हम सुबह उठते हैं तो खुद को थका-हारा महसूस करते हैं और कॉफी को अपनी लाइफलाइन बना लेते हैं। हेयरब्रश में टूटे हुए बाल देखते हैं और दोष शैम्पू को दे देते हैं। लेकिन अक्सर ये कोई रैंडम संकेत नहीं होते। ये हमारे शरीर का यह बताने का तरीका होते हैं कि कहीं अंदर आयरन की कमी तो नहीं। रिसर्चेस के अनुसार, भारत की हर 2 में से 1 महिला आयरन की कमी से जूझ रही है। दुनिया में एनीमिया के कुल मामलों में से लगभग 40% अकेले भारत में हैं। 15–49 वर्ष की उम्र की आधे से ज़्यादा भारतीय महिलाएँ एनीमिक हैं और करीब 59% किशोरियों में आयरन का स्तर कम पाया जाता है।
स्वादिष्ट तरीके से आयरन सपोर्ट: Livogen Iron Gummies पर न्यूट्रिशनिस्ट की राय
फिर भी यह साइलेंट एपिडेमिक अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाती है। आयरन की कमी भारतीय महिलाओं में सबसे आम पोषण संबंधी कमी है, लेकिन ज़्यादातर महिलाएँ इसके शुरुआती संकेतजैसे लगातार थकान, बालों का झड़ना, त्वचा का पीला पड़ना, नाखूनों का कमज़ोर होना - को पहचान ही नहीं पातीं।
आयरन क्यों ज़रूरी है? न्यूट्रिशनिस्ट चितवन गर्ग की राय
द शैलि चोपड़ा शो के हालिया एपिसोड में, Livogen (Procter & Gamble Health Limited की भारत की #1 डॉक्टर-रिकमेंडेड आयरन सप्लीमेंट ब्रांड) के साथ सहयोग में, न्यूट्रिशनिस्ट चितवन गर्ग ने बताया कि आयरन की कमी इतनी आम क्यों है और महिलाएँ इसके लिए क्या कर सकती हैं।
शो की होस्ट और SheThePeople की फाउंडर शैलि चोपड़ा से बातचीत में उन्होंने साझा किया कि रोज़मर्रा की छोटी आदतें जैसे Livogen Iron Gummies को अपनी दिनचर्या में शामिल करना कैसे मदद कर सकता है।
मुझे कैसे पता चले कि मुझे आयरन की कमी है?
चितवन गर्ग ने बताया कि आयरन की कमी हमारे जीवन को कैसे प्रभावित करती है जैसे थकान, हेयर फॉल, नाखूनों का टूटना, मूड स्विंग्स जैसे लक्षण इसके संकेत हो सकते हैं। हम अक्सर तुरंत राहत के लिए चाय-कॉफी या इलेक्ट्रोलाइट्स ले लेते हैं, लेकिन यह असली समस्या को छुपा देता है।
“ज़्यादातर महिलाएँ सुबह थकी हुई इसलिए नहीं उठतीं क्योंकि उन्होंने कम नींद ली है या बहुत तनाव है, बल्कि इसलिए क्योंकि उनके शरीर में आयरन की कमी है,” उन्होंने कहा।
“आयरन हमारे शरीर का ईंधन है—यह कोशिकाओं तक ऑक्सीजन पहुँचाता है। जब आयरन कम होता है, तो शरीर थकान के ज़रिए मदद की गुहार लगाता है।
उन्होंने यह भी बताया कि **चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग्स और ब्रेन फॉग** आयरन की कमी के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
गर्ग ने बताया, "कई महिलाएँ बालों के झड़ने का कारण तनाव या शैम्पू को मानती हैं, लेकिन कम आयरन को शायद ही कभी वजह मानती हैं”। उन्होंने यह भी समझाया कि आयरन की कमी महिलाओं के **ओव्यूलेशन, पीरियड्स और फर्टिलिटी** को भी प्रभावित कर सकती है।
आयरन की कमी का भावनात्मक असर
शैलि चोपड़ा ने बताया कि कम आयरन सिर्फ थकान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और आत्मविश्वास पर भी असर डालता है।
चोपड़ा ने कहा, “आयरन की कमी सिर्फ हमारे शरीर को नहीं, बल्कि हमारी भावनाओं, रिश्तों और खुद को देखने के नज़रिए को भी प्रभावित करती है”।
इस पर सहमति जताते हुए गर्ग ने कहा, “जब आप लगातार थके रहते हैं, चिड़चिड़े होते हैं और हेयर फॉल या फीकी त्वचा से जूझते हैं, तो आपका आत्मविश्वास भी गिरता है। आप खुद को अपने बेस्ट फॉर्म में महसूस नहीं करते।”
महिलाओं में आयरन की कमी ज़्यादा क्यों होती है?
आयरन की कमी महिलाओं में ज़्यादा आम है क्योंकि शरीर की प्राकृतिक प्रक्रियाएँ इसमें भूमिका निभाती हैं।
गर्ग ने समझाया, “मासिक धर्म के दौरान खून की कमी होती है। प्रेग्नेंसी और PCOS या एंडोमेट्रियोसिस जैसी हार्मोनल स्थितियाँ आयरन की ज़रूरत और बढ़ा देती हैं। ऊपर से बिज़ी लाइफस्टाइल, तनाव और मल्टी-टास्किंग—ये सब महिलाओं को ज़्यादा संवेदनशील बना देते हैं।”
उन्होंने महिलाओं को जल्दी सतर्क होने की सलाह दी, “कम उम्र से शुरुआत करें टीन्स या 20s में आयरन रिज़र्व बनाना सबसे अच्छा समय है। 30s में नियमित रूप से लेवल मॉनिटर करना ज़रूरी हो जाता है, खासकर पेरिमेनोपॉज़ और मेनोपॉज़ की तैयारी के लिए।”
अगर आयरन की कमी है तो क्या करें?
चितवन गर्ग ने आयरन की कमी को मैनेज और रिवर्स करने के लिए कुछ आसान कदम बताए:
- आयरन-रिच फूड खाएँ: पालक, दालें, गुड़, और मांस
- विटामिन C के साथ लें: इससे आयरन का अवशोषण बढ़ता है
“अगर आप दाल खा रहे हैं तो उसमें नींबू निचोड़ें। पालक में टमाटर डालें,” उन्होंने सलाह दी। हालाँकि, उन्होंने यह भी बताया कि सिर्फ डाइट काफी नहीं होती, “सच यह है कि औसत भारतीय डाइट महिलाओं की रोज़ की आयरन ज़रूरत का सिर्फ 50% ही पूरा कर पाती है। इसलिए सप्लीमेंट्स की ज़रूरत पड़ती है। लेकिन महिलाएँ बिज़ी लाइफस्टाइल के कारण गोलियाँ लेना भूल जाती हैं। हाल ही में मैंने Livogen Iron Gummies देखे और मुझे लगता है कि यह एक बेहतरीन समाधान है।”
Livogen Iron Gummies क्यों हैं एक स्मार्ट विकल्प?
गर्ग ने आगे बताया, "Livogen Iron Gummies चबाने में आसान हैं और स्वादिष्ट स्ट्रॉबेरी फ्लेवर में आते हैं। रोज़ सिर्फ 2 गमीज़ से उतना आयरन मिलता है जितना दो कटोरी पालक से। इनमें मेटैलिक स्वाद नहीं होता और न ही ये पेट में तकलीफ़ पैदा करते हैं जैसा कि कुछ पारंपरिक आयरन सप्लीमेंट्स करते हैं।
Advanced Micronized Technology से बने ये गमीज़ पारंपरिक आयरन सॉल्ट्स की तुलना में 3X बेहतर आयरन एब्ज़ॉर्प्शन के लिए जानी जाती हैं इन विट्रो स्टडी में Ferrous sulphate के औसत आयरन एब्ज़ॉर्प्शन की तुलना में।
रोज़ाना आयरन सप्लीमेंटेशन से हेल्दी हेयर स्किन और आयरन रिज़र्व बनाए रखने में मदद मिलती है। और क्योंकि ये एक ट्रीट की तरह लगते हैं Livogen Iron Gummies आयरन लेना आसान और आनंददायक बना देते हैं।
आयरन और बालों के स्वास्थ्य का संबंध
जब शैलि चोपड़ा ने पूछा कि आयरन बालों को कैसे प्रभावित करता है तो गर्ग ने समझाया - बालों के फॉलिकल्स को बढ़ने के लिए ऑक्सीजन चाहिए। जब आयरन कम होता है तो सबसे अच्छे शैम्पू या हेयर स्पा भी काम नहीं करते। ऐसे में Livogen Iron Gummies शरीर में आयरन लेवल सपोर्ट करने में मदद कर सकते हैं।
महिलाओं के लिए आख़िरी संदेश
इंटरव्यू के अंत में चितवन गर्ग ने सभी महिलाओं को याद दिलाया, हमेशा थका रहना बालों का झड़ना या एनर्जी की कमी यह नॉर्मल नहीं है। यह आपके शरीर का मदद माँगने का तरीका है। बेहतर खाएँ अपने आयरन लेवल चेक करें और हर दिन छोटे कदम उठाएँ। 3 से 6 महीने तक Livogen Iron Gummies को अपनी रूटीन में शामिल करें ताकि आयरन लेवल को सपोर्ट मिल सके।
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