हर इंसान के सपने होते हैं कि वो आगे जाके ये बनेगे , ये करेंगे , घर बसाएंगे वगैरह वगैरह। पर ज़िन्दगी की दौड़ में अक्सर ये सब चीज़े जेंडर देख के आती हैं। हमारे लिए नहीं पर सोसाइटी के लिए तो सपने देखने का हक़ ही सिर्फ पुरुष का है। महिला से तो अक्सर वो यही एक्सपेक्ट करते हैं कि वो परिवार के लिए अपने सपने, करियर, ख़ुशी यहाँ तक कि सांस लेना भी छोड़ देगी । हैना ? (औरत का करियर)

आप इस बारे में क्या सोचते हैं ? क्या परिवार की देख रेख करने की ज़िम्मेदारी सिर्फ महिला की ही होती है? हमारा तो ये मानना है कि परिवार दोनों महिला और पुरुष से बनता है तो उसकी ज़िम्मेदारी भी दोनों की ही होनी चाहिए।

घर की ज़िम्मेदारी पुरुष क्यों नहीं उठा सकते ?

हम जिस दौर में रहते हैं , उसमे आज महिला कहाँ कहाँ नहीं पहुँच रही हैं और ये साबित भी कर रही हैं कि वो पुरुष से कम नहीं है। पर फिर भी लोगो का ये मानना कि ‘पुरुष सिर्फ घर के बाहर और महिला घर के अंदर अच्छी लगती है’ बहुत ही पुराना विचार है। आपको अपनी इस सोच से ऊपर उठके भी दुनिया देखनी पड़ेगी। और आपको अगर फिर भी ये बात न समझ आए तो कुछ मूवीज भी हैं जो ये दिखती हैं की पुरुष किस तरह घर संभाले में और महिला किस तरह बाहर का काम सँभालने में सक्षम हैं। मूवीज जैसे कि ‘की एंड का‘ आपको आज की जेनेरशन (generation) के विचारों के बारे में एक झलक दे सकती है।

ये बेहतर होगा की आप समझे की घर की ज़िम्मेदारी पुरुष भी उठा सकते हैं। आप एक महिला को परिवार के लिए उसके करियर की बली देने के लिए नहीं कह सकते। अगर परिवार है, उसको चलाना है, तो दोनों पार्टनर्स को मिलजुल के एक फैसला लेना चाहिए पर किसी को भी अपने सपने नहीं छोड़ने चाहिए।

परिवार दोनों का तो संभालना भी दोनों को ही चाहिए

परिवार बनाने के लिए अगर दोनों की सहमति रही है, तो परिवार को सँभालने की ज़िम्मेदारी भी दोनों की ही होती है। करियर हर किसी के लिए ज़रूरी है । इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता की आप महिला है या पुरुष , आपको अपना करियर , अपने सपने को नहीं भूलना चाहिए।
एडजस्टमेंट जैसे अलग-अलग शिफ्ट में काम करना, या बच्चो को डे बोर्डिंग स्कूल में रखना ताकि जब आप दोनों काम कर के वापिस आए तो अपने बच्चो को सुरक्षित पाए।

(औरत का करियर)

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