कर्नाटक सरकार 10 लाख से अधिक छात्राओं को बांटेगी Menstrual Cup

कर्नाटक अब सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में सैनिटरी पैड की जगह मेन्स्ट्रुअल कप प्रदान करने की तैयारी कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह एक सतत और आर्थिक रूप से प्रभावी कदम होगा।

author-image
Rajveer Kaur
New Update
Cup

Menstrual cup Photograph: (Freepik)

कर्नाटक ने सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में मासिक धर्म स्वास्थ्य में बदलाव करने का साहसिक कदम उठाया है। अब सरकार मुफ्त डिस्पोज़ेबल सैनिटरी पैड देने की बजाय 10 लाख से अधिक छात्राओं को मेंस्ट्रुअल कप देने की तैयारी कर रही है। यह पहल पहले से चल रही शुचि योजना के तहत होगी, जिसके लिए 61 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।

Advertisment

अधिकारियों का कहना है कि मेंस्ट्रुअल कप लंबे समय तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं और इससे हर साल पैड पर होने वाला खर्च करीब 10 करोड़ रुपये तक कम हो सकता है, भले ही शुरू में खर्च थोड़ा ज्यादा हो।

कर्नाटक सरकार 10 लाख से अधिक छात्राओं को बांटेगी Menstrual Cup

योजना कैसे चलेगी

छात्राओं को मेंस्ट्रुअल कप के साथ उसका सही इस्तेमाल, साफ-सफाई और रखने का तरीका भी सिखाया जाएगा। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि पहली बार इस्तेमाल करने वाली लड़कियाँ असहज या भ्रमित न हों और किसी पर भी कप इस्तेमाल करने के लिए जबरदस्ती नहीं की जाएगी। नए नियम लागू होने के पहले तीन महीने तक पैड भी उपलब्ध रहेंगे।

चुनौतियाँ

मेंस्ट्रुअल कप के लिए साफ पानी और निजी जगह की जरूरत होती है, जो कि ग्रामीण स्कूलों में हर जगह उपलब्ध नहीं है। साथ ही, कई लड़कियों को अपने शरीर और मासिक धर्म के बारे में कम जानकारी होती है, इसलिए सही शिक्षा के बिना कप का परिचय डर या हिचकिचाहट पैदा कर सकता है।

Advertisment

पैड से हटने की वजह

कर्नाटक पहले पैड वितरण में सालाना करीब 71 करोड़ रुपये खर्च करता था। पैड को हर कुछ घंटों में बदलना पड़ता है और हर महीने आपूर्ति करनी होती है, जिससे सरकार पर लगातार दबाव रहता है। मेन्स्ट्रुअल कप एक बार देने पर कई सालों तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं, इसलिए यह सस्ता और टिकाऊ विकल्प है।

स्कूल में अनुपस्थिति को कम करना

इस योजना का एक और उद्देश्य यह है कि पैड न मिलने की वजह से लड़कियाँ स्कूल न छोड़ें। लंबे समय तक चलने वाले कप से यह समस्या कम होगी और छात्राएँ अपनी पढ़ाई में पीछे नहीं रहेंगी।

भविष्य के लिए मॉडल

अगर यह योजना सही तरीके से लागू हुई, तो कर्नाटक का यह मॉडल न केवल देश बल्कि दुनिया के लिए उदाहरण बन सकता है, यह दिखाते हुए कि मासिक धर्म स्वास्थ्य में टिकाऊ और किफायती विकल्प संभव हैं।

Advertisment