सेचनोव फर्स्ट मॉस्को स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी (Sechenov First Moscow State Medical University) में वालंटियर्स पर दुनिया के पहले COVID-19 वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल्स पूरे हो चुके हैं। परीक्षणों के इस स्टेज का उद्देश्य ह्यूमन हेल्थ के लिए वैक्सीन की सुरक्षा का पता लगाना था। सेचनोव यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल पैरासिटोलॉजी, ट्रॉपिकल और वेक्टर-बॉर्न डिजीज के डायरेक्टर अलेक्जेंडर लुकाशेव ने कहा कि उन्होंने ट्रायल्स पूरा होने में सफलता हासिल की है।

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एएनआई के अनुसार “ट्रायल्स ने वैक्सीन की सेफ्टी कन्फर्म की। यह उन टीकों की सुरक्षा से मेल खाता है जो वर्तमान में बाजार में हैं, ”लुकाशेव ने कहा।

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गेमली इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी जो इस वैक्सीन पर काम कर रही है, हालांकि, अभी तक इसके कमर्शियल प्रोडक्शन के बारे में डिटेल्स का खुलासा नहीं किया है। विश्वविद्यालय ने कथित तौर पर 18 जून को वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल्स की शुरुआत की।

देश के स्वास्थ्य मंत्री ने 8 जुलाई को कहा था कि रूस में कथित तौर पर COVID-19 के लिए 17 टीकों पर काम चल रहा है।

इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसलेशनल मेडिसिन एंड बायोटेक्नोलॉजी के डायरेक्टर वादिम तरासोव ने बताया कि वालंटियर्स के पहले समूह को बुधवार को छुट्टी दे दी जाएगी। इसी तरह, दूसरे को 20 जुलाई को छुट्टी दे दी जाएगी। सेचेनोव विश्वविद्यालय ने 23 जून को COVID-19 वैक्सीन के लिए 20 स्वयंसेवकों के दूसरे समूह का टेस्ट किया।

विश्व की पहला COVID-19 वैक्सीन:

वैक्सीन के विकास के लिए डेवलपर्स आगे की योजना बना रहे हैं। योजनाओं में वायरस के साथ epidemiological सिचुएशन की कम्प्लेक्सिटी और प्रोडक्शन में वृद्धि की संभावना भी शामिल है।

“हमने इस वैक्सीन के साथ काम किया, जो प्रीक्लिनिकल स्टडीज और प्रोटोकॉल डेवलपमेंट के साथ शुरू हुआ। क्लीनिकल ट्रायल्स भी फिलहाल चल रहे हैं, “वादिम तरासोव, इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसलेशनल मेडिसिन एंड बायोटेक्नोलॉजी के डायरेक्टर ने कहा।

“महामारी की स्थिति में सेचेनोव विश्वविद्यालय ने न केवल एक एजुकेशन इंस्टिट्यूट के रूप में, बल्कि एक साइंटिफिक और टेक्नोलॉजिकल रिसर्च केंद्र के रूप में भी काम किया। इसलिए, यह ड्रग्स के जैसे इम्पोर्टेन्ट और काम्प्लेक्स प्रोडक्ट्स के निर्माण में भाग लेने में सक्षम है, ”तरासोव ने कहा।

वैक्सीन ट्रायल्स:

टीका परीक्षणों में, पहले चरण में आमतौर पर लोगों का एक छोटा ग्रुप होता है। इसका उद्देश्य मनुष्यों के लिए वैक्सीन की सुरक्षा का ट्रायल करना है। इसके अलावा, बाद के चरणों का ट्रायल यह पता करता है कि क्या टीका बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन के लिए सुरक्षित है।

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