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“गार्डनिंग प्रकृति से जुड़ने का एक तरीका है “- शैली मालवी

Published by
Ayushi Jain

“गार्डनिंग प्रकृति से जुड़ने का एक तरीका है ” यह कहना है होम गार्डनर शैली मालवी का जो अपने घर में ही गार्डनिंग करती हैं और उन्हें गार्डनिंग का शौंक अपने दादाजी से मिला है। आज हम बात करेंगे शैली मालवी से उनके गार्डनिंग एक्सपीरियंस के बारे में शीदपीपल.टीवी पर एक  इंटरव्यू में।

1.आपने गार्डनिंग करना कब शुरू किया?

मुझे गार्डनिंग करते हुए करीब 7 साल हो चुके है। गार्डनिंग का शौंक मुझे मेरे दादाजी से मिला, उन्होंने हमारी छत पर बहुत ही ख़ूबसूरत गार्डन बनाया है, जिसे अब मैं संभाल रही हूँ । जब मैं छोटी थी तब वह मुझे रोज़ सुबह स्कूल जाने के पहले एक गुलाब देते थे इसलिए मैं बचपन से ही पेड़ पौधों के नज़दीक रही हूँ, और अब जैसे ये मेरे जीवन का हिस्सा बन गया है। अपने दादाजी के नक़्शे कदमपर चलते हुए मैंने भी अपना एक छोटा-सा बालकनी गार्डन पिछले कुछ सालों में तैयार किया है।

2 आप गार्डनिंग में कौन – कौन से पौधे उगाती हैं ?

हमारे गार्डन में हर तरह के पौधे है, चाहे वह फूल वाले पौधे हो, या सब्ज़ियों के या फिर फोलिएज पौधे हो। इन सबके साथ-साथ हमारे गार्डन में काफ़ी हर्ब्स भी है, जैसे कि लेमन ग्रास, तुलसी, आल स्पाइस, पुदीना, दालचीनी और नीम। लॉकडाउन की वज़ह से इस बार मैंने कई प्रकार की सब्ज़ियाँ भी उगाई है जैसे लौकी, गिलकी, करेला, टिंडे, टमाटर, धनिया, पालक और भी बहुत कुछ। इसके अलावा मैंने कई तरह के फूल भी उगाए है जिन्हे हम सजावट के आलावा कई तरह से चाय में भी उपयोग कर सकते है, जैसे अपराजिता, गुड़हल, मोगरा आदि।

मेरे हिसाब से गार्डनिंग के लिए जो इन्वेस्टमेंट की ज़रूरत है वह है समय की, क्रिएटिविटी की और इंटरेस्ट की। – शैली मालवी

3.आपके अनुसार बाकी लोगों को गार्डनिंग को अपने जीवन का हिस्सा क्यों बनाना चाहिए ?

गार्डनिंग एक तरीक़ा है प्रकृति से जुड़ने का, हमारी हर ज़रूरत प्रकृति पर ही निर्भर करती है, तो यह हमें एक ज़िम्मेदारी भी देती है। ज़िम्मेदारी ये की हम अपने पर्यावरण का ध्यान रखे। आज की भाग दौड़ भरी जिंगदी में गार्डनिंग हमें एक इकोलॉजिकल कनेक्ट देती है जिससे हमें काफ़ी सुकून और ख़ुशी मिल सकती है। मै मानती हूँ की गार्डनिंग से हमें मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की स्थिरता मिलती है और अगर आप अपनी ख़ुद की सब्ज़ियाँ और फल उगाते है तो उसकी संतुष्टि से ऊपर कुछ और है ही नहीं। बच्चो के लिए तो यह और भी महत्त्वपूर्ण गतिविधि हो सकती है, बच्चे इससे ये सीख सकते है कि उनका खाना कितनी मुश्किलों से उगाया जाता है और इससे वह अपने खाने की और क़दर करना सीख सकते है। इसके आलावा पौधे लगाना एक बहुत ही इकोफ्रैंडली तरीक़ा है अपने घर की सुंदरता बढ़ने का और इसी वज़ह से मुझे लगता ह हर इंसान को कम से कम एक पौधा तो उगाना ही चाहिए।

और पढ़ें: गार्डनिंग करना हमें लाइफ स्किल्स सिखाता है – प्रतिभा शाक्या

4. गार्डनिंग हमे रोज़मर्रा के जीवन में किस तरह से मदद करती है?

अगर हम रोज़मर्रा के जीवन में गार्डनिंग की भूमिका देखे तो ये काफ़ी महत्त्वपूर्ण साबित होती है। गार्डनिंग से हमें चीज़ों की ज़िम्मेदारी लेना आता है, हमें अपना टाइम मैनेजमेंट करना आता है, हमें धैर्य से कार्य करना आता है। गार्डनिंग करते वक़्त हमारा कई तरह के कीट पतंगों से सामना होता है, हम इससे उनकी लाइफ साइकिल के बारे में जान सकते है, कैसे वह हमारे पौधे के लिए ज़रूरी है, आदि। हम अनिश्चितता के साथ भी जीना सीखते है। आख़िर में सबसे ज़रूरी चीज़ को गार्डनिंग हमें सिखा सकती है वह है कड़ी मेहनत करना।

5. आपका लॉक डाउन में गार्डनिंग का एक्सपीरियंस कैसा रहा ?

लॉक डाउन में मुझे काफ़ी समय मिला अपने पौधों के साथ बिताने के लिए, मैंने इस समय में कई तरह की सब्ज़ियों के बीज बोए जिसके मुझे काफ़ी अच्छे परिणाम मिले। लॉक डाउन में जब सब लोग घर पर ही थे तो वेजिटेबल गार्डनिंग की वज़ह से सब साथ आए और सबने थोड़ी-थोड़ी गार्डनिंग की । इस दौरान हमने अपनी पूरी छत की साफ़-सफ़ाई करी और उसे बेहतर किया। लॉक डाउन में मैंने कम्पोस्टिंग भी करी है जिससे गार्डन और घर का सारा गीला कचरा हमारे घर में ही प्रोसेस होकर खाद में बदला जाता है। कम्पोस्टिंग से हम बाहर की कचरा गाड़ी आदि पर से अपनी निर्भरता कम कर सकते है, यह एक ऐसी आदत है जिसे हम सबको अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए. इसके आलावा बाहर न जाने के कारण मैंने घर में आसानी से मिलने वाली बोरियों से ग्रो बैग्स बनाए जिसमे अब मेरी सब्ज़ियाँ जैसे कि प्याज़, अदरक, लहसुन, और अरवी काफ़ी अच्छे से चल रही है और ये सब सब्ज़ियाँ भी मैंने बाज़ार से मिलने वाली सब्ज़ियों से ही उगाई है। तो इस प्रकार लॉक डाउन में मैंने काफ़ी गार्डनिंग करी।

गार्डनिंग से हमें मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की स्थिरता मिलती है और अगर आप अपनी ख़ुद की सब्ज़ियाँ और फल उगाते है तो उसकी संतुष्टि से ऊपर कुछ और है ही नहीं। – शैली मालवी

6.क्या गार्डनिंग करने के लिए हमे किसी हाई इन्वेस्टमेंट या हेल्प की ज़रूरत है या कोई भी आसानी से गार्डनिंग कर सकता है ?

मैंने कई बार काफ़ी लोगों से सुना है कि गार्डनिंग एक बहुत महंगा शौक है, लेकिन ये एक काफ़ी ग़लत धारणा है। आप घर पर आसानी से मिलने वाले एक छोटे से प्लास्टिक बैग या प्लॉस्टिक बोतल में भी अपने गार्डन की शुरुवात कर सकते है। अगर आपको वेजिटेबल गार्डनिंग शुरू करनी है तो आप घर के अपने मसाले के डब्बे के लिए मेथी दाना, धनिया को ग्रो कर सकते है। अगर आपके पास मिट्टी नहीं है तो आप ये पत्तेदार सब्ज़ियाँ पानी में भी बिना किसी इन्वेस्टमेंट के ग्रो कर सकते है, इस तकनीक को हीड्रोपोनिक्स बोलते है। आप किसी भी पुराने बर्तन, टोकरा, बोरियाँ आदि में पौधे ऊगा सकते है। सब्ज़ियाँ जैसे प्याज़, लहसुन, अदरक, अरबी, आलू को आप बाज़ार में मिलने वाली सब्ज़ियों से बड़ी आसानी से ग्रो कर सकते है। मेरे हिसाब से गार्डनिंग के लिए जो इन्वेस्टमेंट की ज़रूरत है वह है समय की, क्रिएटिविटी की और इंटरेस्ट की।

और पढ़ें: “गार्डनिंग हमारे रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में एक तरह का अनुशासन लाती है”- उन्नति कोप्पिकर

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