आज इकीसवीं सदी के तीसरे दशक में होने के बावजूद इस सोसाइटी की करियर वीमेन के प्रति सोच में ज़्यादा बदलाव नहीं आया है। आज भी हम अपने आस पास ऐसे कई लोग पाएंगे जो महिलाओं को उनके करियर के नाम पर जज करते हैं। कई लोगों को आज भी ये लगता है की महिलाओं का घर से बाहर निकल कर अपनी ज़िन्दगी में कुछ करने का ख्याल रखना गलत है। इस समय में भी सोसाइटी की इस पुरानी नकारात्मक सोच की ये 5 वजह हो सकती है:

1. करियर वीमेन अपने राइट्स जानती है

करियर वीमेन का मतलब है एक पढ़ी-लिखी महिला। एक लड़की जब खुद शिक्षित होती है तो उससे अपने राइट्स और हक़ पता होते हैं। ऐसी लड़कियों के साथ ये सोसाइटी अपनी मनमानी नहीं कर सकता क्योंकि वो अपने हक़ के लिए आवाज़ उठाना भी जानती है। इसलिए ये सोसाइटी के रिवर्स मैकेनिज्म का एक हिस्सा है की वो जिस को अपने हिसाब से नहीं कर पाता है उसके प्रति वो नकारात्मक सोच बना लेता है।

2. एगोइस्टिक मेन के लिए करियर वीमेन को बर्दाश्त करना मुश्किल है

हमारे सोसाइटी में मेल ईगो की प्रॉब्लम बहुत बड़ी है। अपना वर्चस्व मेन्टेन रखने के लिए सभी मर्द इस मेल ईगो का सहारा लेते हैं। ऐसे में अगर इनको इनके करियर लाइफ में किसी अम्बिशयस वीमेन का सामना करना पर जाए तो ये उससे अपनी तौहीन समझते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि इन लड़कों को बचपन से उनके घर में ये सिखाया गया है की वो लड़कियों से सुपीरियर है। इसलिए इस मेल डोमिनेटिंग सोसाइटी में करियर वीमेन को नकारात्मक नज़र से देखा जाता है।

3. सोसाइटी एक डिसिशन मेकिंग वीमेन के लिए कभी तैयार नहीं है

इस सोसाइटी में हमेशा से सारे एहम फैसले हेड ऑफ़ द फैमिली को लेते देखा गया है। समानता का हमारे समाज में इतना आभाव रहा है की एक लड़की तभी हेड ऑफ़ द फैमिली का दर्जा मिलता है जब उसके घर में कोई मर्द नहीं हो या फिर वो अकेली हो। ऐसे सोच के बीच एक करियर वीमेन जो अपने फैसले खुद लेती है और उन्हें लेने में सक्षम है इस सोसाइटी से बर्दाश्त ही नहीं हो सकती।

4. अनपेड हाउसवर्क के लिए अब नहीं है कोई तैयार

चाहे हम कितना भी इस बात को कितना भी पेट्रोनॉइज़ कर ले, सच तो यहीं है की सदियों से दुनिया भर में औरतों ने इस पुरुष प्रधान समाज में उनका घर चलाया है और इस के बदले में ना ही उनके पास कोई फाइनेंसियल सिक्योरिटी है और ना ही कोई इमोशनल सपोर्ट। इससे अनपेड हाउसवर्क कहते है। वर्षों से इस अनपेड हाउसवर्क का करियर वीमेन ने हमेशा खंडन किया है इसलिए वो सोसाइटी को चुभती है।

5. सोसाइटी की मानसिकता में ही दोष है

सोसाइटी इस बात को समझने में ही असमर्थ है की एक औरत की ज़िन्दगी में उसके पति और बच्चों के अलावा भी कुछ प्रिऑरिटीज़ हो सकती है। अगर कोई औरत देर रात तक हघर से बाहर रह कर काम करे तो वो इस समाज के नज़र में गलत है वहीँ अगर कोई औरत देर रात तक पूरे घर के सो जाने के बाद भी घर का सारा काम निपटाते रहे तो वो इस सोसाइटी के नज़र में एक आदर्श औरत है। सोसाइटी की मानसिकता का बदलना बहुत ज़रूरी है वरना करियर वीमेन के प्रति उसकी सोच हमेशा ही नकारात्मक ही रहेगी।

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