Women Rights After Divorce In India: तलाक के बाद भारत में महिलाओं के अधिकार

Women Rights After Divorce In India: तलाक के बाद भारत में महिलाओं के अधिकार Women Rights After Divorce In India: तलाक के बाद भारत में महिलाओं के अधिकार

SheThePeople Team

25 Nov 2021


Women Rights After Divorce: साइकोलॉजिकली, तलाक लेना एक कपल के लिए काफी स्ट्रेस्फुल हो सकता है। एलिमनी, मैंटेनैंस, प्रॉपर्टी का काम कई दिक्कतें कड़ी कर सकता है। भारत में जब भी तलाक होता है तो समाज ज़्यादातर औरत को ही ज़िम्मेदार ठहराता है और उसी को एडजस्ट करने के लिए कहता है लेकिन औरतों को अपने लीगल राइट्स का पता होना चाहिए जो उन्हें तलाक लेते समय मिलते हैं।

Women Rights After Divorce In India: भारत में तलाक के बाद महिला के अधिकार


1. मैंटेनैंस राइट्स

मैंटेनैंसका मतलब उस अमाउंट से है जो पति तलाक के बाद पत्नी को देता है। इसका मकसद तलाकशुदा महिलाओं को इकोनॉमिक फ्रीडम देना है। पत्नी को एक मैंटेनैंस दिया जाता है, जिसमें पिटिशन फील्ड करने की तारीख से डिक्री की तारीख तक एक अमाउंट दिया जाता है। इसका मकसद केस चलने के दौरान उसकी बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करना है। आईपीसी की धारा 125(4) के अनुसार, अगर पति और पत्नी दोनों आपसी सहमति से अलग-अलग रह रहे हैं, तो पत्नी मैंटेनैंस का दावा नहीं कर सकती है लेकिन आपसी सहमति से अलग रहने के लिए तलाक का हुक्मनामा पत्नी को मैंटेनैंस का दावा करने से रोक नहीं सकती है। कोर्ट अपनी मर्ज़ी से कोई भी अमाउंट तय कर सकती हैI

2. बच्चे की कस्टडी का अधिकार 

किसी भी तलाक में सबसे ज़्यादा भुगतना कपल के बच्चों को करना पड़ता है। एक बच्चा बहुत सारी मेन्टल डिस्टर्बेंस से गुज़रता है।
भारत में बच्चे की कस्टडी पेरेंट्स और रिलिजन पर डिपेंड करती है। हिरासत का फैसला करते समय, माता-पिता की इकोनॉमिक कंडीशन, बैकग्राउंड, लाइफस्टाइल और वेलफेयर को ध्यान में रखा जाता है।  



  • 7 साल से कम उम्र के बच्चे की कस्टडी हमेशा मां को ही सौंपी जाती है।

  • 7 साल से ज़्यादा आयु के बच्चे की कस्टडी के लिए दोनों पक्ष कोर्ट में अप्लाई कर सकते हैं।

  • कस्टडी के लिए अप्लाई करने वाले पक्ष को अदालत में साबित करना होगा की वह उसकी अच्छी देखभाल करने में सक्षम हैं। 


3. पति की प्रॉपर्टी पर महिला का हक

पति की प्रॉपर्टी पर महिला का बराबर का हक होता है। हालांकि, अगर पति ने अपने वसीयत में इस प्रॉपर्टी पर से पत्नी का नाम हटा दिया है तो पत्नी का कोई हक नहीं बनेगा। इसके सिवाय पति की खानदानी प्रॉपर्टी पर पत्नी का हक होगा। पत्नी के पास अधिकार होगा की वो अपने ससुराल में रहे। 



  • तलाक के बाद पत्नी के नाम जितनी भी संपति है उस पर उसका पूरा अधिकार होगा।

  • शादी के समय मिले उपहारों व नकदी पर भी पत्नी का अधिकार होता है।

  •  ज्वॉइंट प्रापर्टी पर पत्नी को बराबर का हिस्सा मिलेगा, पत्नी चाहे तो अपने हिस्से की संपत्ति बेच सकती है। 





अनुशंसित लेख