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महिलाएं हमेशा पैसा बचाने का सोचती है। एक हाउसवाइफ की बात की जाए तो कभी चावल के डिब्बे में, कभी अलमारी में तो कभी पर्स में वह कुछ न कुछ पैसे छुपा कर रख लेती है कि जब जरूरत पड़ेगी या फिर कोई मुश्किल समय आएगा तो काम आएगा। पैसे को बचाना बहुत अच्छी बात है, लेकिन इन्वेस्टमेंट करना उससे भी बेहतर कदम है। महिलाओं को न तो पैसा कमाना सिखाया जाता है और न ही कमाए हुए पैसे को इन्वेस्ट करना। ऐसे में उन्हें कई बैरियर्स का सामना करना पड़ता है। आज हम बात करेंगे कि कैसे महिलाएं पैसे को सिर्फ बचाकर रखने की बजाय इन्वेस्टमेंट के जरिए अपने पैसे को बढ़ा सकती हैं।
जानिए महिलाओं के लिए क्यों जरूरी है इन्वेस्टमेंट?
माइंडसेट बदलना ज़रूरी है
जब भी पैसों और मिथ्स की बात आती है तो महिलाओं को अपने आप ही कमजोर समझ लिया जाता है। अक्सर हंसी उड़ाई जाती है कि महिलाओं को पैसा संभालना नहीं आता। बचपन से ही सिखा दिया जाता है कि पैसों से जुड़े सभी फैसले भाई या पिता लेंगे। यही सोच महिलाओं के लिए सबसे बड़ा अड़ंगा बनती है।
इसलिए सबसे पहले जरूरी है कि महिलाएं अपना माइंडसेट बदलें। जब माइंडसेट बदलेगा तो फाइनेंस को हैंडल करना, इन्वेस्टमेंट करना और सही फैसले लेना बिल्कुल आसान हो जाएगा।
छोटा कदम भी बड़ा बदलाव ला सकता है
इन्वेस्टमेंट शुरू करने के लिए आपको बहुत बड़े अमाउंट की जरूरत नहीं है। आप छोटे-छोटे अमाउंट से भी शुरुआत कर सकती हैं। बहुत सारे लोग इसलिए कदम नहीं उठाते क्योंकि उन्हें लगता है कि बिना एक्सपर्ट बने या पूरी नॉलेज लिए यह काम नहीं किया जा सकता। लेकिन सच्चाई यह है कि आप करते-करते भी सीख सकती हैं। जरूरी है तो सिर्फ शुरुआत की।
सीखने की आदत डालें
इन्वेस्टर माइंडसेट बनाने के लिए सबसे जरूरी है सीखने की आदत जैसे फाइनेंस और इन्वेस्टमेंट पर किताबें पढ़ें, छोटे-छोटे ऑनलाइन कोर्स करें, भरोसेमंद लोगों से सलाह लें और सबसे अहम, खुद रिसर्च करें। आप जितना सीखेंगी, उतना कॉन्फिडेंस आपके अंदर आएगा।
पैसा महिलाओं को सिर्फ सुरक्षित नहीं, बल्कि आज़ाद बनाता है
महिलाओं के लिए पैसा सिर्फ जरूरतें पूरी करने का जरिया नहीं है। यह उन्हें एम्पावर करता है, अपने फैसले लेने की ताकत देता है। यह उन्हें औकात से बड़ा सोचने की हिम्मत देता है और सबसे जरूरी, एक आत्मविश्वास देता है। जब एक महिला के पास पैसा होता है, तो वह अपनी मर्जी से कहीं भी घूम सकती है, घर या गाड़ी खरीद सकती है, खुद पर खर्च कर सकती है, अपनी मेंटल हेल्थ का ध्यान रख सकती है। असली आज़ादी तभी आती है जब आर्थिक आज़ादी मिलती है।