रूपा बयोर से मिलिए: भारत की पहली ताइक्वांडो खिलाड़ी, जिन्होंने विश्व रैंकिंग में छठा और एशिया में पहला स्थान हासिल किया

रूपा बयोर ने इतिहास रच दिया है। वह विश्व की टॉप 10 पूमसे ताइक्वांडो रैंकिंग में जगह बनाने वाली भारत की पहली खिलाड़ी हैं। फिलहाल वह विश्व में छठे स्थान पर और एशिया में नंबर एक रैंक पर हैं।

author-image
Rajveer Kaur
New Update
How Rupa Bayor Turned Adversity into Achievement:

Photograph: (PTI)

रूपा बयोर ने इतिहास रच दिया है। वह मान्यता प्राप्त पूमसे में विश्व रैंक 6 और एशिया रैंक 1 हासिल करने वाली भारत की पहली ताइक्वांडो खिलाड़ी बनी हैं। यह भारतीय ताइक्वांडो के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जिसकी खेल जगत में व्यापक सराहना हो रही है।

Advertisment

रूपा बयोर से मिलिए: भारत की पहली ताइक्वांडो खिलाड़ी, जिन्होंने विश्व रैंकिंग में छठा और एशिया में पहला स्थान हासिल किया

बयोर की यह सफलता बेहद प्रेरणादायक रही है। उन्होंने 2021 में विश्व रैंकिंग में 123वें स्थान से शुरुआत की थी और लगातार मेहनत के साथ हर साल आगे बढ़ती रहीं। उनकी मेहनत, कौशल और निरंतरता ने आज उन्हें दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल कर दिया है और एशिया की सबसे ऊँची रैंक पाने वाली खिलाड़ी बना दिया है—जो भारत के लिए पहली बार हुआ है।

उनकी इस उपलब्धि ने उनके गृह राज्य अरुणाचल प्रदेश को भी गौरवान्वित किया है। मुख्यमंत्री पेमा खांडू सहित कई नेताओं ने भारतीय खिलाड़ियों के लिए नया मानक स्थापित करने पर उन्हें बधाई दी। उनकी सफलता आज देशभर के युवा खिलाड़ियों को प्रेरित कर रही है।

Advertisment

मुश्किलों से भरा बचपन

रूपा बयोर का जन्म अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी ज़िले के डापोरिजो सर्कल के सिप्पी गांव में हुआ। उन्होंने बहुत छोटी उम्र में अपने पिता को खो दिया था। चार भाई-बहनों के साथ वह अपनी माँ के साथ खेतों में काम करते हुए बड़ी हुईं। उनकी माँ को भी कम उम्र में शादी और जल्दी विधवा होने के कारण कई संघर्षों का सामना करना पड़ा।

दर्द को बनाया ताकत

कठिन हालातों में पली-बढ़ीं रूपा ने अपनी परेशानियों को कमजोरी नहीं बनने दिया। बचपन से ही वह निडर, साहसी और ऊर्जा से भरी हुई थीं। चुनौतियों से डरने के बजाय, उन्हें स्वीकार करना उनका स्वभाव बन गया, जिसने उन्हें खेल की ओर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

Advertisment

ताइक्वांडो की शुरुआत

2015 में उनके मामा, जो एक कराटे मास्टर हैं, ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग देना शुरू किया। यहीं से रूपा का ताइक्वांडो सफर शुरू हुआ।

पेशेवर प्रशिक्षण और पहली सफलता

2021 में रूपा ने मुंबई की इंडो-कोरियन ताइक्वांडो अकादमी में कोच अभिषेक दुबे के साथ पेशेवर प्रशिक्षण शुरू किया। कुछ ही महीनों में उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया और 2022 में क्रोएशिया में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय पदक जीता।

एशियन गेम्स का सपना

रूपा ने 2022 में चीन में होने वाले एशियन गेम्स के लिए क्वालिफाई किया था, लेकिन वीज़ा से जुड़ी समस्या के कारण वह इस बड़े मंच पर नहीं उतर सकीं।

Advertisment

अंतरराष्ट्रीय पहचान

2024 में उन्होंने वियतनाम में आयोजित 8वीं एशियन ताइक्वांडो पूमसे चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता और ऑस्ट्रेलियन ओपन में रजत पदक अपने नाम किया। उनके लगातार शानदार प्रदर्शन ने उन्हें वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई।

इतिहास रचती उपलब्धि

लगातार मेहनत और समर्पण के दम पर रूपा बयोर विश्व रैंक 6 और एशिया रैंक 1 तक पहुँचीं। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने भारतीय ताइक्वांडो में इतिहास रचते हुए देश के लिए एक नई मिसाल कायम की है।