"मैं मेनोपॉज़ में हूँ, तो क्या हुआ?": Genelia Deshmukh ने उम्र को लेकर बनी सोच को तोड़ा

एक्ट्रेस जेनेलिया देशमुख ने 'द शैली चोपड़ा शो' के एक एपिसोड में उन्होंने परिवार, मदरहूड, बढ़ती उम्र, मेनोपॉज़ और कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी।

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Rajveer Kaur
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हाल ही में आए 'द शैली चोपड़ा शो' के एक एपिसोड में एक्ट्रेस जेनेलिया देशमुख ने शेली चोपड़ा (SheThePeople और Gytree की फाउंडर) से खुलकर बातचीत की। इस बातचीत में उन्होंने परिवार, मदरहूड, बढ़ती उम्र, मेनोपॉज़ और कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी।

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"मैं मेनोपॉज़ में हूँ, तो क्या हुआ?": जेनेलिया देशमुख ने उम्र को लेकर बनी सोच को तोड़ा

शैली चोपड़ा और जेनेलिया देशमुख की मेनोपॉज़ पर बातचीत

एक्ट्रेस जेनेलिया देशमुख ने मेनोपॉज़ को महिलाओं के जीवन का एक सामान्य और जरूरी हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि जिस तरह प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर और हॉर्मोन में बदलाव होते हैं, वैसे ही मेनोपॉज़ के समय भी होता है। इसलिए इस पर खुलकर बात करना बहुत ज़रूरी है। उन्होंने कहा, “ये एक अहम बातचीत है। इसमें शरीर में वैसे ही बदलाव होते हैं जैसे प्रेग्नेंसी के समय होते थे। ये ज़िंदगी का अगला पड़ाव है।”

डॉ. नोज़र शेरियार से प्रेरित होकर जेनेलिया ने बताया कि मेनोपॉज़ को संतुलित खानपान और ज़रूरत हो तो दवाओं से संभालना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आजकल लोग बालों के एक्सटेंशन या नकली पलकों जैसे कॉस्मेटिक चीज़ें तो आराम से इस्तेमाल कर लेते हैं, लेकिन सेहत के लिए जरूरी सप्लीमेंट लेने में हिचकते हैं जो कि हैरानी की बात है।

मेनोपॉज़ और सप्लीमेंट्स को लेकर जेनेलिया और शैली की बातें

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जेनेलिया देशमुख के अनुसार, आज की बदलती जीवनशैली में सप्लीमेंट्स लेना ज़रूरी हो गया है चाहे कोई वेजिटेरियन हो या नॉन-वेजिटेरियन। उन्होंने कहा कि शरीर की ज़रूरतें पूरी करने के लिए सप्लीमेंट्स को अपनाना गलत नहीं है।

शैली चोपड़ा ने भी इस बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि भारत जैसे धूप वाले देश में भी विटामिन D की कमी बहुत आम है। इसलिए न्यूट्रिशन की कमी को पूरा करने के लिए सप्लीमेंट्स लेना ज़रूरी है और इसे सामान्य माना जाना चाहिए। दोनों का मानना था कि सप्लीमेंट्स को सेहत का ख्याल रखने के एक पॉजिटिव स्टेप के रूप में देखा जाना चाहिए, ना कि शर्म की बात समझा जाए।

मेनोपॉज़ से जुड़ी शर्म पर बातचीत

बातचीत में इस बात पर भी ज़ोर दिया गया कि कैसे मेनोपॉज़ को लेकर समाज में शर्म और चुप्पी फैली हुई है। खासकर यह सोच कि मेनोपॉज़ का मतलब है कि अब औरत "बूढ़ी" हो रही है।

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यह विषय भारतीय महिलाओं के लिए और भी अहम हो जाता है, क्योंकि उन्हें दुनिया की तुलना में जल्दी मेनोपॉज़ आ जाता है। साथ ही, कई बार महिलाएं खुद भी इस बदलाव को लेकर शर्म महसूस करती हैं जिसे बदलने की ज़रूरत है।

मेनोपॉज़ और बढ़ती उम्र में फर्क ज़रूरी है: शैली और जेनेलिया की बातें

शैली चोपड़ा ने डॉक्टर नोज़र शेरियार से अपनी बातचीत को याद करते हुए बताया कि उन्होंने मेनोपॉज़ और उम्र बढ़ने के फर्क को समझना बहुत ज़रूरी बताया। एक महिला को कम उम्र में भी मेनोपॉज़ हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह तुरंत बूढ़ी दिखने लगेगी। इस फर्क को समझना जरूरी है ताकि मेनोपॉज़ से जुड़ी शर्म और गलतफहमियों को दूर किया जा सके।

क्या महिलाएं डरती हैं?

जेनेलिया देशमुख ने भी कहा कि बहुत सी महिलाएं मेनोपॉज़ पर बात करने से इसलिए डरती हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे वे "बूढ़ी" लगेंगी। लेकिन उन्होंने इस सोच को चुनौती देते हुए कहा – "बूढ़ा दिखना भी सुंदर होता है।" उन्होंने बताया कि उन्हें उम्र के साथ आने वाले बदलाव अच्छे लगते हैं और वे अपनी 18 साल की उम्र जैसी नहीं दिखना चाहतीं।

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उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जब तक हम महिलाएं खुद मेनोपॉज़ या पीरियड्स जैसे विषयों को अपनाकर उनसे जुड़ी शर्म को नहीं तोड़ेंगी, तब तक समाज में इन मुद्दों से जुड़ा टैबू बना रहेगा।