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हमारे देश में महिला सुरक्षा आज भी एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है। महिलाएं शिक्षा, रोजगार, राजनीति और खेल जैसे हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, लेकिन सुरक्षा की चुनौतियाँ अब भी उनके सामने खड़ी हैं। आज भी महिलाएं रात में अकेले बाहर निकलने से डरती हैं। चाहे दिन में सफर कर रही हों या रात में, उनके मन में छेड़छाड़, हिंसा और यौन उत्पीड़न का डर बना रहता है।
महिलाओं की सुरक्षा: 40% महिलाएं आज भी महसूस करती हैं असुरक्षित
नई रिपोर्ट से खुलासा
नेशनल वीमेन कमीशन की NARI 2025 रिपोर्ट के अनुसार देशभर के 31 शहरों की महिलाओं की सुरक्षा पर एक सर्वे किया गया, जिसमें 12,770 महिलाओं ने हिस्सा लिया। रिपोर्ट में बताया गया है कि महिलाओं की सुरक्षा का राष्ट्रीय स्कोर 65% है। कुल 60% महिलाएं अपने शहर को सुरक्षित मानती हैं, वहीं अब भी 40% महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं।
Kohima, Aizawl, Itanagar, and Gangtok have been named the safest cities for women in India, according to the National Annual Report & Index on Women’s Safety (NARI) 2025.
— Northeast Now (@NENowNews) August 29, 2025
The survey of 12,770 women across 31 cities also placed Visakhapatnam, Bhubaneswar, and Mumbai among the top… pic.twitter.com/Vj4oLmUn25
दिन और रात की हकीकत
सर्वे से यह भी सामने आया कि महिलाएं दिन के समय शैक्षणिक संस्थानों और कार्यस्थलों को अपेक्षाकृत सुरक्षित मानती हैं लेकिन रात में सार्वजनिक स्थानों जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट या मनोरंजन स्थल पर उन्हें असुरक्षित महसूस होता है।
सबसे सुरक्षित शहर
इस सर्वे के अनुसार कोहिमा, विशाखापट्टनम, भुवनेश्वर, आइजोल, गंगटोक, ईटानगर और मुंबई देश के सबसे सुरक्षित शहरों में गिने गए।
सबसे असुरक्षित शहर
वहीं, पटना, जयपुर, फरीदाबाद, दिल्ली, कोलकाता, श्रीनगर और रांची को सबसे असुरक्षित शहरों में शामिल किया गया है।
Mumbai ranks among the safest cities for women, Delhi among the least safe: NARI report 2025 pic.twitter.com/nnS0gcNN54
— The Tatva (@thetatvaindia) August 29, 2025
शिकायतों की स्थिति
रिपोर्ट के मुताबिक, हर तीन में से एक महिला जो उत्पीड़न (Harassment) का सामना करती है, शिकायत दर्ज करवाती है। लेकिन, कई मामलों में कार्रवाई तक नहीं होती। महिलाओं के साथ उत्पीड़न का आँकड़ा भी चिंताजनक है। कुल 7% महिलाओं ने उत्पीड़न का अनुभव बताया, वहीं 24 साल से कम उम्र की महिलाओं में यह आँकड़ा 14% तक पहुँच गया। इसके बावजूद, ज्यादातर मामलों में शिकायत दर्ज नहीं की गई।
महिलाओं को सार्वजनिक जगहों पर असुरक्षित मानती हैं क्योंकि वहाँ ढांचा ठीक नहीं है, रोशनी कम होती है और पब्लिक ट्रांसपोर्ट भी सुरक्षित नहीं है। इसके अलावा महिलाओं को ही उत्पीड़न के लिए दोषी ठहराया जाना, असुरक्षा को और बढ़ा देता है।
युवा महिलाओं पर सबसे ज्यादा असर
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 24 वर्ष से कम उम्र की महिलाएं उत्पीड़न की घटनाओं का सबसे अधिक शिकार होती हैं।
NCW की चेयरपर्सन विजय रहाटेकर ने नारी 2025 रिपोर्ट और विमेंस सेफ्टी इंडेक्स पर कहा कि यह रिपोर्ट महिलाओं की सुरक्षा के लिए बेहद उपयोगी है। इसमें सभी पहलुओं को शामिल किया गया है और अगर इसे स्थानीय अधिकारियों तक पहुँचाया जाए तो लागू करना आसान होगा। एनसीडब्ल्यू भी इसमें सहयोग करेगी।
ग्रेटर नोएडा में दहेज हत्या मामले पर उन्होंने बताया कि आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है और डीजीपी को तीन दिन में कार्रवाई रिपोर्ट देने के लिए कहा है। कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच जारी है।
#WATCH | Delhi: On NARI 2025 Report & Women’s Safety Index, NCW Chairperson Vijaya Rahatkar says, "This will prove to be very useful for the safety of women. They have prepared such an all-inclusive report. They have also taken into consideration all other factors, such as how… pic.twitter.com/qV1PtNQksZ
— ANI (@ANI) August 28, 2025