Choice vs Tradition: शादी के बाद Surname बदलने का दबाव सिर्फ महिला पर ही क्यों?

शादी के बाद लड़की का सरनेम बदलना है या नहीं, यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर कई दुल्हनें विचार करती हैं। कुछ लड़कियों के लिए यह एक आसान फैसला होता है, लेकिन दूसरों के लिए यह उनकी पहचान और वे खुद को कैसे देखती हैं, इस पर निर्भर करता है।

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Tamanna Soni
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Is the problem the marriage or the compromises that always demanded from the girl

Photograph: (iStock)

शादी के बाद लड़की का सरनेम बदलना है या नहीं, यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर कई दुल्हनें विचार करती हैं। कुछ लड़कियों के लिए यह एक आसान फैसला होता है, लेकिन दूसरों के लिए यह उनकी पहचान और वे खुद को कैसे देखती हैं, इस पर निर्भर करता है।

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Choice vs Tradition: शादी के बाद Surname बदलने का दबाव सिर्फ महिला पर ही क्यों?

परंपरा का दबाव

हमारे समाज में शादी के बाद पत्नी का पति के surname को अपनाना एक पुरानी परंपरा है। माना जाता है कि ये नई शुरुआत की निशानी है और दोनों परिवारों के जुड़ने का प्रतीक। ससुराल वाले अक्सर इसे इज्जत और रिश्ते को मान देने का तरीका समझते हैं।
बहुत सी लड़कियां बताती हैं कि शादी के बाद उन पर surname बदलने का सीधा या घुमा-फिरा कर दबाव डाला गया। "बहू बन गई हो, अब हमारे घर की हो" - ऐसी बातें सुनने को मिलती हैं। कुछ घरों में तो surname न बदलने को परिवार में adjust न करने की निशानी माना जाता है।

अपनी पहचान का सवाल

लेकिन आज की लड़कियों के लिए ये सिर्फ नाम का मामला नहीं है। उनका surname उनकी पहचान है, उनकी उपलब्धियों से जुड़ा है। जो लड़कियां अपने करियर में नाम कमा चुकी हैं, उनके लिए surname बदलना professional और personal दोनों तरह से मुश्किल हो सकता है।

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कई महिलाएं कहती हैं कि उन्होंने अपने नाम से पढ़ाई की, नौकरी पाई, achievements हासिल कीं। अब surname बदलने से वो अपनी पुरानी पहचान खो देने का डर महसूस करती हैं। सभी documents बदलना, social media profiles अपडेट करना - ये सब भी एक बड़ी झंझट है।

बदलता नज़रिया

अच्छी बात ये है कि धीरे-धीरे सोच बदल रही है। कुछ couples मिलकर फैसला ले रहे हैं। कुछ लड़कियां अपना और पति दोनों का surname जोड़कर रखती हैं। कुछ अपना पुराना surname ही रखना चुनती हैं, और उनके पति भी इसे समझते और सपोर्ट करते हैं।
कानूनी तौर पर भी कोई जरूरी नहीं कि शादी के बाद surname बदलना ही पड़े। ये पूरी तरह से एक personal choice है।
क्या है सही?

असल में "सही" क्या है, ये हर किसी के लिए अलग हो सकता है। जरूरी ये है कि फैसला खुद का हो, दबाव में लिया गया न हो। कुछ औरतों के लिए पति का surname लेना प्यार और commitment दिखाने का तरीका है, और इसमें कुछ गलत नहीं।
लेकिन अगर कोई अपना surname रखना चाहती है, तो वो भी उतना ही valid choice है। ये फैसला रिश्ते के प्यार या सम्मान को कम नहीं करता।

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शादी दो लोगों का मिलन है, दो पहचानों को मिटाने का सौदा नहीं। Surname बदलना हो या न बदलना - ये फैसला couple को मिलकर, बिना किसी दबाव के लेना चाहिए। परिवार वालों को भी समझना चाहिए कि प्यार और respect का रिश्ता surname से नहीं, आपसी समझ और इज्जत से बनता है। आखिर में, जो भी फैसला हो - वो औरत की अपनी मर्जी से होना चाहिए। क्योंकि नाम सिर्फ एक शब्द नहीं, पहचान है।

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