Viral Transmission At Home: घरों में 6 फ़ीट की दूरी के बावजूद हो सकता है कोरोना

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Swati Bundela
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Viral Transmission At Home: हाल ही में हुई एक स्टडी के अनुसार कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए घरों में 6 फीट की दूरी होना पर्याप्त नहीं है। स्टडी में सामने आया है कि कई केसेस में 6 फीट की दूरी होने के बावजूद एयरबोर्न इंफेक्शन कंट्रोल करना मुश्किल हो गया है। पहले कोरोना से बचने के लिए सबको 6 फीट की दूरी बना कर रखने की हिदायत दी जाती थी, लेकिन अब इतनी शारीरिक दूरी भी इंडोर्स में वायरस फैलाने वाले एयरबोर्न एरोसोल को रोकने में सक्षम नहीं है।

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Viral Transmission At Home: क्या कहना है स्टडी का



  • सस्टेनेबल सिटीज एंड सोसाइटी नामक पत्रिका में कुछ परिणाम प्रकाशित हुए, जो बताते हैं कि केवल शारीरिक दूरी बना लेने से इंसान द्वारा निकाले गए एयरोसोल को संपर्क में आने से नहीं रोका जा सकता, बल्कि शारीरिक दूरी के साथ-साथ मास्किंग और प्रॉपर वेंटिलेशन हो तो समस्या का हल हो सकता है।

  • तीन प्रकार से शोध किये गए, पहला, हवादार जगह में हवा की मात्रा, दूसरा, वेंटिलेशन पैटर्न पर बने एरिया और तीसरा, बात करने के दौरान सांस लेते वक़्त एयरोसोल एमिजन मोड।

  • अमेरिका में पेनसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के अध्ययन से पता चलता है कि एक संक्रमित इंसान के बात करने से वायरस से लदे पार्टिकल्स, एक मिनट के अंदर ही दूसरे इंसान के रेस्पिरेटरी एरिया में पहुंच जाता है। अगर दोनों 6 फीट की दूरी पर बिना मास्क लगाए हैं तो संक्रमण के चांस 80 फीसदी तक बढ़ जाते हैं।

  • स्टडी में ये बात सामने आयी कि घरों में पाए जाने वेंटिलेशन सिस्टम में वायरस एयरोसोल किसी भी इंसान के रेस्पिरेटरी एरिया तक कम से कम 7 गुना तेज़ी से एंटर करता है।

  • बहरहाल ये काफी चौंकाने वाली बात है, लेकिन किसी बाहरी एरिया या ऑफिस की तुलना में बिना मास्क के घर में कोरोना का संक्रमण होने की संभावना ज्यादा बनी है।

  • इसका मतलब ये है कि घरों में हों या बाहर, अब वायरस ट्रांसमिशन से बचने के लिए महज़ 6 फीट की दूरी पर्याप्त नहीं है।

  • शोधकर्ताओं का कहना है कि- "एयरबोर्न इंफेक्शन कंट्रोल करने के लिए शारीरिक दूरी, वेंटिलेशन और मास्क पहनने पर एक साथ विचार किया जाना चाहिए."  



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