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"सुहागन के सर का ताज होता है एक चुटकी सिन्दूर" सिन्दूर लगाना choice है या mandatory ?



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सिन्दूर लगाना choice है या mandatory ? -हाल ही में सिंगर राहुल वैद्य और दिशा परमार के लाइव सेशन में एक फैन ने कमेंट किया की दिशा ने सिन्दूर क्यों नहीं लगाया है। बता दे की 16 जुलाई को ये जोड़ा शादी के बंधन में बांध गया। हमारे देश में खास कर हिन्दू रीती रिवाज़ के अनुसार किसी भी शादीशुदा महिला के लिए सिन्दूर लगाना उसके सुहागन यानि की मैरिड होने की निशानी है।ऐसा नहीं है की सिन्दूर केवल एक रस्म का हिस्सा होता है बल्कि शादी के बाद आमतौर पर हर महिला रोज़ाना सिन्दूर लगाती है। पर यह अहम् बात ये है की क्या सिन्दूर लगाना जरुरी है या नहीं।इस बात को समझने से पहले ये जानना होगा की सिन्दूर के मायने क्या हैं- 

भारतीय परंपरा में सिन्दूर की है खास अहमियत

आपने सोलह शृंगार के बारे में तो जरूर सुना होगा। इन सोलह श्रृंगार में सबसे अहम् है सिन्दूर। किसी भी शादीशुदा महिला के लिए मांग में सिंदूर भरना न सिर्फ उसके सुंदरता को बढ़ता है बल्कि हिन्दू परम्परा और रिवाज़ के अनुसार ये उसके सुहाग यानि उसके पति की रक्षा भी करता है।लेकिन आजकल बहुत सारे कपल्स में देखा गया है की महिलाये सिंदूर नहीं लगाती और उनके पति को भी इस बात से कोई खास प्रॉब्लम नहीं होती है।सिन्दूर लगाना choice है या mandatory ?- ऐसा नहीं है की इससे सिन्दूर की पारम्परिक अहमियत घट गयी पर ये पूरी तरह से महिलाओं का अपना डिसीशन होना चाहिए की शादी के बाद वो अपने पहनावे और अपनी वेशभूषा में कोई परिवर्तन लाना चाहती हैं या नहीं। 

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सिन्दूर के हैं साइंटिफिक फायदे

सिन्दूर केवल सुंदरता ही नहीं बढ़ता बल्कि साइंटिफिक रूप से भी इसके कई फायदे सामने आये हैं। सिन्दूर लगाने के इस रिवाज़ के पीछे कई सइंटफिक तथ्य छुपे हैं जो कहीं न कहीं महिलाओं के सेहत से भी जुड़ें हैं -
असल में महिलाओं के माथे के बीच के हिस्से में एक तरह की ग्रंथि पायी जाती है जो काफी सेंसिटिव होती है ये माथे के सामने से शुरू होकर सर के मिडिल तक जाती है। ये बता दें की सिन्दूर में मरकरी यानि का पारा होता है जिसको माथे की उस ग्रंथि पर लगाने से आराम पहुँचता है और ये  महिलाओं में तनाव की सिचुएशन को संभालता है। इसके साथ ही महिलाओं में अनिद्रा की समस्या और ब्लड प्रेशर की समस्या में सिन्दूर बहुत अच्छा मन जाता है। 

 सिन्दूर लगाना choice है या mandatory ?  

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वैसे तो किसी भी महिला को पूरी आज़ादी होती है अपने choice और अपनी सहूलियत के हिसाब से कपड़े पहनने और वेशभूषा रखने की लेकिन जब बात धर्म और परम्परा से जुड़ जाती है तो उस पर बात करना या उसे अपने मन मुताबिक ढालना काफी मुश्किल होता है। यही बात हिन्दू परम्परा में सिन्दूर की अहमियत को लेकर के है। सदियों से चलती आ रही धारणा के हिसाब से हर शादीशुदा महिला को सिन्दूर लगाना जरुरी है। सिन्दूर लगाना choice है या mandatory ? कई महिलाएं ऐसी भी हैं जिनको सिन्दूर लगाना नहीं पसंद या वे केवल फंक्शन या त्योहारों में ही सिन्दूर लगन पसन्द करती हों ऐसी महिलाओं को सिन्दूर लगाने के लिए फोर्स करना बिलकुल गलत है।

आजकल सिन्दूर बनाने वाली कंपनी आर्टिफीसियल सिन्दूर और लिक्विड सिन्दूर भी मार्किट में ला रही है जिसमे बहुत ही ज्यादा केमिकल्स होते हैं। ऐसे सिन्दूर से कई महिलाओं को एलर्जी की समस्या का सामना करना पड़ता है इसीलिए ज्यादातर महिलाएं सिन्दूर लगाना अवॉयड करती हैं। सिन्दूर से स्किन इन्फेक्शन का खतरा , बालों में डैंड्रफ और स्कैप्ल में खुजली की समस्या भी हो सकती है।बात करें कि सिन्दूर लगाना choice है या mandatory ? तो अगर कोई महिला सिन्दूर नहीं लगाती तो उसे जज करना समाज का काम नहीं है। ये पूरी तरीके से उनकी पर्सनल चॉइस पर डिपेन्ड करता है कि वो सिन्दूर लगाना चाहती हैं या नहीं।  





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#सोसाइटी #रिलेशनशिप
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