एनडीटीवी की पूर्व पत्रकार निधि राजदान ने शुक्रवार को ट्विटर पर एक बयान जारी किया जिसमें उन्होंने खुद को फिशिंग अटैक का शिकार बताया। पत्रकार ने पिछले साल शेयर किया था कि वह 21 साल तक काम करने के बाद NDTV न्यूज़ चैनल को छोड़ रही है और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में एक एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में शामिल होने जा रही है।

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हालांकि, शुक्रवार को निधि राजदान ने खुलासा किया कि वह हार्वर्ड में शामिल नहीं हुईं क्योंकि उन्हें वहां नौकरी की पेशकश नहीं की गई थी। राजदान ने दावा किया कि उन्हें जो करेस्पोंडेंस मिला था, वह वास्तव में नकली था। उन्होंने लिखा, “इस हमले के अपराधियों ने मेरे पर्सनल डेटा और इनफार्मेशन तक पहुँच प्राप्त करने के लिए चतुर और गलत तरीकों का इस्तेमाल किया और मेरे डिवाइसेस और मेरे ईमेल / सोशल मीडिया एकाउंट्स तक भी पहुँच प्राप्त की है।”

स्कूल ऑफ़ जर्नलिज्म न होने पर वह एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में कैसे नियुक्त हो सकती है?

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में नीमन जर्नलिज्म लैब के संस्थापक जोशुआ बेंटन ने रज्जन के ट्वीट को रीट्वीट किया और कहा कि इस वर्सिटी में “जर्नलिज्म का कोई स्कूल नहीं, जर्नलिज्म का कोई डिपार्टमेंट नहीं है और जर्नलिज्म का कोई प्रोफेसर नहीं है।” उन्होंने कहा कि हार्वर्ड में नीमन जर्नलिज्म लैब है, लेकिन इसमें कोई फैकल्टी या क्लासेज नहीं हैं। उन्होंने जून से राजदान के ट्वीट को आगे जोड़ा, जिसमें उन्होंने अपनी नियुक्ति की खबर साझा की और कहा, “वह स्पष्ट रूप से इस धारणा के तहत थीं कि FAS (Faculty Of Arts And Science) में शामिल हो रही हैं”.  बेंटन ने कहा कि FAS के पास कोई जर्नलिज्म के प्रोफेसर नहीं हैं और न ही वो कोई जर्नलिज्म की डिग्री प्रदान करता है।

 

इससे कई यूज़र्स ने सवाल किया कि फर्जी नौकरी की पेशकश लेने से पहले राजदान ने इस फेक जॉब की डिटेल्स की पुष्टि कैसे नहीं की।

फॉर्मल प्रोसीजर के बारे में क्या?

एक यूज़र जिसने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक एल्यूमना होने का दावा किया था, ने कहा कि यहां तक ​​कि एडमिशन प्रोसेस बहुत फॉर्मल है और “कुछ e-mails के ज़रिये बातचीत होना” इसका हिस्सा नहीं है। कई अन्य उपयोगकर्ताओं ने सवाल उठाया कि जब विश्वविद्यालय ने इंटरव्यू के लिए उनसे संपर्क नहीं किया था, तो राजदान ने कुछ गलत होने की सम्भावना को क्यों नहीं देखा ।

 

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एजुकेशनल क्वालिफिकेशन

सोशल मीडिया ने बताया कि एक एसोसिएट प्रोफेसर होने के लिए, पीएचडी, अकादमिक क्रेडेंशियल्स या पब्लिश्ड रिसर्च पेपर होना चाहिए। राजदान के बायो के अनुसार, वह कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से आर्ट्स में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। इससे लोगों को पहली बार में नियुक्ति पर संदेह हुआ। हार्वर्ड विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, एक उम्मीदवार जो एक एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया जाता है, उसे “डॉक्टरेट होना चाहिए”।

 

क्या वह वर्क वीजा पर अमेरिका गई थी?

सभी ट्विटर उसेर्स यह जानने में भी उत्सुक थे की निधि इस समय अमेरिका में रह रही है और यदि हां, तो वह वहां कैसे पहुंची। उन्होंने पूछा कि अगर राजदान वर्क वीजा पर USA में एंटर करती है तो उसने अमेरिकी एम्बेसी को डाक्यूमेंट्स उपलब्ध कराए होंगे जो उनके एम्प्लॉयमेंट को वेरीफाई करते हैं। अगर यह नहीं हुआ तो फिर डॉक्युमेंट्स इतने स्ट्रांग थे की एम्बेसी भी इस बात का खुलासा नहीं कर पाई।

 

क्या इसका मतलब राजदान के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए?

हार्वर्ड में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में अपनी नियुक्ति की घोषणा के बाद पिछले कुछ महीनों में, राजदान ने अपने नए देसिग्नेशन के साथ कई सेशंस, क्लासेज और इंटरव्यू आयोजित किए। सोशल मीडिया यूजर्स के मुताबिक यह कानूनी पचड़े में पड़ सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि यदि राजदान अमेरिका तक पहुंचने में सक्षम थी, तो वर्क वीजा या विजिटर वीजा पर, उन्हें अमेरिका में बैन किया जा सकता है। हालाँकि, निधि राजदान द्वारा कानूनी कार्रवाई की गई है क्योंकि उन्होंने अपने पोस्ट में दावा किया था कि उन्होंने अधिकारियों से मामले को देखने के लिए कहा है।

 

उन्होंने यह क्यों कहा की वो हावर्ड में पढ़ा रही हैं जब वो नहीं पढ़ा रही थी ?

जैसा कि राजदान के पुराने ट्वीट्स देखे गए थे, उनमें से एक ने उन्होंने कहा, “मैं हार्वर्ड में पढ़ा रही हूं”। हालांकि, अपने वर्तमान बयान में, उन्होंने खुलासा किया कि विश्वविद्यालय में अपना काम शुरू करने से पहले उन्हें जनवरी 2021 तक इंतजार करने के लिए कहा गया था। सोशल मीडिया यूजर्स हैरान रह गए कि क्या कुछ और है जो मिसिंग है। यहां निधी के ट्वीट की एक बातचीत के दौरान एक बयान के रूप में भी देखा जा सकता है कि वह पढ़ाने जा रही है।

 

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