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Marriage Truth: शादी के बाद हर रिश्ते में बदलाव क्यों आता है?

शादी जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ होता है, जो न केवल दो व्यक्तियों को बल्कि उनके परिवारों को भी आपस में जोड़ता है। यह नया सफर नई जिम्मेदारियों, उम्मीदों और भावनाओं के साथ आता है।

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Priya Singh
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Why does every relationship change after marriage? शादी जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ होता है, जो न केवल दो व्यक्तियों को बल्कि उनके परिवारों को भी आपस में जोड़ता है। यह नया सफर नई जिम्मेदारियों, उम्मीदों और भावनाओं के साथ आता है। शादी के बाद पति-पत्नी के साथ-साथ उनके अन्य रिश्तों में भी बदलाव आते हैं। कुछ रिश्ते मजबूत होते हैं, तो कुछ में दूरियां आ सकती हैं। तो आइये जानते हैं कि शादी के बाद रिश्तों में बदलाव क्यों आ जाता है? 

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शादी के बाद रिश्तों में बदलाव के कारण

नई जिम्मेदारियां और प्राथमिकताएं

शादी के बाद व्यक्ति की जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं। जहां पहले माता-पिता, भाई-बहन और दोस्त प्राथमिकता में होते थे, अब जीवनसाथी और परिवार की जिम्मेदारियां पहली प्राथमिकता बन जाती हैं। इस बदलाव से पुराने रिश्तों में कभी-कभी दूरी महसूस होने लगती है।

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समय में बदलाव

शादी से पहले व्यक्ति अपने दोस्तों और परिवार को जितना समय देता था, शादी के बाद वह समय बंट जाता है। नए रिश्ते निभाने और घर-गृहस्थी की जिम्मेदारियों के कारण पुराने रिश्तों को उतना समय नहीं दे पाना भी बदलाव का एक प्रमुख कारण होता है।

रिश्तों की परिभाषा में बदलाव

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शादी के बाद व्यक्ति का दृष्टिकोण बदल जाता है। बचपन से जुड़े रिश्तों की परिभाषा थोड़ी बदलने लगती है, क्योंकि अब व्यक्ति नए जीवनसाथी के साथ एक अलग संसार बसा रहा होता है। इससे पहले के करीबी रिश्तों में बदलाव आ सकता है।

परिवारों की अपेक्षाएं

शादी के बाद दोनों पक्षों के परिवारों की अपेक्षाएं बढ़ जाती हैं। कभी-कभी ये अपेक्षाएं व्यक्ति के लिए मानसिक दबाव का कारण बन सकती हैं, जिससे रिश्तों में खटास आ सकती है। खासतौर पर बहू और दामाद से पारिवारिक परंपराओं को निभाने की अपेक्षा की जाती है, जिससे वे अपने माता-पिता और पुराने दोस्तों को उतना समय नहीं दे पाते।

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स्वतंत्रता और निजी जीवन

शादी के बाद व्यक्ति का स्वतंत्र जीवन थोड़ा सीमित हो जाता है। वह अब अकेले कोई निर्णय नहीं ले सकता, बल्कि हर फैसला जीवनसाथी के साथ विचार-विमर्श कर लेना पड़ता है। यह बदलाव कभी-कभी पुराने रिश्तों को प्रभावित कर सकता है।

शादी के बाद रिश्तों में बदलाव आना स्वाभाविक है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि यह बदलाव नकारात्मक हो। सही समझ, बातचीत और संतुलन से हर रिश्ता पहले से भी अधिक मजबूत हो सकता है। इसलिए, शादी के बाद भी पुराने रिश्तों को सहेजना और नए रिश्तों को समझदारी से निभाना सुखद हो सकता है।

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