What is hypothyroidism in Hindi : आजकल की इस भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में हम लोग अपनी हेल्थ पर बिल्कुल ध्यान नहीं देते ,न खाने पर सोने पर ,न एक्सरसाइज पर , सब चीज़ में लापरवाही। आपकी ये लापरवाही कई तरह की बिमारियों को जन्म देती हैं। हाइपोथॉयराडिज्म एक ऐसी समस्या है जिसके बारे में आपको पता भी नहीं लगता। इस कारण लोगों को थकान, कमजोरी, वजन का बढ़ना, चिड़चिड़ापन और अवसाद जैसी समस्यायें हो सकती हैं।

हाइपोथायरायडिज्म क्या है (What is hypothyroidism in Hindi)?

थायरॉयड एक ग्रंथि होती है जो हार्मोन बनाते हैं और आपके शरीर को ठीक ढंग से कार्य करने में मदद करते हैं। हाइपरथायरायडिज्म एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर में थायराइड हार्मोन ढंग से काम नहीं करता है। इसके बाद यह शरीर की एक्टिविटीज को धीमा कर देता है। नतीजतन, एक व्यक्ति सुस्त महसूस करता है क्योंकि शरीर के भीतर कम ऊर्जा उत्पन्न हो रही है। हाइपरथायरायडिज्म की समस्या अधिकतर महिलाओं को ही होती हैं।

बहुत से लोग हाइपरथायरायडिज्म से हल्के रूप से पीड़ित होते हैं, जिसे सबक्लिनिकल हाइपोथायरायडिज्म (subclinical hypothyroidism) कहा जाता है। 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोग हाइपोथायरायडिज्म से पीड़ित होते हैं।

हाइपरथायरायडिज्म के कारण :

– महिलाओं में थायराइड होने की शिकायत ज़्यादा होती है, और हाइपोथायराइड 30 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को ही शिकार बनाता है।
– खानपान में लापरवाही।
– अस्थ-व्यस्थ जीवनशैली।
– खाने में आयोडिन की कमी के कारण हाइपोथायराइड होने का खतरा रहता है।
– जंक फूड का बढ़ता क्रेज़ भी आपको थायराइड से पीड़ित कर सकता है।
– शरीर का बढ़ता वज़न भी इस बिमारी का कारण बन सकता है।

हाइपोथायराइड के लक्षण :

– थकावट और वजन बढ़ना
– चेहरे पर सूजन
– इर्रेगुलर पीरियड
– मांसपेशियों में कमजोरी
– बाल झड़ना

हाइपोथायराइड का इलाज :

  • दवाएं – दवाएँ और सप्लीमेंट लेना एक आजीवन उपचार बना हुआ है जो केवल कुछ हद तक स्थिति को नियंत्रित कर सकता है। आमतौर पर, थायरॉइड हार्मोन के सिंथेटिक एनालॉग्स जैसे लिओथायरोनिन और लेवोथायरोक्सिन का उपयोग किया जाता है।
  • डाइट – ब्राजील नट्स, सूरजमुखी के बीज जैसे मैग्नीशियम, सेलेनियम से भरपूर खाना खाये। इसके अलावा, आयरन और कैल्शियम के सप्लीमेंट का भी इस्तेमाल कर सकते है। हालांकि, विशेष रूप से कच्चे रूप में ब्रोकोली, सोया-आधारित खाद्य पदार्थ, गोभी, आदि जैसे खाद्य पदार्थों से बचा जाना चाहिए। प्रोसेस्ड फूड और शुगर से भरपूर खाद्य पदार्थों को भी कम करना चाहिए। इसके अलावा आयोडीन में खाद्य पदार्थ जैसे आयोडीन युक्त नमक, अंडे, डेयरी और मछली का भी सेवन करना चाहिए।
  • एक्सरसाइज करे – low-impact और high-impact वाले एक्सरसाइज करे। इजी वर्कआउट जैसे योग, स्विमिंग और साइकिल चलाना वास्तव में मदद कर सकता है।
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