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Women's Health: आज भी महिलाओं को अपनी सेहत के बारे में अवेयरनेस की कमी क्यों?

जब औरतों की सेहत की बात आती है तब कोई भी इस पर ध्यान नहीं देता है ना ही इसके बारे में खुलकर बात की जाती है। महिलाओं की सेहत को लेकर बहुत सारी टैबू हैं। उनकी रिप्रोडक्टिव और सेक्सुअल हेल्थ के बारे में अवेयरनेस की कमी बहुत ज्यादा है।

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Rajveer Kaur
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Cervical Cancer

Women's Health: जब औरतों की सेहत की बात आती है तब कोई भी इस पर ध्यान नहीं देता है ना ही इसके बारे में खुलकर बात की जाती है। महिलाओं की सेहत को लेकर बहुत सारी टैबू हैं। उनकी रिप्रोडक्टिव और सेक्सुअल हेल्थ के बारे में अवेयरनेस की कमी बहुत ज्यादा है। अभी एक टॉपिक सुर्खियों में बना हुआ है, सर्वाइकल कैंसर जो कि भारत में दूसरा सबसे बड़ा महिलाओं में मौत का कारण है। मिजोरम में महिलाओं में यह काफी आम है। ऐसे में महिलाओं को उसके बारे में अवेयरनेस ही नहीं है क्योंकि इसके बारे कोई कुछ बोलता नहीं है। 

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आज भी महिलाओं को अपनी सेहत के बारे में अवेयरनेस की कमी क्यों?

पति से भी बात नहीं करती

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ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी भी महिलाएं हैं जो अपने पतियों से बात नहीं करती है हालांकि पति उनके सबसे करीबी रिश्तों में से एक है। इनके साथ वह हर एक बात शेयर कर सकती हैं लेकिन पतियों का अपनी पत्नियों की सेहत पर इतना ध्यान ही नहीं होता है। जिस कारण वह कई बार अपने अंदर छुपी बीमारियों को भी बताती नहीं और सहन करती रहती हैं। 

भारत में, सर्वाइकल कैंसर  का कैंसर 18.3% (123,907 मामले) की घटना दर के साथ तीसरा सबसे आम कैंसर है और GLOBOCAN 2020 के अनुसार 9.1% की मृत्यु दर के साथ मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण है।

महिलाओं की हेल्थ नहीं है प्रायोरिटी, अभी है टैबू टॉपिक

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अगर हम चाहते हैं कि महिलाओं की हेल्थ से जुड़ी टैबू खत्म हो जाए हमें पीरियड, सेक्स, मेनोपॉज  और प्रेगनेंसी जैसे टॉपिक को बहुत ज्यादा आम करना होगा कि यह नॉर्मलाइज है। कोई भी किसी के सामने भी इसके बारे में बात कर सकता है। घर में जब किसी महिला रिप्रोडक्टिव हेल्थ में इशू आते हैं, वह किसी से बात ही नहीं करती हैं। उन्हें बताया जाता है कि यह सब बातें खुले में नहीं करनी है। मां को भी इतनी जानकारी नहीं होती है। 

डॉक्टर भी करते हैं जज

महिला को जज किया जाता है। कई बार इसके डर से भी महिलाएं डॉक्टर से जाने से घबराती हैं। डॉक्टर कई बार इतने व्यक्तिगत सवाल पूछ जाते हैं जिनका इलाज से कोई लेना देना नहीं होता है। इसलिए हमें एक ऐसा सहज माहौल स्थापित करना होगा कि महिलाएं बात करने से शरमाए मत। इसके लिए हमें अवेयरनेस, कम्यूनिटी ग्रुप और सोशल मीडिया जैसे प्लेटफार्म पर इसके बारे में ज्यादा बात करनी होगी। सोशल मीडिया पर कुछ महिला कंटेंट क्रिएटर हैं लेकिन इनकी संख्या  अभी बहुत कम है। 

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