कौन हैं दिशा रवि? जल्द ही बंद हो सकता है इनके खिलाफ केस

कौन हैं दिशा रवि? जल्द ही बंद हो सकता है इनके खिलाफ केस कौन हैं दिशा रवि? जल्द ही बंद हो सकता है इनके खिलाफ केस

SheThePeople Team

26 Oct 2021

कौन हैं दिशा रवि? दिशा रवि एक एक्टिविस्ट हैं और यह किसानों से जुड़ी एक टूलकिट को लेकर न्यूज़ में आयी थी। इन पर आरोप थे कि जो टूलकिट लीक हुई थी ग्रेटा थनबर्ग के द्वारा वो इन्होंने ही एडिट की थी। यह बेंगलुरु की हैं। इनको दिल्ली पुलिस ने फरवरी में अरेस्ट कर लिया था और यह इंडिया में हो रहे फार्मर्स प्रोटेस्ट में मुख्या षड्यंत्रकारी थीं।

यह न्यूज़ अभी सामने आयी है कि हो सकता है इनके खिलाफ कोई भी चार्जशीट फाइल न की जाये और आखिर में यह केस बंद कर दिया जाए। रवि के ऊपर आरोप हैं कि इन्होंने देश द्रोह किया है और दुश्मनी फैलाने की कोशिश की है।

कौन हैं दिशा रवि?


दिशा “Fridays For Future India” आर्गेनाईजेशन की फाउंडिंग मेंबर हैं। ये मूवमेंट अगस्त 2018 में शुरू हुई थी। वो क्लाइमेट क्राइसिस के मुद्दे पर अक्सर आवाज़ उठाती हैं। इस ग्रुप में बहुत से कॉलेज स्टूडेंट्स और यंग वर्किंग प्रोफेशनल्स हैं जो क्लाइमेट क्राइसिस के मुद्दे पर आवाज़ उठाते हैं और लीडर्स को हल निकालने की डिमांड करते हैं। वो बहुत से यूथ क्लाइमेट एडिटोरिअल्स भी लिखती हैं। उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन माउंट कार्मेल कॉलेज से की। इस समय वे गुड मिल्क (Good Mylk) नाम की एक प्लांट बेस्ड फ़ूड कंपनी के साथ काम कर रही हैं।

किसानों के प्रदर्शन से जुड़ी ‘टूलकिट’ शेयर करने के मामले में गिरफ्तार की गई जलवायु कार्यकर्ता दिशा रवि (Disha Ravi) ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर करी है। उन्होंने याचिका में अनुरोध किया है कि पुलिस को उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी से जुड़ी जांच की कोई भी सामग्री मीडिया में लीक करने से रोका जाये।

दिशा रवि पर क्या आरोप हैं?


उन पर आरोप है कि उन्होंने उस टूलकिट को डिस्ट्रीब्यूट किया जो स्वीडिश एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग द्वारा लीड की जा रही थी। पुलिस को लगता है कि रवि इस टूलकिट प्लान का हिस्सा थी। दिशा पर आरोप है कि उस टूलकिट को दिशा ने भी एडिट किया था। दिशा ने कहा कि उन्होंने सिर्फ दो वाक्य एडिट करे थे।

3 फरवरी को क्लाइमेट चेंज एक्टिविस्ट ने “टूलकिट” को एक डॉक्यूमेंट के रूप में ट्वीट किया, जिसमें भारत सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के विरोध को समर्थन देने के बारे में जानकारी थी। वह कई ग्लोबल इकॉन्स में से एक थीं, जिन्होंने भारत के किसान विरोध पर बात की थी।

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