ब्लॉग

असीमा चटर्जी : भारत की पहली महिला जिन्हें डॉक्टरेट ऑफ साइंस (DSc) प्रदान किया गया

Published by
Katyayani Joshi

साइंस की दुनिया हमेशा से ही मेल डोमिनटेड रही है। 20वी सदी में महिलाओं को साइंस में करियर बनाने की इजाज़त नहीं होती थी। और उसमें भी बहुत कम महिलाएं ऐसी थीं जिनको उनके अचिवमेंट्स के लिए क्रेडिट मिला हो।

असीमा चटर्जी एक ऐसी ही महिला थीं। एक सफल आर्गेनिक केमिस्ट जो पहली महिला थीं जिनको डी.एससी(डॉक्टरेट ऑफ साइंस) की उपाधि(डिग्री) इंडियन यूनिवर्सिटी से प्राप्त हुई।

जन्म और पढ़ाई

1917 में डॉक्टर इंद्र नारायण मुखर्जी और कमला देवी के घर में जन्मी आसिमा चटर्जी कलकत्ता में ही पली बढ़ी।

उन्होंने डॉक्टरल डिग्री पी के बोस के गाइडेंस में प्राप्त की और उनके इंस्ट्रक्टर रहे प्रफुल्ल चंद्र रॉय और प्रोफेसर सत्येंद्र नाथ बोस।

लेडी ऑफ मैनी फर्स्टस

  • 1940 में चटर्जी ने लेडी ब्रबॉर्न कॉलेज कलकत्ता को फाउंडर हेड ऑफ केमिस्ट्री डिपार्टमेंट के रूप में जॉइन किया। उनको बाद में कलकत्ता यूनिवर्सिटी में आनरेरी लेक्चरर की पोस्ट दी गयी।
  • यूनाइटेड स्टेट्स और यूरोप में उनके बिताये गए समय में उन्होंने केमिस्ट्री की फील्ड में जाने माने साइंटिस्ट्स के साथ कई कलबोराशन्स किये।
  • 1950 में वापस भारत लौटने पर उन्होंने भारतीय मेडिसिनल हर्ब्स की पढ़ाई करी। उन्होंने सफलतापूर्वक एन्टी एपिलेप्टिक और एन्टी मलेरियल दवाईयां जो अब सारी जगह मार्केट होती हैं उन्हें डेवेलोप किया।
  • उन्होंने विन्का अल्कालोइड्स जो मेडागास्कर पेरिविंकल प्लांट्स से आते हैं उनपर काम किया। ये हर्ब्स केमोथेरेपी में कैंसर सेल्स को मल्टीप्लाई होने से रोकते हैं।

  • चटर्जी पहली डॉक्टरेट ऑफ साइंस पाने वाली महिला तो थीं हीं साथ मे वो पहली महिला साइंटिस्ट थी जिन्होंने खैरा प्रोफ़ेसर ऑफ केमिस्ट्री की पोस्ट सम्भाली। वो पहली महिला साइंटिस्ट थीं जिन्होंने इंडियन यूनिवर्सिटी में चेयर किया। ये पोजीशन कलकत्ता यूनिवर्सिटी में अभी भी सबसे ज़्यादा प्रेस्टीजियस है। उन्होंने ये पोजीशन 1982 तक सम्भाली।
  • वो पहली महिला साइंटिस्ट बनी जिनको इंडियन साइंस कांग्रेस एसोसिएशन में जनरल प्रेजिडेंट के रूप में इलेक्ट किया गया।
  • उसी साल उन्हें उनके साइंस के क्षेत्र में योगदान के लिए बंगाल चैम्बर ऑफ कॉमर्स के द्वारा वुमन ऑफ द ईयर का सम्मान प्राप्त हुआ।
  • इससे पहले उन्हें इलेक्ट किया गया फेलो ऑफ इंडियन नेशनल साइंस अकादमी, नई दिल्ली के रूप में।
  • आसिमा चटर्जी को सी वी रमन अवार्ड और शांति स्वरूप भटनागर अवार्ड जो साइंस के क्षेत्र में उच्चतम मेडल्स होते हैं से सम्मानित किया गया है।
  • उनको 1975 में पदम् भूषण से भी नवाजा जा चुका है।
  • उन्हें राज्य सभा के मेंबर के रूप में भी राष्ट्रपति द्वारा नॉमिनेट किया गया और वो 1990 तक इस पोस्ट पर सर्व करती रहीं।
  • उन्होंने नेशनल और इंटरनेशनल जर्नल्स में 400 से ज़्यादा पेपर्स लिखे। वो सिक्स वॉल्यूम सीरीज, द ट्रीटीस ऑफ इंडियन मेडिसिनल प्लांट्स की चीफ एडिटर रहीं जो कि सीएसआईआर(CSIR) द्वारा पब्लिश की गई।

असीमा चटर्जी को भले ही हिस्ट्री याद ना रखे पर उनके स्टूडेंट्स के मेमोरिअल्स से हमें उनका पता चलता है। उनके साइंस के क्षेत्र में योगदान बहुत महत्वपूर्ण रहे हैं।

और पढ़िए- मिलिए इसरो की साइंटिस्ट मणि मंगला से जिन्होंने 1 साल अंटार्टिका में बिताया

Recent Posts

श्रद्धा कपूर के बारे में 10 बातें

1. श्रद्धा कपूर एक भारतीय एक्ट्रेस और सिंगर हैं। वह सबसे लोकप्रिय और भारत में…

29 mins ago

सुष्मिता सेन कैसे करती हैं आज भी हर महिला को इंस्पायर? जानिए ये 12 कारण

साल 1994 में सुष्मिता सेन ने भारत के लिए पहला "मिस यूनिवर्स" खिताब जीता था।…

47 mins ago

केरल रेप पीड़िता ने दोषी से शादी की अनुमति के लिए SC का रुख किया

केरल की एक बलात्कार पीड़िता ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख कर पूर्व कैथोलिक…

3 hours ago

टोक्यो ओलंपिक : पीवी सिंधु सेमीफाइनल में ताई जू से हारी, अब ब्रॉन्ज़ मैडल पाने की करेगी कोशिश

ओलंपिक में भारत के लिए एक दुखद खबर है। भारतीय शटलर पीवी सिंधु ताई त्ज़ु-यिंग…

3 hours ago

वर्क और लाइफ बैलेंस कैसे करें? जाने रुटीन होना क्यों होता है जरुरी?

वर्क और लाइफ बैलेंस - बहुत बार ऐसा होता है जब हम अपने काम में…

4 hours ago

योग क्यों होता है जरुरी? जानिए अनुलोम विलोम करने के 5 चमत्कारी फायदे

अनुलोम विलोम करने से अगर आपके फेफड़ों में किसी तरह की कोई विषैली गैस होती…

4 hours ago

This website uses cookies.