महिलाएँ LinkedIn पर अपने प्रोफाइल को “पुरुष जैसा” क्यों बदल रही हैं?

महिलाओं का कहना है कि LinkedIn पर पुरुषों जैसी भाषा और प्रोफाइल अपनाने से उनकी विज़िबिलिटी बढ़ती है, जिससे प्लैटफ़ॉर्म पर मौजूद जेंडर बायस और प्रोफेशनल नॉर्म्स को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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Rajveer Kaur
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LinkedIn पर कई महिलाओं का कहना है कि जब वे खुद को पारंपरिक रूप से “पुरुष-जैसे” तरीके से पेश करती हैं, तो उनकी पोस्ट को ज़्यादा लोगों तक पहुँच मिलती है। इस बहस ने तब ज़ोर पकड़ा जब मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल मेगन कॉर्निश का एक पोस्ट पिछले साल वायरल हुआ।

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महिलाएँ LinkedIn पर अपने प्रोफाइल को “पुरुष जैसा” क्यों बदल रही हैं? 

कॉर्निश का प्रयोग और नतीजे

कॉर्निश ने देखा कि उनकी पोस्ट की रीच लगातार घट रही थी। वजह समझने के लिए उन्होंने एक छोटा-सा प्रयोग किया। उन्होंने ChatGPT की मदद से अपनी LinkedIn प्रोफाइल की भाषा बदली—

जहाँ पहले “communicator” और “advocate” जैसे शब्द थे, वहाँ लीडरशिप और ग्रोथ पर केंद्रित, अधिक assertive शब्द इस्तेमाल किए गए।

एक हफ्ते के भीतर, कॉर्निश के अनुसार, उनकी पोस्ट की impressions चार गुना बढ़ गईं। उन्होंने अपने अनुभव को LinkedIn और बाद में Substack पर “LinkedIn Likes Me Better as a Man” शीर्षक से साझा किया।

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अन्य महिलाओं के प्रयोग

इसके बाद कई अन्य महिलाओं ने भी ऐसे ही प्रयोग शुरू किए। कुछ ने अपने नाम को ज़्यादा “masculine” बना लिया, कुछ ने pronouns हटा दिए या gender setting को male कर दिया। कई यूज़र्स ने reach में तेज़ बढ़ोतरी बताई, जबकि कुछ को कोई ख़ास फर्क नहीं दिखा।

जेंडर बायस और प्रोफेशनल स्पेस पर सवाल

इस ट्रेंड ने प्रोफेशनल स्पेस में जेंडर बायस और algorithm-based प्लेटफॉर्म्स की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई लोगों का मानना है कि पुरुषों से जुड़ी मानी जाने वाली बिज़नेस भाषा बेहतर प्रदर्शन करती है, भले ही कंटेंट वही क्यों न हो।

LinkedIn का जवाब

हालाँकि, LinkedIn ने इन दावों से इनकार किया है। कंपनी का कहना है कि उसके algorithms gender, race या age जैसी demographic जानकारी का इस्तेमाल नहीं करते। LinkedIn की Responsible AI हेड साक्षी जैन के अनुसार, gender setting बदलने से पोस्ट की visibility पर कोई असर नहीं पड़ता।

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विशेषज्ञों की राय

शैक्षणिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या सिर्फ एक प्लेटफॉर्म की नहीं, बल्कि वर्कप्लेस कल्चर की गहरी जड़ें दिखाती है।

यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया की प्रोफेसर एलिसन एलियस कहती हैं कि महिलाओं से जुड़ी भाषा को अक्सर प्रोफेशनल माहौल में कम आँका जाता है। वहीं, प्रोफेसर कैरोल कुलिक का कहना है कि assertive और traditionally masculine भाषा को ज़्यादा इनाम मिलता है, और ऐसे पैटर्न algorithms में भी झलक सकते हैं।

विफल और विविध परिणाम

सभी प्रयोग एक-जैसे नतीजे नहीं लाए। कैस कूपर, एक ब्लैक राइटर और inclusion strategist, ने बताया कि male प्रोफाइल अपनाने पर उनकी visibility घट गई—जो यह दिखाता है कि gender और race ऑनलाइन जटिल तरीकों से एक-दूसरे से जुड़ते हैं।

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कॉर्निश का निर्णय और आगे का सवाल

एक हफ्ते बाद, कॉर्निश ने अपनी प्रोफाइल वापस पहले जैसी कर ली। उनका कहना था कि experiment ने बात तो साबित कर दी, लेकिन वे visibility के लिए अपनी असली आवाज़ नहीं छोड़ना चाहतीं।

यह चर्चा अब एक बड़ा सवाल उठाती है

क्या महिलाओं को ऑनलाइन सफल होने के लिए पुराने प्रोफेशनल नॉर्म्स में खुद को ढालना पड़ेगा, या प्लेटफॉर्म्स को सभी आवाज़ों के लिए बराबर visibility सुनिश्चित करनी चाहिए?