जैसा कि हम सब जानते है की शादी किसी भी महिला की जिंदगी का एक खूबसूरत पड़ाव होता है। शादी के बाद अपनी फैमिली और लाइफ को कैसे आगे बढ़ाना है, इस बारे में हर महिला अलग तरह से सोचती हैं। बच्चे कब होने चाहिए, कितने होने चाहिए, बच्चों के बीच कितना अंतर होना चाहिए, कब गर्भनिरोधक (contraceptives) का इस्तेमाल करना चाहिए और कब नहीं करना चाहिए, इस बारे में सभी महिलाओं की अलग राय होती है। और काफी लोगों को इस बारें में पता भी नही होता।

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तो चलिए आज हम आपको डॉ तान्या द्वारा बताए गए अलग-अलग गर्भनिरोधक (contraceptives) यूज़ करने के मेथड और वह किस-किस तरह से काम करता है, बताते हैं।

4 गर्भनिरोधक जिनके बारे में आपको पता होना चाहिए

कॉन्डम (Condom)

गर्भनिरोधक (contraceptives)  के तौर पर सबसे कारगर कॉन्डम है। यह दो तरह के होते है- इंटर्नल और एक्सटर्नल। यह न सिर्फ कॉन्ट्रासेप्शन की तरह काम करता है बल्कि इससे इंफेक्शन से फैलने वाली बीमारियों से भी बचा जा सकता है। इसे इस्तेमाल करना आसान है और इसकी कीमत भी काफी कम है।

इसे यूज़ करते समय डॉ तान्या कुछ बातें ध्यान में रखने को कहती हैं जैसे

-कॉन्डम को पूरी तरह न खोलें।

-कभी-कभी कॉन्डम  सीधा या उल्टा भी खुल सकता है। इसलिए ध्यान से सीधी तरफ से ही अप्लाई करें।

-कॉन्डम अप्लाई करते समय शुरुआती टिप पर कुछ जगह ज़रूर छोड़ें।

रेग्युलर आई-पिल्स (Regular I Pill)

प्रेग्नेंसी से बचने के लिए रोज खाई जाने वाली गोलियों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इन गोलियों को रोज खाने से प्रेग्नेंसी की संभावना काफई कम हो जाती है। इन्हें पीरियड शुरू होने के दिन से लेना शुरू करना होता है। गोली की शुरुआत करने के बाद दूसरे ऑप्शन अपनाने की जरूरत नहीं होती।

स्टेरेलाइजेशन (Sterilization)

स्टेरेलाइजेशन एक परमानेंट गर्भनिरोधक (contraceptive) है। इसे ऑपरेशन या ट्यूबेक्टॉमी भी कहा जाता है। इसमें सर्जरी करके उस रास्ते को बंद कर दिया जाता है जिनसे होकर अंडे प्रेगनेंसी के प्रोसेस के लिए स्पर्म से मिलते हैं। डॉ तान्या के अनुसार यह उन महिलाओं के लिए काफी सही है जो आगे नेचुरल तरीके से कभी बच्चा नहीं चाहतीं। वैसे, महिलाओं के मुकाबले यह ऑपरेशन पुरुषों के लिए ज्यादा कारगर और सहूलियत भरा रहता है।

IUD (इंट्रा यूटेराइन डिवाइस)

इंट्रा यूटेराइन डिवाइस यानी यूटरस में लगने वाले डिवाइस दो शेप के होते हैं: Tऔर U। T शेप वाले को कॉपर टी और U शेप वाले डिवाइस को मल्टिलोड कहा जाता है। इसे यूटरस में फिट कर दिया जाता है। कॉपर-टी में कॉपर तार लिपटी एक प्लास्टिक की रॉड होती है, जिसमें दो प्लास्टिक के हाथ होते हैं। इसके एक सिरे पर नायलॉन का बना धागा होता है। इसे यूटरस के अंदर इस तरह से लगाया जाता है कि ऑव्युलेशन के बाद अंडे फर्टाइल होने के लिए यूटरस तक न पहुंच सकें। यह लंबे समय तक प्रेग्नेंसी को रोकने का अच्छा तरीका है। मल्टि-लोड डिवाइस U शेप का होता है। मल्टिलोड लंबे वक्त तक गर्भ रोकने का बहुत सटीक तरीका है और काफी कारगर माना जाता है। जरूरत पड़ने पर इसे हटवाया भी जा सकता है और महिलाएं फिर से प्रेगनेंट हो सकती हैं।

इन सब तरीकों को अपनाकर आप बेफिक्री से अपनी सेक्स लाईफ एंजॉय कर सकती हैं।

(Multi-load device)

यह मल्टि-लोड डिवाइस U शेप का होता है। मल्टिलोड लंबे वक्त तक गर्भ रोकने का बहुत सटीक तरीका है और काफी असरदार माना जाता है। यह भी लंबे समय के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसे ज्यादातर वे महिलाएं अपनाती हैं जो एक बच्चे को जन्म दे चुकी हैं। जरूरत पड़ने पर इसे हटवाया भी जा सकता है और महिलाएं फिर से प्रेगनेंट हो सकती हैं। मल्टि-लोड चुनते वक्त महिलाएं 3, 5 या 10 साल तक का ऑप्शन चुन सकती हैं।

डिम्पा (DIMPA) 

आखिर में डॉक्टर तान्या कहती हैं, DIMPA एक (hormonal injection) है जो एक बार लगाने पर महिलाएँ 3 महीने तक रिलैक्स हो जाती हैं। इन 3 महिनों में अगर आपने कोई दुसरा (contraceptive) इस्तेमाल ना भी किया हो तो प्रेग्नेंसी का कोई डर नहीं रहता क्योंकि DIMPA काफी (effective) होती है। 

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