थानेटा शराब पर प्रतिबंध : राजस्थान में राजसमंद जिले के थानेटा गांव की महिलाओं ने शराब विरोधी अभियान शुरू किया और लोगों ने पंचायत में सभी शराब की दुकानों को बंद करने के लिए मतदान भी किया। सभी के मतदान के कारण आज ये गांव शराब मुक्त हो गया है

1. कैसे की गयी गांव में ये शराब बंदी की प्रक्रिया ?

गांव को शराब मुक्त बनाने के लिए शुक्रवार 9 अप्रैल को हुई वोटिंग में 3245 में से 2206 मतदाताओं ने शराब की दुकानों को बंद करने के लिए मतदान किया। शराबबंदी के खिलाफ 61 वोट पड़े और 40 वोट अवैध थे।मतदान की निगरानी जिला प्रशासन के अधिकारी एसडीएम सीपी वर्मा और कलेक्टर अरविंद पोसवाल ने की।

2. थानेटा के सरपंच ने इस पर क्या कहा ?

थानेटा गाँव के साठ कुछ साल के सरपंच देवेश चौहान, मतदान में अपना वोट डालने वाले पहले लोगों में से एक थे। उसने कहा कि उनकी वर्षों की कड़ी मेहनत आज काम आयी है। उन्हें ख़ुशी है कि इतना बड़ा फैसला उनके गांव में हो पाया। इस से कई आने वाली पीडियों का सुधार होगा।

3. गांव में शराब से क्या क्या नुकसान होते हैं ?

चौहान ने टीओआई को बताया कि राजसमंद में पहली ग्राम पंचायत 2016 में शराब मुक्त हो जाने के बाद कई पंचायतें इस सामाजिक बुराई से छुटकारा पाने की कोशिश कर रही हैं। कई घर नष्ट हो गए हैं और कई परिवार शराब के कारण बर्बाद हो गए हैं। उसने गाँव की कई महिलाओं की कहानी भी साझा की जो इस बात की शिकायत किया करती थीं कि उनके पति शराब पर होने वाली कमाई को सबसे ज्यादा कैसे बर्बाद करते हैं। नशे में धुत लोग अक्सर अपनी पत्नी और बच्चों को पीटते थे। चौहान ने कहा, “अब, मैं उम्मीद कर सकता हूं कि आने वाली पीढ़ियां शराब नामक जहर का खामियाजा कभी नहीं भुगतेंगी।”

4. शराब बंदी से क्या गांव वाले खुश थे ?

मतदान का परिणाम घोषित होने के बाद, गांव के लोगों ने मतदान केंद्र के बाहर नृत्य कर के ख़ुशी मनाई। राजस्थान एक्साइज रूल के अनुसार, यदि पंचायत के 50 प्रतिशत निवासी शराब की दुकान बंद करने के लिए वोट देते हैं, तो पंचायत के पास ऐसा करने की शक्ति है।

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