COVID-19 तीसरी लहर – भारत के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि देश में कोरोना वायरस इंफेक्शन के फैलाव को देखकर इसकी तीसरी लहर अपरिहार्य है। यह तीसरी लहर कब आएगी और कितने समय तक रहेगी, इसका अभी से पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता परंतु फिर भी देश को इसके लिए अग्रिम रूप से तैयार रहना होगा।

के विजय राघवन, जो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान साइंटिफिक सलाहकार हैं, उन्होंने कहा कि तीसरी लहर में सबसे बड़ी चुनौती होगी कि वायरस के ऐसे प्रकार को ढूंढ़ पाना जो वैक्सीन से बचने की क्षमता रखता है और इस आधार पर टीकाकरण रणनीति में बदलाव।

COVID-19 तीसरी लहर के बारे में अधिक जानकारी

• भारत में कोरोना वायरस के कई प्रकार (वेरिएंट) फिलहाल मौजूद हैं परंतु उनमें से सबसे ज्यादा खतरनाक वेरिएंट है डबल म्युटेंट वायरस जिसका नाम साइंटिस्ट्स ने B.1.617 रखा है।
कई अन्य वेरियंट्स की भी भारत के अलग-अलग राज्यों में पहचान की गई है, जिनमें से आंध्र प्रदेश में पाया गया वेरिएंट सबसे ज्यादा चर्चा में है। हालांकि, वह कुछ ही क्षेत्रों तक सीमित है।

• वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के अनुसार, मौजूदा वेरिएंट्स अभी कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन को पैदा कर रहे हैं, जो कि आगामी समय में अलग-अलग आकर लेकर लोगों पर हमला करेगा। इन्हीं वेरिएंट्स के कारण, जिन की संख्या बढ़ती जा रही है, देश में कोविड की तीसरी लहर जल्द आ सकती है।

• जो समय वायरस फेफड़ों को खत्म करने में लेता है, वह हर लहर के साथ घटता ही जा रहा है। पहली लहर में, वह 10 दिन के भीतर फेफड़ों को खत्म कर देता था, जो कि दूसरी लहर तक 5 से 7 दिन हो गया है। इस बार यह माना जा रहा है कि इस विश्वव्यापी बीमारी की तीसरी लहर में यह केवल 2 से 3 दिन तक का समय लेगा।

• आंध्र प्रदेश में पाया गया वायरस भी कुछ इसी प्रकार से काम कर रहा है। कोविड-19 का यह प्रकार व्यक्ति के फेफड़ों को 2 से 3 दिनों के अंदर खत्म कर देता है और यह दूसरे वेरिएंट्स के मुकाबले 15 गुना ज्यादा संक्रामक है।

• कोरोना वायरस की पहली और दूसरी लहर में वायरस केवल बुजुर्ग और युवा को ही अपनी चपेट में ले रहा था परंतु अब कहा जा रहा है कि तीसरी लहर बच्चों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है।

• 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की जनसंख्या भारत में करीब 30% है और अभी तक 18 से कम उम्र के बच्चों को वैक्सीन लगाना नहीं शुरू किया गया है।

• यह अनुमान लगाया जा रहा है कि यदि 18 से ऊपर की उम्र के लोगों का पूरी तरह से वैक्सीनेशन हो जाए, तो वायरस 18 से कम उम्र के बच्चों पर हमला पहले करेगा जिससे उन्हें नुकसान पहुंच सकता है। यह ज्यादातर 6 से 12 वर्ष की उम्र के बच्चों के लिए कहा जा रहा है।

• वायरस का वह प्रकार जो मौजूदा वैक्सीन से बचने की क्षमता रखता है, उसे हराने के लिए, वैक्सीन को अपडेट करने के साथ-साथ सक्रिय निगरानी की भी आवश्यकता है।

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