दिल्ली हॉस्पिटल मलयालम केस  – दिल्ली के गोविन्द बल्लभ पंत इंस्टिट्यूट ऑफ़ पोस्टग्रेजुएट एंड रिसर्च का ये मामला है। यहाँ नर्सिंग सुपरिटेंडेंट ने एक कंट्रोवर्सिअल आर्डर दिया। इस आर्डर में इन्होंने कहा कि अस्पताल में सिर्फ हिंदी और इंग्लिश भाषा में बात की जाएगी और न करने पर सीरियस एक्शन लिया जायेगा। ये सर्कुलर अब विथड्रॉ कर लिया गया है। नर्सिंग सुपरिटेंडेंट ने कहा कि उन्होंने ये सर्कुलर पॉजिटिव वे में सर्कुलेट किया था और उनकी मलयालम स्टाफ को लेकर कोई भी बुरी मंशा नहीं थी।

क्या था पूरा दिल्ली हॉस्पिटल मलयालम केस ?

नर्सिंग अधीक्षक के अनुसार, सर्कुलर को सही मायने में “गलत अर्थ” दिया गया था। “मुझे समझाने का मौका नहीं मिला। अगर उक्त सर्कुलर में मलयालम शब्द के इस्तेमाल से किसी कर्मचारी की भावना आहत हुई है, तो मैं माफी मांगता हूं, ”यह एक नोट में कहा गया था जिसे समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा ट्विटर पर पोस्ट किया गया था।

अधिकारी ने सर्कुलर जारी करने के पीछे के कारणों के बारे में भी बताया और कहा, “मैं भविष्य में और अधिक सावधान और सतर्क रहूंगा।” पढ़ें कि कैसे ओडिशा की इस नर्स ने अपने पति के साथ COVID-19 शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए नौकरी छोड़ दी।

क्यू भड़का दिल्ली हॉस्पिटल का मलयालम स्टाफ ? क्या कहना था स्टाफ का ?

अधिकारी ने दावा किया कि उसने 31 मई, 1 जून और 2 जून को प्राप्त शिकायतों के आधार पर कार्रवाई की है। मलयाली नर्सों की दिल्ली एक्शन कमेटी के प्रतिनिधि फेमर सीके ने पिछले हफ्ते एएनआई को बताया था, “यह हमारे लिए वास्तव में चौंकाने वाला था।” उन्होंने आगे इस तरह के नोटिस जारी करने की निंदा करते हुए कहा कि यह “हमारी भाषाई स्वतंत्रता” के लिए खतरा है।

उसके साथी कार्यकर्ताओं ने भी संबंधित व्यक्ति से माफी की मांग की क्योंकि फेमर कहते हैं, “उन्होंने पूरे राज्य को अपमानित किया है”। उन्होंने कहा कि इस तरह के “कदाचार” के खिलाफ “गंभीर कार्रवाई” की जानी चाहिए।

Email us at connect@shethepeople.tv