Via (Shaili Chopra Show)
सपनों का पीछा करना आसान नहीं होता, खासकर तब जब रास्ते में पारिवारिक उम्मीदें, समाज की धारणाएँ और असफलता का डर खड़ा हो। लेकिन कुछ लोग इन सीमाओं को चुनौती देकर अपनी अलग पहचान बनाते हैं। अभिनेत्री दिव्या दत्ता भी उन्हीं में से एक हैं। SheThePeopleTV की संस्थापक शेली चोपड़ा के साथ खास Interview में दिव्या ने अपने संघर्ष, फैसलों और उन पलों को साझा किया जब उन्हें अपने सपनों के लिए तय नियमों को तोड़ना पड़ा।
“मैंने अपने सपनों को चुना” — Divya Dutta ने Shaili Chopra के साथ बातचीत में तोड़ी पारिवारिक अपेक्षाओं की सीमाएँ
सपनों के लिए लिया मुश्किल फैसला
बातचीत के दौरान दिव्या ने बताया कि अभिनय को करियर के रूप में चुनना उनके लिए आसान निर्णय नहीं था। एक पारंपरिक माहौल में पली-बढ़ी दिव्या के सामने सुरक्षित रास्ता चुनने की उम्मीद थी, लेकिन उन्होंने अपने दिल की आवाज़ सुनी।
उन्होंने कहा कि कई बार जीवन में ऐसे मोड़ आते हैं जहाँ आपको यह तय करना होता है कि आप दूसरों की उम्मीदों के अनुसार चलेंगे या अपने सपनों का रास्ता चुनेंगे।
“मैंने नियम तोड़े” — साहस की शुरुआत
दिव्या ने ईमानदारी से स्वीकार किया कि अपने सपनों को चुनना एक तरह से नियम तोड़ने जैसा था। उन्होंने बताया कि यह विद्रोह नहीं, बल्कि खुद को समझने और अपनी पहचान बनाने की कोशिश थी।
उनके अनुसार, नियम तोड़ना हमेशा गलत नहीं होता—कभी-कभी यह आत्मविश्वास और स्वतंत्रता की ओर पहला कदम बन जाता है।
संघर्ष और असुरक्षा के पल
दिव्या ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखना अनिश्चितताओं से भरा था। अस्वीकृति, संघर्ष और खुद पर संदेह जैसे अनुभवों ने उन्हें कई बार कमजोर महसूस कराया।
लेकिन उन्होंने हार मानने की बजाय इन अनुभवों को सीख में बदलने का फैसला किया। उनके मुताबिक असफलता ही वह जगह है जहाँ व्यक्ति अपने भीतर की ताकत को पहचानता है।
परिवार की समझ और समर्थन
हालांकि शुरुआत में परिवार को उनके फैसले को समझने में समय लगा, लेकिन धीरे-धीरे उनके जुनून और मेहनत ने परिवार का भरोसा जीत लिया। दिव्या ने कहा कि संवाद और धैर्य किसी भी रिश्ते में सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।
उन्होंने यह भी साझा किया कि जब परिवार आपके प्रयासों और संघर्ष को देखता है, तो समर्थन अपने-आप मिलने लगता है।
खुद पर भरोसा ही असली ताकत
शेली चोपड़ा के साथ बातचीत में दिव्या ने आत्मविश्वास को सफलता की सबसे बड़ी कुंजी बताया। उन्होंने कहा कि बाहरी मान्यता से ज्यादा जरूरी है कि आप खुद पर विश्वास रखें।
उनके अनुसार, जब व्यक्ति खुद को स्वीकार कर लेता है, तब डर और तुलना का प्रभाव कम हो जाता है और निर्णय लेना आसान हो जाता है।
महिलाओं के लिए प्रेरणादायक संदेश
दिव्या ने महिलाओं को यह संदेश दिया कि उन्हें अपनी इच्छाओं और पहचान को दबाने की जरूरत नहीं है। समाज की अपेक्षाएँ बदलती रहती हैं, लेकिन अपने सपनों के प्रति ईमानदारी ही लंबे समय में संतोष देती है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपनी आवाज़ उठाने, जोखिम लेने और गलतियों से सीखने से डरना नहीं चाहिए।
सफलता की नई परिभाषा
दिव्या के अनुसार सफलता केवल उपलब्धियों से नहीं, बल्कि उस संतोष से मापी जाती है जो अपने चुने हुए रास्ते पर चलते हुए मिलता है। उन्होंने बताया कि हर उपलब्धि के पीछे अनगिनत छोटे फैसले और साहस भरे कदम होते हैं, जिन्हें अक्सर लोग देख नहीं पाते।
SheThePeopleTV के इस इंटरव्यू में दिव्या दत्ता की कहानी यह दर्शाती है कि सपनों का रास्ता हमेशा आसान नहीं होता, लेकिन साहस और आत्मविश्वास के साथ इसे तय किया जा सकता है।
“नियम तोड़ना” उनके लिए विद्रोह नहीं, बल्कि खुद को समझने और अपनी पहचान बनाने की प्रक्रिया रही। उनकी यात्रा हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों और समाज की अपेक्षाओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।
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