रों को मिली झारखंड स्कॉलरशिप: झारखंड में 21 से 31 साल के बीच होने वाले छात्रों को मिली मरंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा स्कॉलरशिप। ये एक सरकारी स्कीम है जिसमें आदिवासी बच्चों को विदेश में पढ़ने के लिए स्कॉलरशिप दी जाती है। स्कॉलरशिप से छात्र इंग्लैंड और आयरलैंड में पढ़ाई करने जा सकते हैं।

छात्रों की मेहनत बनी विदेश में पढ़ने का कारण

एक 30 वर्षीय छात्र दिनेश भगत 7 साल से अपने पिता की दुकान में काम कर रहे थे उन्होंने स्कॉलरशिप के लिए अप्लाई किया था। दूसरे हैं हरक्यूल सिंह मुंडा जोकि फॉरेस्ट अधिकारी के असिस्टेंट के बेटे हैं ।वह अपने पिता की कहानियां सुनते आए हैं कि कैसे उनके पिता ने पढ़ाई के लिए अपनी बकरियां बेच दी थी। अपने पिता से प्रेरणा लेते हुए हरक्यूलिस ने बीटेक की डिग्री पूरी की और आईआईटी हैदराबाद में संशोधक के तौर पर नौकरी पाई।

तीसरी है अंजना प्रतिमा डुंगडुंग जो 21 वर्षीय छात्रा है, जिन्होंने पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन पूरा किया है। अंजना के पिता ब्लॉक वेलफेयर ऑफिसर है जो कि पहले कंस्ट्रक्शन लेबर के तौर पर काम करते थे। अंजना ने बताया कि उनके पिता उनके लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है।

आदिवासी छात्रों को मिली झारखंड स्कॉलरशिप

इन सब छात्रों में समानता यह है कि इन सभी ने स्कॉलरशिप को पाने के लिए कठोर परिश्रम किए हैं और इनकी कड़ी मेहनत ने उनको विदेश में पढ़ने का मौका दिया है। इन 6 छात्रों को विदेश में पढ़ने के लिए मरंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा स्कॉलरशिप मिलने वाली है।

स्कॉलरशिप की शुरुआत पिछले साल 29 दिसंबर को हुई थी। स्कॉलरशिप के तहत स्कॉलरशिप मिलने वाले छात्रों को उनकी पढ़ाई के लिए आर्थिक तौर पर पूरी मदद की जाएगी। स्कॉलरशिप के मदद से पिछले साल 10 छात्र 2 साल की मास्टर्स डिग्री विदेश में पूरी करने के लिए स्कॉलरशिप मिली थी।

स्कॉलरशिप के हिसाब से हर छात्र को 30 लाख की स्कॉलरशिप दी जाएगी और इसके साथ बाकी खर्चों के लिए 10 लाख रुपए दिए जाएंगे। झारखंड सरकार के हिसाब से स्कॉलरशिप के लिए उनका बजट 10 करोड का है जिसकी वजह से वह 10 छात्रों को विदेश में पढ़ाई के लिए भेज सकते हैं। इसके बारे में ट्राईबल वेलफेयर कमिश्नर नमन प्रिय स्कॉलरशिप ने पूरी जानकारी दी।

फीचर इमेज क्रेडिट: द इंडियन एक्सप्रेस


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