Gujarat HC: गर्भवती महिलाओं की मदद न करने पर अस्पतालों पर होगी कड़ी कार्यवाही

एक प्रेगनेंट महिला को इलाज से वंचित कर दिया गया क्योंकि वह अस्पताल द्वारा मांगी गई राशि पे नहीं कर सकती थी। उस महिला ने बाद में अस्पताल के इंट्री के बाहर स्ट्रेस पर बच्चे को जन्म दिया। पढ़ें पूरी खबर इस न्यूज़ ब्लॉग में -

Vaishali Garg
13 Jan 2023
Gujarat HC: गर्भवती महिलाओं की मदद न करने पर अस्पतालों पर होगी कड़ी कार्यवाही

Gujarat High Court

Gujarat High Court: गुरुवार 12 जनवरी को गुजरात उच्च न्यायालय ने अहमदाबाद नगर निगम द्वारा संचालित एलजी अस्पताल को एक प्रेगनेंट महिला को चिकित्सा सहायता से इनकार करने के बाद खुद को क्लीन चिट देने पर फटकार लगाई। गुजरात की अदालत एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें प्रेगनेंट महिलाओं को चिकित्सा सहायता से इनकार करने के लिए अस्पताल अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक और अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की गई थी।

Hospitals Denying Pregnant Women Aid

यह जनहित याचिका अधिवक्ता निकुंज मेवाड़ा द्वारा दायर की गई थी और इसमें दो घटनाओं को हाई लाइट किया गया था। एक घटना पिछले साल जनवरी 2022 में मिरानी मैटरनिटी एंड नर्सिंग होम में हुई थी। एक प्रेगनेंट महिला को इलाज से वंचित कर दिया गया क्योंकि वह अस्पताल द्वारा मांगी गई राशि पे नहीं कर सकती थी। उस महिला ने बाद में अस्पताल के इंट्री के बाहर स्ट्रेस पर बच्चे को जन्म दिया।

दूसरी घटना 10 फरवरी 2022 को हुई थी जब एलजी अस्पताल पहुंचने और अस्पताल के बाहर लेबर कराने के बाद दर्द से गुजर रही एक महिला को कथित तौर पर देखभाल से वंचित कर दिया गया। एलजी अस्पताल की कानूनी प्रतिनिधि ऐश्वर्या गुप्ता ने बैंच के समक्ष प्रस्तुत किया कि घटना के दिन ही आंतरिक जांच की गई थी।

आंतरिक जांच में सोनोग्राफी कराई गई और जब डॉक्टर सुबह 6 बजे के करीब महिला की जांच करने आए तो वह बिस्तर पर नहीं मिली थी। वकील ने प्रस्तुत किया, "वह स्वेच्छा से अस्पताल के बाहर गई थी और बच्चे को जन्म दिया था ... वह गलत धारणा पर चली गई थी कि अस्पताल ने उसे छुट्टी दे दी थी।"

मुख्य जस्टिस अरविंद कुमार ने कॉमेंट की कि यह सुनिश्चित करना अस्पताल के कर्मचारियों का कर्तव्य था कि उसे लेबर रूम के अंदर भर्ती कराया जाए। उन्होंने कहा, "सामान्य ज्ञान के किसी भी खंड द्वारा इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है"।

इससे पहले भी घटित हो चुकी है ऐसी घटनाएं

पिछले साल आधार कार्ड नहीं होने के कारण कर्नाटक के एक हॉस्पिटल में कथित तौर पर इलाज से इनकार करने के बाद एक प्रेगनेंट महिला की मौत हो गई थी। डॉक्टर और अस्पताल के कर्मचारियों ने 30 वर्षीय कस्तूरी को भर्ती करने से मना कर दिया था, जो जुड़वा बच्चों के साथ प्रेगनेंट थी। महिला ने डिलीवरी के लिए पैसे जुटाने के लिए पड़ोसियों की मदद ली थी और उसे रिक्शा में अस्पताल भेजा गया था।

पड़ोसियों ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों और अस्पताल के कर्मचारियों ने उसे भर्ती करने से इनकार कर दिया और उसे वापस घर उसके घर भेज दिया। कस्तूरी ने एक लड़के को जन्म देने के बाद अत्यधिक रक्तस्राव का विकास किया और दूसरे बच्चे को जन्म देने से पहले ही उसकी मृत्यु हो गई। वह और उसके नवजात जुड़वा बच्चे मर गए।

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