केरल की पहली दृष्टिबाधित सिविल जज: Thanya Nathan की प्रेरक कहानी

थन्या नाथन Kerala की पहली visually impaired civil judge हैं। उनकी achievement देश के लिए मिसाल है। उनकी story prove करती है कि strong determination से कोई भी goal हासिल हो सकता है। हौसले के आगे कोई मुश्किल बड़ी नहीं होती।

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Tamanna Soni
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Via (Livelaw.in)

थन्या नाथन का नाम आज पूरे केरल में सम्मान के साथ लिया जाता है। वह Kerala की पहली दृष्टिबाधित civil judge बनकर history रच चुकी हैं। उनकी यह achievement न सिर्फ उनके लिए बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल है। आज जब हम उनकी story सुनते हैं, तो यह विश्वास पक्का हो जाता है कि हौसले के आगे कोई भी मुश्किल छोटी है।

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केरल की पहली दृष्टिबाधित Civil Judge: थन्या नाथन की प्रेरक कहानी

बचपन से ही अलग सोच

थन्या का जीवन challenges से भरा रहा है। जन्म से हीvisually impaired होने के बावजूद, उन्होंने कभी हार नहीं मानी। बचपन में जब दूसरे बच्चे खेल-कूद में व्यस्त रहते थे, थन्या किताबों की दुनिया में खो जाती थीं। उन्होंने Braille script सीखी और पढ़ाई में खूब मेहनत की। जहां दूसरे लोग अपनी limitations को बहाना बना लेते हैं, वहीं थन्या ने अपनी सीमाओं को अपनी strength बना लिया। उनका मानना है कि will power और hard work से कोई भी goal हासिल किया जा सकता है।

Education की राह पर अग्रसर

थन्या ने अपनी पढ़ाई बेहद लगन से की। School से लेकर college तक, हर जगह उन्होंने अपनी मेहनत का लोहा मनवाया। उन्होंने law की पढ़ाई पूरी की और judicial services की exam की तैयारी शुरू की। यह परीक्षा बेहद tough मानी जाती है और इसके लिए रात-दिन की मेहनत चाहिए होती है। थन्या ने audio books और digital materials की help से अपनी preparation की। उनके लिए सबसे बड़ी challenge थी बिना देखे पढ़ाई करना, लेकिन उन्होंने अपनी memory को इतना strong बना लिया कि हर information उनकी जुबान पर रहती थी।

Success का पल

जब judicial services की exam का result आया, तो थन्या ने success हासिल की। यह उनके जीवन का सबसे खुशी का moment था। उन्होंने यह prove कर दिया कि physical disability मानसिक ability को कभी limit नहीं कर सकती। उनकी इस victory ने पूरे Kerala में एक नई उम्मीद जगाई। लोगों ने महसूस किया कि अगर intentions पक्के हों, तो रास्ते अपने आप बन जाते हैं।

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Court में नया दौर

Judge बनने के बाद, थन्या ने अपने काम से सबको impress किया है। वह अपने duties को पूरी responsibility के साथ निभाती हैं। Court में उनका काम करने का style दूसरों के लिए inspiration का source है। वह modern technology का use करके अपना काम करती हैं। Screen reader और voice commands की मदद से वह documents पढ़ती हैं और हर case को गहराई से समझती हैं। उनके colleagues बताते हैं कि थन्या हर मुकदमे को बहुत ध्यान से सुनती हैं और justice देने में कोई कमी नहीं छोड़तीं।

Society के लिए प्रेरणा

थन्या की story हर उस व्यक्ति के लिए motivation है जो किसी न किसी challenge का सामना कर रहा है। उन्होंने यह दिखाया है कि strong determination और confidence के साथ कोई भी बाधा पार की जा सकती है। वह specially differently-abled community के लिए एक role model हैं। आज कई youth उनसे inspiration लेकर अपने dreams पूरे करने की कोशिश कर रहे हैं। थन्या ने यह message दिया है कि शरीर की weakness मन की strength के आगे कुछ नहीं है।

Family का सहारा

थन्या की success के पीछे उनके परिवार का भी बड़ा contribution रहा है। उनके parents ने कभी उन्हें अलग नहीं समझा और हमेशा उनका हौसला बढ़ाया। उनके siblings ने भी हर step पर साथ दिया। थन्या कहती हैं कि family का support उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा है। उनका मानना है कि सही support system के साथ कोई भी व्यक्ति अपने target को achieve कर सकता है। घर में सबने मिलकर उन्हें वह environment दिया जिसमें वह अपने सपनों को wings दे सकीं।

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Message और सीख

थन्या नाथन की journeyहमें सिखाती है कि boundaries सिर्फ हमारे mind में होती हैं। यदि हम अपने goal के प्रति dedicated रहें और effort करते रहें, तो कोई भी destination दूर नहीं है। थन्या ने न केवल अपने लिए बल्कि आने वाली generations के लिए भी रास्ता बनाया है। उनकी story यह prove करती है कि असली disability मन की होती है, शरीर की नहीं। आज वह हर differently-abled person के लिए hope की किरण हैं। उन्होंने दिखा दिया है कि अगर intentions clear हों, तो मंज़िलें खुद-ब-खुद करीब आ जाती हैं।

Judge law kerala