Sanju Pal की सात साल की कानूनी लड़ाई बदल सकती है Endometriosis से पीड़ित महिलाओं के कार्यस्थल अधिकार

भारतीय मूल की संजू पाल का केस अब बन सकता है मिसाल। एंडोमेट्रियोसिस सर्जरी के बाद Accenture ने निकाला था, लेकिन उनकी जीत से अब कंपनियां होंगी जवाबदेह। महिला स्वास्थ्य के लिए बड़ी जीत।

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Tamanna Soni
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Photograph: (Via (NDTV))

संजू पाल की ज़िन्दगी एक सफल कहानी थी। लंदन की बड़ी कंपनी Accenture में मैनेजमेंट कंसल्टेंट, एशियन वुमन ऑफ अचीवमेंट अवॉर्ड विजेता, क्वीन एलिज़ाबेथ से मुलाकात, और अपने चैरिटी काम के लिए 10 डाउनिंग स्ट्रीट तक का निमंत्रण। लेकिन 2019 में, एक सर्जरी के बाद सब कुछ बदल गया।

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एंडोमेट्रियोसिस की सर्जरी के बाद नौकरी से निकाली गईं, अब भारतीय मूल की महिला लड़ रहीं विकलांगता अधिकारों की लड़ाई

क्या हुआ संजू के साथ?

संजू को एंडोमेट्रियोसिस थी - एक ऐसी बीमारी जो UK में हर 10 में से 1 महिला को होती है। इसमें गर्भाशय जैसे टिशू शरीर के दूसरे हिस्सों में बढ़ने लगते हैं, जिससे भयंकर दर्द होता है। 2018 में उन्हें पता चला कि उनकी हालत गंभीर है - Stage 3 एंडोमेट्रियोसिस, एक अंडाशय पर 7.5 सेंटीमीटर की सिस्ट और दूसरे पर भी।

डॉक्टरों ने तुरंत सर्जरी की सलाह दी। संजू ने एक महीने की छुट्टी ली, ऑपरेशन करवाया और वापस काम पर लौट आईं। लेकिन दरअसल, वो इतनी जल्दी वापस आने लायक नहीं थीं। अभी भी ब्लीडिंग थी, कमज़ोरी थी, कभी-कभी चल भी नहीं पाती थीं। लेकिन वो हार मानने वाली नहीं थीं - प्रमोशन करीब था, और उन्होंने सालों मेहनत की थी।

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वो HR को अपडेट देती रहीं, दर्द सहकर काम करती रहीं। फिर छह महीने की रिव्यू आई, और झटका लगा - उन्हें बताया गया कि वो अपने टारगेट पूरे नहीं कर पाईं। कुछ ही समय बाद, उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। तुरंत बिल्डिंग छोड़ने को कहा गया, सहकर्मियों से बात करने की मनाही कर दी गई।

लगभग दस साल की मेहनत, एक झटके में खत्म। और उनकी प्राइवेट मेडिकल इंश्योरेंस भी चली गई - ठीक उस वक्त जब इलाज की सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी।

"मैं कुछ नहीं रह गई," उन्होंने BBC को बताया। "मैं खुद को किसी को बता भी नहीं पाई। मैं शर्मिंदा थी।"

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कोर्ट में लड़ाई

संजू ने हार नहीं मानी। पहले कंपनी में अपील की - खारिज हो गई। फिर 2022 में एम्प्लॉयमेंट ट्रिब्यूनल में केस लड़ा। ट्रिब्यूनल ने माना कि उनकी बर्खास्तगी गलत थी, लेकिन मुआवज़ा नहीं दिया।

संजू ने फिर अपील की।

और जनवरी 2026 में बड़ा फैसला आया। Employment Appeal Tribunal ने कहा कि पहली ट्रिब्यूनल ने एंडोमेट्रियोसिस को विकलांगता के रूप में नहीं माना था, और विकलांगता भेदभाव पर ठीक से विचार नहीं किया था।

यह फैसला सिर्फ संजू के लिए नहीं - हज़ारों महिलाओं के लिए अहम है। अब UK के Equality Act 2010 के तहत एंडोमेट्रियोसिस को विकलांगता माना जा सकता है, और कंपनियों को इस बीमारी से जूझ रही महिलाओं के लिए काम में बदलाव करने पड़ सकते हैं।

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अब क्या कर रहीं हैं संजू?

सात साल की लड़ाई ने संजू को बदल दिया है। कॉर्पोरेट करियर धीमा पड़ गया, लेकिन उनकी आवाज़ और मज़बूत हुई है।

वो अपनी चैरिटी RISE चलाती हैं, जो भारत के ग्रामीण इलाकों के युवाओं को लंदन के स्टूडेंट्स से जोड़ती है। वो West London Sinfonia के साथ वायलिन बजाती हैं। उनका पॉडकास्ट है। और अब वो एंडोमेट्रियोसिस और ऑफिस में भेदभाव के बारे में खुलकर बोलती हैं।

"मुझे इतने सारे मेसेज आते हैं महिलाओं से जो इस बारे में बात करने से डरती थीं," वो कहती हैं। "अब उन्हें लगता है कि वो बोल सकती हैं।"

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संजू के लिए ये लड़ाई सिर्फ नौकरी वापस पाने की नहीं थी। ये visibility की लड़ाई थी - इस बीमारी के बारे में खुलकर बात करने की, शर्म तोड़ने की।

और अब जब चुप्पी टूट रही है, तो संजू कहती हैं - ये लड़ाई इसलिए लड़ी गई थी।

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