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Photograph: Via (Wikipedia)
शतरंज की दुनिया में नोना गाप्रिंदाशविली का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा है। जॉर्जिया की इस महान खिलाड़ी ने 1978 में इतिहास रचते हुए दुनिया की पहली महिला ग्रैंडमास्टर बनने का गौरव हासिल किया। लेकिन 2020 में नेटफ्लिक्स की एक लोकप्रिय सीरीज ने उनकी इज्जत पर सवाल खड़े कर दिए, जिसके बाद उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
नोना गाप्रिंदाशविली: दुनिया की पहली महिला शतरंज ग्रैंडमास्टर ने नेटफ्लिक्स पर क्यों किया मुकदमा
विवाद की शुरुआत
Netflix की सुपरहिट सीरीज "द क्वीन्स गैम्बिट" 2020 में रिलीज़ हुई। यह सीरीज शतरंज की एक काल्पनिक महिला खिलाड़ी बेथ हार्मन की कहानी बताती है। सीरीज के आखिरी एपिसोड में एक लाइन आई जिसने नोना को गहरा धक्का दिया। सीरीज में कहा गया कि नोना गाप्रिंदाशविली ने "कभी भी पुरुष खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं की।"
यह बात बिल्कुल गलत थी। असलियत में, नोना ने अपने करियर में दर्जनों पुरुष खिलाड़ियों को हराया था। उन्होंने साठ और सत्तर के दशक में कई अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में पुरुषों के खिलाफ खेला और जीत हासिल की। सीरीज में दिखाए गए 1968 के आसपास, नोना पहले से ही विश्व महिला शतरंज चैंपियन थीं और पुरुष खिलाड़ियों के साथ नियमित रूप से प्रतिस्पर्धा कर रही थीं।
मुकदमे की मांग
सितंबर 2021 में, तब 80 साल की नोना ने नेटफ्लिक्स के खिलाफ पांच मिलियन डॉलर के मुकदमे की घोषणा की। उनके वकीलों ने कहा कि यह गलत बयान उनकी उपलब्धियों और विरासत को नुकसान पहुंचाता है। नोना ने कहा कि नेटफ्लिक्स ने उनकी जिंदगी भर की मेहनत और संघर्ष को झुठलाया है।
नोना का कहना था कि उस समय जब महिलाओं के लिए शतरंज में आगे बढ़ना बेहद मुश्किल था, उन्होंने हर बाधा को पार किया। उन्होंने सोवियत संघ के दौर में, जब महिलाओं को कम आंका जाता था, अपनी प्रतिभा से सबको चौंकाया। उनकी कहानी खुद किसी फिल्म से कम नहीं है।
कानूनी लड़ाई की अहमियत
नोना के वकीलों ने तर्क दिया कि नेटफ्लिक्स ने बिना किसी सबूत के एक गलत बयान दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की गलती से दर्शकों को यह गलत संदेश जाता है कि महिला शतरंज खिलाड़ी पुरुषों के मुकाबले कमजोर होती हैं। यह सिर्फ नोना का अपमान नहीं था, बल्कि सभी महिला खिलाड़ियों की मेहनत को नकारना था।
नोना ने अपने बयान में कहा कि वह पैसे के लिए नहीं, बल्कि सच्चाई के लिए लड़ रही हैं। उन्होंने कहा कि युवा लड़कियों को यह जानना चाहिए कि महिलाएं हमेशा से पुरुषों के साथ बराबरी पर खेलती आई हैं। उनकी उपलब्धियां छुपाई नहीं जा सकतीं।
नतीजा और सबक
2022 में दोनों पक्षों ने अदालत के बाहर समझौता कर लिया। हालांकि समझौते की शर्तें गोपनीय रखी गईं, लेकिन यह नोना की जीत थी। यह मामला याद दिलाता है कि मीडिया की जिम्मेदारी कितनी बड़ी है और वास्तविक लोगों के बारे में लिखते समय तथ्यों की जांच जरूरी है। नोना आज भी शतरंज की दुनिया में सम्मानित हैं और उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।
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