Toilet for Third Gender : थर्ड जेंडर की दिल्ली में पहली टॉयलेट बनी

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Swati Bundela
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दिल्ली में इनके लिए एक नयी शुरुवात की गयी और शास्त्री भवन के पास प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया में इनके लिए टॉयलेट बनायी गयी। टॉयलेट का उद्धघाटन नई दिल्ली म्युनिसिपल कॉउंसिल के सेक्रेटरी और चेयरमैन ने किया।

कब मिली थी थर्ड जेंडर को उनकी पहचान ?


ऐसी पहल से समझ आता है कि देश इस जेंडर के बारे में भी सोच रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में थर्ड जेंडर टर्म घोषित किया था और इनको एक इनकी खुद की पहचान दी थी। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इनके लिए सेपरेट टॉयलेट बनाने का आर्डर भी दिया था। कहा जा रहा है कि आगे इनके लिए और भी टॉयलेट बनाएं जायेंगे और इनके लिए सरकारी ओफिसिस में भी टॉयलेट बनाने की बात की गयी है।

ट्रांसजेंडर के लिए वैक्सीनेशन से जुडी खबर


भुवनेश्वर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने शहर में रह रहे ट्रांसजेंडर कम्युनिटी के लिए एक स्पेशल वैक्सीनशन कैंप का आयोजन किया। इस कैंप का आयोजन साउथ ईस्ट के जोनल डिप्टी कमिश्नर अंशुमान रथ के सौजन्य से किया गया। कोरोना के इस सेकंड वेव में उड़ीसा राज्य में हुए विध्वंस के समय में ट्रांसजेंडर कम्युनिटी ने आगे बढ़ कर फ्रंटलाइन वर्कर्स की बहुत मदद की थी और लोगों तक ज़रूरत की चीज़ें पहुंचाई थी।

कोरोना वेव में की थी ट्रांसजेंडर्स ने मदद


31 वर्षीया प्रिंसेस राउरकेला की पहली ट्रांसजेंडर फ्रंटलाइन वर्कर थी। इस बारे में उन्होंने बताया की वो लोगों की परेशानियां देख कर स्तब्ध थी और प्रशाशन के साथ मिलकर उनकी तकलीफ को दूर करना चाहती थी। प्रिंसेस कंप्यूटर एप्लीकेशन में डिप्लोमा होल्डर हैं और बीजू पटनायक यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी में बने कोविड सेंटर में एक डेटा ऑपरेटर के रूप में काम किया। इसके साथ ही उन्होंने वहां के नर्सेज और डॉक्टर्स के साथ काम करके लोगों तक राहत पहुंचाने में अपना योगदान दिया।
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