भारतीय घरों और परिवारों में जिस टॉपिक पर सबसे ज्यादा बात करने से बचा जाता है वो है सेक्स और सेक्सुएलिटी। लेकिन, बाहर के माहौल को देख के लगता है कि इसी टॉपिक पर सबसे ज्यादा बात करने की जरूरत है। हमारे पेरेंट्स और बड़े लोग बच्चों को मनगढ़त कहानियां सुनाएंगे रिप्रोडक्शन के बारे में लेकिन एक्चुअल प्रोसेस कभी नही बताना चाहेंगें। यही सब आदतें बच्चों के मन में सेक्स को लेकर गलत ख्यालात या गंदे विचार धाराएं पैदा करती हैं। मतलब, सेक्स के बारें में बात करने पर वो लोग इतना हिचकिचाते हैं कि एक बार को बंदूक के प्वाइंट पर मान लेगें की हां सेक्स होता है लेकिन वही सेक्स अच्छा है जो शादीशुदा कपल्स के बीच होता है। इससे एक तरह से ये भी सवाल उठता है कि क्या इंडिया में शादी सेक्स करने का लाइसेंस है?

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जहां शादी से पहले सेक्स एक पाप जैसा है इसका ये मतलब नही की लोग यहां सेक्स ही नही करते। करते हैं, सब करते हैं लेकिन बात करने से सब बचते हैं। यहां तक की लड़के-लड़कियों के डेट करने की बात लोगों की आंखें बड़ी कर देती है तो वैसे समाज़ से हम सेक्स पर खुलकर बात करने की उम्मीद कैसे ही कर सकते हैं। चलो एक बार को लड़के शादी से पहले सेक्स कर ले तो कोई बड़ी बात नही होती क्योंकि उनके पास लड़का होने का बेनेफिट है लेकिन लड़की कर ले तो ..हाय, तौबा-तौबा मच जाता है क्योंकि लड़कियों ने ही तो घर, परिवार और खानदान की इज्जत का चोला ओढ़ रखा है।

समाज के अनुसार अच्छी लड़कियों के गुण

यही संमाज लड़कियों को अच्छी लड़की का टेग देने के लिए उनसे उम्मीद करते हैं कि वो किसी लड़के से बात ना करें, साथ ना घूमें, शादी से पहले किसी के साथ सेक्शुअल रिलेशनशिप ना हो, वहीं शादी करे जहां उसका घरवाले करवाएं। इसका मतलब कि जो लड़की अपने घर का इज्जत बदनाम नही करना चाहती उसके शादी होने तक ना सेक्स के बारें में सोचना चाहिए, ना बात करनी चाहिए और सेक्स करने का तो कोई सवाल ही नही उठता। शादी से पहले सेक्स ना करने की चाह कुछ लड़को में भी होती है। वो भी चाहते हैं कि वो शादी के बाद पहली बार सेक्स करें। अक्सर ये बातें लोगों के मन में सेक्स के लिए बहुत ज्यादा एक्साइटमेंट क्रिएट कर देती है और अंत में वो शादी सिर्फ इसलिए कर रहे होते हैं क्योंकि उन्हें सेक्स करना होता है।

क्या सेक्स सिर्फ एक ड्यूटी है ?

काफी घरों में सेक्स को औरत की एक ड्यूटी की तरह देखा जाता है। जब उसका पति कहे तब उसे सेक्स करना होता है। लेकिन क्या औरतों की सहमति ली जाती है कि वो सेक्स करना चाहती है या नही या फिर वो अपने पार्टनर के साथ खुश है या नही? भारत में शादी सेक्स का लाईसेंस तो है लेकिन वो औरतों को प्लेज़र और सटिस्फैक्शन की गारंटी नही देता।

तो मतलब देखा जाए तो सेक्स एक तरह से अविवाहित लड़कों और लड़कियों के लिए एक लड्डू की तरह है जिसे वो शादी के बाद ही खा सकते है। शादी से पहले उस लड्डू को देखना भी पाप है। लेकिन, क्या आपको नही लगता कि हमारी सेक्शुअलिटी जो काफी नेचुरल है उसे अपने ही लोगों से छिपा के रखना, दबा के रखना गलत है?

किसी और से पहले ज़रूरत है कि लड़कियां खुद अपने दिमाग से सेक्स को लेकर चल रहें नेगेटिव विचारों के निकाल दें। अपनी सेक्शुअल डिज़ायर्स और सेक्स के प्रति अपनी सोच को अपने घर के लोग और दोस्तों से बात करें। इससे सेक्स के अराउंड स्टिग्मा भी खत्म होंगे और लोगों को सच का पता भी चलेगा कि आखिर सेक्स असल में है क्या ताकि उनकी एक्सपेक्टेशन अपने पार्टनर से सेक्स को लेकर हद से ज्यादा ना बढ़े।

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