न्यूजीलैंड के स्कूलों में मुफ्त सैनिटरी पैड बाँटे गए

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Ayushi Jain

पीरियड प्रोडक्ट्स की कमी के कारण 12 युवाओं में से एक को स्कूल छोड़ने की रिसर्च का हवाला देते हुए, न्यूजीलैंड के प्रधान मंत्री जैसिंडा अर्डर्न ने कहा कि उनकी सरकार महिला छात्रों के लिए मुफ्त सैनिटरी प्रोडक्ट्स तक पहुंच प्रदान करेगी। इस अनोखे और हिम्मती कदम से  फिर से न्यूजीलैंड की गरीबी के खिलाफ लड़ाई जून में पूरी तरह शुरू होगी। न्यूजीलैंड मुफ्त सैनिटरी पैड

इस पहल की घोषणा गुरुवार को की गई। यह घोषणा न्यूजीलैंड के उत्तरी वाइकाटो क्षेत्र में 15 स्कूलों में एक पायलट प्रोजेक्ट के बाद आई है। पायलट के एक हिस्से के रूप में, लगभग 3,200 युवाओं को मुफ्त सेनेटरी प्रोडक्ट्स प्रदान किए गए थे।

न्यू ज़ीलैण्ड की लड़ाई गरीबी से

हैमिल्टन में फेयरफील्ड कॉलेज में बोलते हुए, जैसिंडा अर्डर्न ने कहा कि युवा लोगों को पीरियड्स के कारण अपनी शिक्षा के साथ किसी भी हाल में समझौता नहीं करना चाहिए क्योंकि पीरियड जैसी चीज है जो आधी वैश्विक आबादी के लिए संभालना एक सामान्य समस्या है।

अर्डर्न ने इस मुद्दे को उठाते हुए यह भी बताया कि कार्यक्रम की लागत लगभग 25 मिलियन न्यूजीलैंड डॉलर होगी, यानी तीन वर्षों की अवधि में 18 मिलियन डॉलर। न्यूजीलैंड मुफ्त सैनिटरी पैड

सेनेटरी पैड न्यूज़ीलैंड न्यूज़: स्कूलों में बाँटे गए मुफ्त पैड

सेनेटरी पैड्स को मुफ्त बनाने के एक छोटे से कदम से, सरकार गरीबी के खिलाफ अपनी लड़ाई में दूर की यात्रा कर सकती है। सरकार स्कूल की अटेंडेंस बढ़ाने के लिए सरकार की सहायता करेगी। इसके अलावा, यह सरकार को गरीबी को सीधे टैकल करने और बच्चों की भलाई पर एक आशावादी प्रभाव डालने के लिए एक पंप देगा। उन्होंने यह भी कहा कि पायलट में भाग लेने वालों ने स्कूल में उत्सुकता दिखाई दी गई और एजुकेशन प्रोडक्ट्स में सुधार किया।

इसके अलावा, शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, पायलट के छात्रों ने ट्रेनिंग फेज के दौरान एक पॉजिटिव डायरेक्शन में जवाब दिया। इसके अलावा, स्कूलों ने अपने छात्रों के लिए समय-समय पर पीरियड्स से जुड़े स्टिग्मा को तोड़ने की सूचना दी। उसी के लिए सैनिटरी प्रोडक्ट्स को सभी के लिए मुफ्त बनाने के लिए एक बड़ा धन्यवाद। अब सरकार एक चरणबद्ध पहल की योजना तैयार कर रही है।

पीरियड पावर्टी एक ऐसा सेनारिओ है जो तब होता है जब महिलाओं और लड़कियों को सैनिटरी प्रोडक्ट्स जैसे पैड, टैम्पोन, या मेंस्ट्रुअल कप, या क्रैम्प्स की दवा के लिए पैसे की कमी होती है। इसके खिलाफ कड़ा रुख अपनाने वाला पहला देश स्कॉटलैंड था क्योंकि यह सैनिटरी प्रोडक्ट्स को मुक्त बनाने के लिए दुनिया में पहला देश बन गया था।

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